मुंबई। टाटा ट्रस्ट्स के भीतर एक बार फिर बड़े बदलाव की चर्चा तेज़ हो गई है। माना जा रहा है कि 17 जनवरी को होने वाली बोर्ड बैठक में नेविल टाटा को सर रतन टाटा ट्रस्ट का ट्रस्टी बनाए जाने पर विचार किया जा सकता है। अगर ऐसा होता है, तो यह कदम टाटा समूह की भविष्य की दिशा को लेकर अहम माना जाएगा। इससे पहले नवंबर 2025 में नेविल टाटा को सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट में ट्रस्टी की जिम्मेदारी दी जा चुकी है, जिससे उनके बढ़ते कद का अंदाज़ा लगाया जा सकता है। सर रतन टाटा ट्रस्ट और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट, टाटा संस के सबसे बड़े शेयरधारक हैं और समूह के लगभग सभी बड़े कारोबारों पर इनका प्रभाव रहता है। टाटा संस के जरिए नमक, स्टील, आईटी, ऑटोमोबाइल से लेकर उभरते सेमीकंडक्टर जैसे व्यवसाय संचालित होते हैं।
स्टार बाजार के प्रमुख हैं नेविल टाटा
ऐसे में किसी भी नए ट्रस्टी की नियुक्ति केवल औपचारिक फैसला नहीं, बल्कि शक्ति संतुलन और दीर्घकालिक रणनीति से जुड़ा विषय होती है। 33 वर्षीय नेविल टाटा फिलहाल स्टार बाजार के प्रमुख हैं, जो ट्रेंट के सुपरमार्केट कारोबार का हिस्सा है। रिटेल सेक्टर में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई है और कई अहम फैसलों में उनकी भागीदारी रही है। उद्योग जगत के जानकारों का मानना है कि ट्रस्ट्स में उनकी एंट्री, टाटा समूह में नई पीढ़ी को धीरे-धीरे निर्णायक भूमिका में लाने की प्रक्रिया का हिस्सा है। नेविल, नोएल टाटा और आलू मिस्त्री के पुत्र हैं। आलू मिस्त्री, शापूरजी पल्लोनजी समूह के पूर्व चेयरमैन पलोनजी मिस्त्री की बेटी हैं, जिनके परिवार की टाटा संस में बड़ी हिस्सेदारी रही है। इस पारिवारिक पृष्ठभूमि के कारण भी नेविल की भूमिका को अहम माना जा रहा है।
मतभेदों की वजह से चर्चा में रहा ट्रस्ट
पिछले वर्ष टाटा ट्रस्ट्र्स आंतरिक मतभेदों को लेकर सुर्खियों में रहे थे। विवाद इतना बढ़ा कि हालात संभालने के लिए सरकारी हस्तक्षेप तक की नौबत आ गई थी। उसी दौर में रतन टाटा के करीबी माने जाने वाले मेहली मिस्त्री ने ट्रस्ट से इस्तीफा दे दिया था। ट्रस्ट्स के भीतर दो खेमों की चर्चा भी सामने आई थी। ऐसे माहौल में नेविल टाटा की संभावित नियुक्ति को संगठन में स्थिरता और सुधार की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। उनकी बहनें लिया और माया कुछ छोटे ट्रस्ट्स में सक्रिय हैं, लेकिन बड़े ट्रस्ट्स में अभी उनकी भूमिका नहीं है। कुल मिलाकर, नेविल टाटा का आगे आना टाटा ट्रस्ट्स में पीढ़ीगत बदलाव का साफ संकेत माना जा रहा है।