ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में 14 दिसंबर को हुए आतंकी हमले ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया। न्यू साउथ वेल्स राज्य के मशहूर बोंडी बीच पर यहूदी समुदाय के हनुक्का समारोह के दौरान अचानक हुई गोलीबारी में अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 40 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। यह हमला उस वक्त हुआ, जब यहूदी लोग हनुक्का को शांति और उल्लास के साथ मना रहे थे।
जांच एजेंसियों के अनुसार, इस आतंकी वारदात को अंजाम देने वाले दोनों हमलावर पिता-पुत्र थे। 50 वर्षीय पिता की मौके पर ही पुलिस कार्रवाई में मौत हो गई, जबकि 24 वर्षीय बेटा गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती है और पुलिस हिरासत में है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि दोनों ने मिलकर भीड़ को निशाना बनाया और अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी।

ऑस्ट्रेलियाई जांच एजेंसियां इस हमले को आतंकी एंगल से देख रही हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि हमलावर पाकिस्तानी मूल के थे। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बेटे का संबंध पाकिस्तान के लाहौर से बताया जा रहा है। सोशल मीडिया पर उसका ड्राइविंग लाइसेंस और अन्य जानकारियां भी वायरल हो रही हैं, जिनकी सत्यता की जांच की जा रही है।

पुलिस का कहना है कि पिता के पास छह लाइसेंसी हथियार थे और आशंका है कि इन्हीं हथियारों का इस्तेमाल हमले में किया गया। सुरक्षा एजेंसियां अब यह जानने में जुटी हैं कि हथियारों तक पहुंच कैसे और किन परिस्थितियों में मिली।
Credit- Social media
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पुलिस पूछताछ में आतंकी नवीद की मां वेरेना ने जो बताया, उसने पूरे मामले को और चौंकाने वाला बना दिया। वेरेना के मुताबिक नवीद पेशे से राजमिस्त्री था, लेकिन कुछ समय से बेरोजगार चल रहा था, जबकि उसका पिता फल बेचकर परिवार का गुजारा करता था।
वेरेना ने कहा कि रविवार को नवीद ने उन्हें फोन किया और कहा कि मैं अभी तैरने गया था, स्कूबा डाइविंग की, फिर खाना खाने जा रहे हैं, और सुबह तक घर पर रहेंगे क्योंकि बहुत गर्मी है। वेरेना ने कहा कि उन्हें यकीन नहीं है कि उनका बेटा ऐसा कुछ कर सकता है। उनका मानना है कि नवीद एक बहुत अच्छा बेटा है और हर मां-बाप अपने बेटे में वही अच्छाई चाहेंगे जो उनके बेटे में है।
इस हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बयानबाजी तेज हो गई है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ऑस्ट्रेलियाई सरकार पर यहूदी विरोधी माहौल को लेकर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि फिलिस्तीनी राज्य को मान्यता जैसे फैसले यहूदी समुदाय के खिलाफ नफरत को बढ़ावा देते हैं। वहीं ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने हमले की निंदा करते हुए सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।
घटना के बाद सिडनी समेत पूरे न्यू साउथ वेल्स में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। धार्मिक स्थलों, सार्वजनिक आयोजनों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। जांच एजेंसियां अब इस बात की कड़ी से कड़ी जोड़ने में लगी हैं कि यह हमला स्थानीय था या इसके पीछे कोई अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क सक्रिय था।
इस हमले में मरने वालों में 10 साल की एक मासूम बच्ची भी शामिल है, जबकि सबसे बुजुर्ग मृतक की उम्र 87 वर्ष बताई जा रही है। घायलों में महिलाएं, बच्चे और दो पुलिस अधिकारी भी शामिल हैं। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और सुरक्षा एजेंसियों ने तुरंत मोर्चा संभाला।