नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राजस्थान और मध्यप्रदेश में कफ सिरप से हुई 26 बच्चों की मौतों पर दाखिल एक जनहित याचिका (पीआईएल) को खारिज कर दिया है। याचिका वकील विशाल तिवारी द्वारा दायर की गई थी, जिसमें सीबीआई जांच और दवा सुरक्षा व्यापक सुधार की मांग की गई थी। साथ ही, याचिका में सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की जांच में निगरानी की बात भी शामिल थी। मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई की बेंच ने याचिका का विरोध करते हुए, उसे खारिज कर दिया। साथ ही, राज्य स्तर की जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर भरोसा जताया है।
वकील विशाल तिवारी ने याचिका में कई मांगें की थीं। पीआईएल में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज की निगरानी में सीबीआई और राष्ट्रीय न्यायिक आयोग द्वारा जांच की मांग की गई थी। जिसमें दोषी कंपनियों के लाइसेंस को खत्म करने की अपील थी। साथ ही, याचिका में पीड़ित परिवारों के मुआवजे की भी बात शामिल थी। याचिका में दावा किया गया कि राज्य स्तर पर कई बार जांच होती है, जिसमें अलग-अलग संस्थाओं को शामिल किया जाता है। जिस कारण गलती होती है और खतरनाक दवाइयां बाजार में उपलब्ध हो जाती हैं।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि राज्य सरकार इस मामले में कार्रवाई करने में सक्षम हैं। राज्य एजेंसी को जांच न करने देना, अविश्वास होगा। साथ ही, उन्होंने याचिकाकर्ताओं के लिए कहा कि 'कहीं भी कुछ होता है, ये अखबार पढ़कर याचिका दाखिल कर देते हैं।'