दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने कथित महाठग सुकेश चंद्रशेखर को ‘टू लीव्स’ सिंबल घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जमानत दे दी है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि किसी व्यक्ति को लंबे समय तक जेल में रखना उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता और त्वरित सुनवाई के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हो सकता है। हालांकि, कोर्ट से राहत मिलने के बावजूद सुकेश चंद्रशेखर फिलहाल जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे। इसकी वजह यह है कि उनके खिलाफ दर्ज अन्य मामलों में अभी भी जमानत नहीं मिली है।
जानकारी के मुताबिक, सुकेश चंद्रशेखर के खिलाफ कुल 31 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें से 26 मामलों में उन्हें पहले ही जमानत मिल चुकी है, लेकिन बाकी मामलों के चलते उनकी रिहाई फिलहाल संभव नहीं है।
राउज एवेन्यू कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि संविधान के तहत व्यक्तिगत आजादी सबसे महत्वपूर्ण अधिकारों में से एक है। अदालत ने साफ कहा कि, अगर अदालतें एक ओर व्यक्तिगत स्वतंत्रता की बात करें और दूसरी ओर किसी व्यक्ति को लंबे समय तक जेल में रखें, तो यह न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ होगा।
कोर्ट ने यह भी माना कि मनी लॉन्ड्रिंग गंभीर अपराध है और इसके लिए PMLA (Prevention of Money Laundering Act) जैसे विशेष कानून बनाए गए हैं। लेकिन अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस कानून का इस्तेमाल किसी आरोपी की स्वतंत्रता को अनावश्यक रूप से लंबे समय तक सीमित करने के लिए नहीं किया जा सकता।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि सुकेश चंद्रशेखर इस मामले में पहले ही इतनी अवधि जेल में बिता चुके हैं, जो PMLA की धारा 4 के तहत संभावित सजा की आधी अवधि से भी अधिक है। इसी आधार पर कोर्ट ने उन्हें जमानत देने का फैसला सुनाया।
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कोर्ट ने आदेश दिया कि सुकेश चंद्रशेखर को 5 लाख रुपए के निजी मुचलके और उतनी ही राशि की जमानत देने पर रिहा किया जा सकता है। हालांकि अदालत ने उनके ऊपर कई शर्तें भी लगाई हैं।
जमानत की प्रमुख शर्तें-
‘टू लीव्स’ सिंबल घोटाला साल 2017 में सामने आया एक चर्चित मामला है। यह मामला AIADMK पार्टी के चुनाव चिन्ह ‘टू लीव्स’ को लेकर कथित रिश्वतखोरी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि, उस समय पार्टी के एक गुट को चुनाव आयोग से चुनाव चिन्ह दिलाने के लिए करोड़ों रुपए के लेन-देन की कोशिश की गई थी। इस मामले में सुकेश चंद्रशेखर का नाम सामने आया था। बाद में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले की जांच करते हुए PMLA के तहत केस दर्ज किया।
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सुकेश चंद्रशेखर का नाम सिर्फ ‘टू लीव्स’ घोटाले तक सीमित नहीं है। उनके खिलाफ 200 करोड़ रुपए की ठगी का भी गंभीर आरोप है। यह मामला साल 2021 में उस समय चर्चा में आया, जब यह आरोप लगा कि सुकेश ने तिहाड़ जेल में रहते हुए ही बड़े पैमाने पर ठगी को अंजाम दिया। जांच में सामने आया कि उसने कथित तौर पर 200 करोड़ रुपए की उगाही की और इस रकम का इस्तेमाल कई महंगे गिफ्ट खरीदने में किया।
सुकेश चंद्रशेखर का नाम उस समय और ज्यादा चर्चा में आया जब इस मामले में बॉलीवुड अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिस का नाम सामने आया। जांच एजेंसियों के मुताबिक, सुकेश ने कथित तौर पर जैकलीन को करोड़ों रुपए के महंगे गिफ्ट्स दिए थे। इसके अलावा, सुकेश ने जेल से कई बार अभिनेत्री के नाम लव लेटर भी लिखे, जो मीडिया में काफी चर्चा का विषय बने। बाद में जैकलीन फर्नांडिस ने अदालत का रुख करते हुए कहा कि उनके नाम से जारी किए जा रहे पत्रों से उनकी छवि को नुकसान पहुंच रहा है।
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सुकेश चंद्रशेखर का जन्म कर्नाटक के बेंगलुरु में हुआ था। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई बिशप कॉटन बॉयज स्कूल से की और बाद में मदुरै यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया। बताया जाता है कि सुकेश ने बहुत कम उम्र में ही ठगी की दुनिया में कदम रख दिया था।
17 साल की उम्र में पहली गिरफ्तारी
जानकारी के मुताबिक, जब वह सिर्फ 17 साल का था, तब उसने अपने परिवार के एक करीबी व्यक्ति को करीब 1.5 करोड़ रुपए का चूना लगाया था। उसी मामले में उसकी पहली गिरफ्तारी हुई थी। इसके बाद से ही उसका नाम कई बड़े धोखाधड़ी मामलों में सामने आता रहा।
पत्नी भी विवादों में रही
सुकेश चंद्रशेखर की पत्नी लीना मारिया पॉल भी कई मामलों में सुर्खियों में रही हैं। जांच एजेंसियों के मुताबिक, कुछ मामलों में वह भी सुकेश की कथित गतिविधियों में शामिल रही हैं।
हालांकि अदालत ने ‘टू लीव्स’ सिंबल मामले में सुकेश को जमानत दे दी है, लेकिन उनकी रिहाई अभी संभव नहीं है। इसकी वजह यह है कि, उनके खिलाफ दर्ज कुल 31 मामलों में से 5 मामलों में अभी जमानत नहीं मिली है। जब तक इन मामलों में भी अदालत से राहत नहीं मिलती, तब तक सुकेश चंद्रशेखर को जेल में ही रहना होगा।
राउज एवेन्यू कोर्ट के फैसले से सुकेश चंद्रशेखर को एक मामले में राहत जरूर मिली है, लेकिन उनकी कानूनी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। 31 मामलों की लंबी सूची और गंभीर आरोपों के चलते आने वाले समय में अदालतों में इस मामले की सुनवाई और फैसले काफी अहम साबित हो सकते हैं।