पोप लियो XIV ने शनिवार को अपने अब तक के सबसे कड़े बयान में ईरान में चल रहे तनाव और अमेरिका-इजरायल के टकराव को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने 'सर्वशक्तिमानता के भ्रम' को युद्ध की बड़ी वजह बताते हुए दुनिया के नेताओं से तुरंत संघर्ष रोकने और शांति वार्ता शुरू करने की अपील की।
रोम के सेंट पीटर बेसिलिका में आयोजित प्रार्थना सभा के दौरान पोप ने कहा- स्वार्थ और धन की पूजा बहुत हो गई… शक्ति प्रदर्शन बहुत हो गया… युद्ध बहुत हो गया। हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर किसी देश या नेता का नाम नहीं लिया लेकिन उनका संदेश डोनाल्ड ट्रम्प और अमेरिकी नीतियों की ओर इशारा करता दिखा जहां सैन्य ताकत और धार्मिक आधार पर युद्ध को सही ठहराने की बात सामने आई है।
पोप लियो XIV ने कहा कि शांति के लिए प्रार्थना करना “बुराई के चक्र को तोड़ने” का तरीका है। उन्होंने सभी लोगों से अपील की कि वे अपने नेताओं पर दबाव बनाएं ताकि युद्ध खत्म हो और बातचीत का रास्ता अपनाया जाए।
पोप का यह बयान उस समय आया जब इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच अहम वार्ता चल रही है और क्षेत्र में एक अस्थायी युद्धविराम लागू है। वेटिकन को खासतौर पर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और इसके असर को लेकर चिंता है खासकर लेबनान में जारी संघर्ष को लेकर।
पोप ने साफ कहा कि भगवान किसी भी युद्ध को आशीर्वाद नहीं देते खासकर उन लोगों को नहीं जो बम गिराते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि धर्म के नाम पर हिंसा को सही ठहराना बेहद खतरनाक है।
शुरुआती दौर में पोप ने केवल शांति की अपील की थी लेकिन अब उनका रुख और सख्त हो गया है। उन्होंने हाल ही में ईरान को लेकर की गई कठोर टिप्पणियों को 'अस्वीकार्य' बताया और संवाद को ही एकमात्र रास्ता बताया।