Manisha Dhanwani
13 Jan 2026
इंदौर। सोशल मीडिया पर भागीरथपुरा का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने सत्ता के चुनावी जुमलों को नंगा कर दिया है। वीडियो में एक गली में लगा बोर्ड साफ नजर आता है, जिस पर बड़े अक्षरों में लिखा है- “प्रत्येक घर पहुंचेगा जल, जब खिलेगा कमल।” यह लाइन अब नारे से ज्यादा एक कड़वा व्यंग्य बन चुकी है। जिस इलाके में दूषित पानी से 23 लोगों की जान चली गई, वहां यह बोर्ड सरकार की नाकामी और झूठे वादों का सबसे बड़ा सबूत बनकर खड़ा है। चुनाव के वक्त जिस भरोसे के साथ यह नारा उछाला गया था, वही भरोसा आज लोगों के लिए मातम और आक्रोश में बदल चुका है। यह कोई साधारण नारा नहीं, बल्कि उस राजनीतिक खोखलेपन का आईना है, जिसने भागीरथपुरा को मौत के मुहाने पर ला खड़ा किया। जिस इलाके में अब तक 23 लोगों की जान दूषित पानी के कारण जा चुकी है, वहां सरकार पूरी तरह बैकफुट पर नजर आ रही है। पार्षद से लेकर क्षेत्रीय विधायक तक चुप्पी साधे बैठे हैं, मानो यह त्रासदी उनकी जिम्मेदारी ही न हो।
इलाके में कभी गाड़ियों के काफिलों के साथ दौड़ने वाले नेताओं की चमचमाती गाड़ियां अब कभी-कभार बंद कांच के भीतर से ही भागीरथपुरा की गलियों से गुजरती दिख जाती हैं। लेकिन किसी नेता में इतनी हिम्मत नहीं बची कि वह उतरकर पीड़ित परिवारों की आंखों में आंख डालकर बात कर सके। लोगों का गुस्सा, उनकी बेबसी और मौतों की चीखें अब सत्ता के कानों तक पहुंचने लायक भी नहीं मानी जा रही हैं। भागीरथपुरा के रहवासियों के लिए यह साफ हो चुका है कि वे सिर्फ चुनाव के समय याद किए जाते हैं, और उसके बाद उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया जाता है।
वायरल हो रहा यह वीडियो केवल एक बोर्ड नहीं दिखाता, बल्कि वह पूरे सिस्टम की नाकामी का पोस्टमार्टम करता है। चुनाव में कमल खिलने के बाद भी “प्रत्येक घर जल” का सपना साकार नहीं हुआ, बल्कि उसी पानी ने लोगों की जान ले ली। जिस वादे के सहारे वोट बटोरे गए, वही वादा आज लोगों के लिए मौत का पैगाम बन गया। भागीरथपुरा में हुआ मौत का तांडव इस बात का सबूत है कि ये नारे सिर्फ भाषणों और पोस्टरों तक सीमित हैं, जमीन पर उनकी कोई हैसियत नहीं।
भागीरथपुरा के रहवासी इस वीडियो के जरिए पूरे सिस्टम से सवाल कर रहे हैं। चुनाव में कमल खिलने के बाद भी न तो शुद्ध पानी पहुंचा, न ही बुनियादी सुविधाएं सुधरीं, उल्टा वही पानी लोगों की मौत का कारण बन गया। अब यह जुमला केवल दीवारों पर लिखा नारा नहीं, बल्कि प्रशासनिक विफलता की सबसे शर्मनाक पहचान बन चुका है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा यह वीडियो सरकार के लिए आईना है, जिसमें साफ दिख रहा है कि विकास के नाम पर किए गए वादे सिर्फ भाषणों तक सीमित थे, जमीन पर उनकी कोई सच्चाई नहीं थी। भागीरथपुरा की गलियों में अब यह सवाल गूंज रहा है कि क्या अगली बार फिर नए जुमलों से जनता को बहलाया जाएगा, या कभी इन खोखले वादों की राजनीतिक कीमत भी चुकाई जाएगी?
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