Aniruddh Singh
15 Jan 2026
मुंबई। पिछले एक साल में सिल्वर आधारित ईटीएफ में जबरदस्त तेजी देखने को मिली है। कुछ सिल्वर ईटीएफ ने इस अवधि में 188 प्रतिशत तक का रिटर्न दिया है, जो निवेशकों के लिए असाधारण माना जा रहा है। चांदी की कीमतों में यह उछाल मजबूत औद्योगिक मांग, सीमित आपूर्ति और वैश्विक बाजार में कीमती धातुओं के प्रति बढ़ते आकर्षण का नतीजा है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी तेज बढ़त के बाद निवेशकों को अब ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। विश्लेषकों के अनुसार, चांदी के दीर्घकालिक बुनियादी कारक अब भी मजबूत बने हुए हैं। इलेक्ट्रिक वाहनों, सोलर पैनलों, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में चांदी की मांग लगातार बढ़ रही है, जबकि नई आपूर्ति सीमित है।
इसी वजह से चांदी को भविष्य के लिहाज से एक महत्वपूर्ण धातु माना जा रहा है। लेकिन समस्या यह है कि कीमतें अब रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच चुकी हैं, जिससे अल्पकालिक जोखिम काफी बढ़ गया है। वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि जब किसी एसेट में अत्यधिक तेजी आ जाती है और उसमें फियर आॅफ मिसिंग आउट यानी मौका चूकने का डर हावी हो जाता है, तब अतिरिक्त सावधानी जरूरी हो जाती है। उनके अनुसार, लगभग 200 प्रतिशत की बढ़त के बाद मौजूदा ऊंचे स्तरों पर नया निवेश करना लंबे समय के लिए उचित नहीं माना जा सकता। जो निवेशक पहले से इसमें बने हुए हैं, वे चाहें तो निवेश जारी रख सकते हैं, लेकिन अतिरिक्त हिस्सेदारी को घटाकर पोर्टफोलियो को संतुलित करना समझदारी होगी।
अन्य बाजार विशेषज्ञों की भी यही राय है कि इतनी तेज रैली के बाद चांदी में निकट अवधि का जोखिम स्पष्ट रूप से बढ़ गया है। जिन निवेशकों को भारी मुनाफा हो चुका है, वे आंशिक मुनाफावसूली पर विचार कर सकते हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि चांदी की तेजी पूरी तरह खत्म हो गई है, बल्कि यह है कि जोखिम को नियंत्रित करना अब ज्यादा जरूरी हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कीमतों में कोई सुधार आता भी है, तो वह सीमित हो सकता है, क्योंकि दीर्घकालिक मांग और आपूर्ति का संतुलन अब भी चांदी के पक्ष में है। हाल के दिनों में घरेलू बाजार में भी चांदी की कीमतों ने नया रिकॉर्ड बनाया है। एमसीएक्स पर सिल्वर फ्यूचर्स में तेज उछाल देखा गया, जहां कीमतें एक ही दिन में दो प्रतिशत से ज्यादा बढ़ गईं।