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गैस सिलेंडर!चायवाले की दुकान पर डाला बुरा असर, दर्द- बेबसी भरे चेहरे ने कह दी ये बातें

चायवाले की दुकान पर डाला बुरा असर, दर्द- बेबसी भरे चेहरे ने कह दी ये बातें
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    लखनऊ। जंग मिडिल ईस्ट में और मार भारत को ये खबरे हम कई दिनों से सुन रहे जिसमें पहले तो देश पर तेल संकट की खबरे सामने आई थी जिसमें कहा गया कि देश के पास सिर्फ एक महीने या 50 दिन का तेल स्टॉक बचा है। लेकिन सिर्फ बात यहीं नहीं रुकी अब देश के घरों में LPG सिलेंडर की नई मुसीबत सामने आई है। यूपी के लखनऊ में एक चाय बेचने वाले शख्स की कहानी भी इस मुसीबत में फंस गए हैं उनकी चाय की दुकान पर इसका सीधा असर पड़ा है।

    शिवपाल का छलका दर्द

    चाय की दुकान चलाने वाले शख्स शिवपाल की आवाज में इन दिनों उदासी और चिंता साफ झलकती है। उनका कहना है कि अगर कमर्शियल गैस की सप्लाई प्रभावित हुई तो सबसे पहले असर छोटे कारोबारियों पर पड़ेगा। चाय की दुकान, ढाबा, होटल और छोटे रेस्टोरेंट चलाने वाले लोगों के सामने रोज़गार का संकट खड़ा हो सकता है।

    दरअसल पिछले कुछ दिनों से देश के कई शहरों में कमर्शियल गैस की उपलब्धता को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे में छोटे दुकानदारों और होटल व्यवसायियों के बीच डर का माहौल है कि कहीं गैस की किल्लत उनकी रोज़मर्रा की कमाई पर असर न डाल दे।

    अमेरिका-ईरान जंग से सप्लाई पर असर

    मौजूदा स्थिति की सबसे बड़ी वजह मध्य-पूर्व में बढ़ता सैन्य तनाव है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे टकराव के कारण अहम समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होमुर्ज से गैस और तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है। इसी वजह से भारत के कई राज्यों-जैसे उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान- में कमर्शियल गैस की सप्लाई पर अस्थायी रोक या सीमित वितरण की खबरें सामने आई हैं। इसका असर खासतौर पर होटल, रेस्टोरेंट और छोटे व्यापारियों पर पड़ रहा है।

    सरकार ने लागू किया आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955

    स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए केंद्र सरकार ने Essential Commodities Act 1955 के तहत कदम उठाए हैं ताकि गैस की जमाखोरी और कालाबाज़ारी को रोका जा सके। सरकार ने गैस सप्लाई को चार श्रेणियों में बांटा है। पहली श्रेणी में घरेलू पीएनजी और वाहनों में इस्तेमाल होने वाली सीएनजी शामिल हैं, जिनकी सप्लाई सामान्य रहेगी।

    दूसरी श्रेणी में खाद कारखानों को करीब 70 प्रतिशत गैस उपलब्ध कराई जाएगी। तीसरी श्रेणी में बड़े उद्योगों को लगभग 80 प्रतिशत गैस दी जाएगी, जबकि चौथी श्रेणी में शहरों के गैस नेटवर्क से जुड़े छोटे उद्योग, होटल और रेस्टोरेंट शामिल हैं, जिन्हें सीमित मात्रा में गैस दी जाएगी।

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    भारत LPG पर कितना निर्भर है?

    भारत में एलपीजी की खपत काफी बड़ी है। आंकड़ों के मुताबिक देश में हर साल करीब 33.15 मिलियन मीट्रिक टन एलपीजी की खपत होती है। इसमें से लगभग 67 प्रतिशत गैस आयात की जाती है।

    इन आयातों में भी बड़ा हिस्सा मिडिल ईस्ट से आता है। अनुमान के मुताबिक कुल आयात का 80 से 90 प्रतिशत हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है। ऐसे में अगर वहां सप्लाई प्रभावित होती है तो भारत जैसे देशों पर भी इसका असर पड़ना तय है।

    सरकार का दावा- स्थिति पूरी तरह कंट्रोल

    इस बीच नरेंद्र मोदी ने कैबिनेट बैठक में मंत्रियों से कहा कि वैश्विक उथल-पुथल के बावजूद जनता के बीच भरोसा बनाए रखना जरूरी है। प्रधानमंत्री ने भरोसा दिलाया कि देश के पास गैस का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और सप्लाई चेन को संभालने के लिए पहले से तैयारी की गई है।

    सरकार ने तेल और गैस की आपूर्ति के लिए रणनीति में बदलाव भी किया है। घरेलू उत्पादन बढ़ाने के साथ वैकल्पिक समुद्री रास्तों से आयात की व्यवस्था की जा रही है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक पिछले दो दिनों में एलपीजी उत्पादन में करीब 10 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की गई है ताकि संभावित संकट को टाला जा सके।

    Aakash Waghmare
    By Aakash Waghmare

    आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...Read More

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