इंदौर/भोपाल। इंदौर में पुलिस महकमे से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। अपराध शाखा में पदस्थ एएसआई रामपाल को कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और मोबाइल टावर लोकेशन जैसी गोपनीय जानकारी डिटेक्टिव एजेंसी संचालकों को बेचने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। कार्रवाई आतंकवाद विरोधी दस्ता और राज्य साइबर सेल ने संयुक्त रूप से की।
जांच एजेंसियों के अनुसार, एएसआई रामपाल को तीन दिन पहले हिरासत में लिया गया था। जांच के दौरान उसके संबंध मुकेश तोमर से सामने आए, जो “इंदौर डिटेक्टिव सर्विस” के नाम से एजेंसी संचालित करता है। आरोप है कि मुकेश तोमर जासूसी के नाम पर आम लोगों की निजी जानकारी भी अवैध रूप से बेच रहा था।
मोबाइल में मिले अहम सबूत
एटीएस द्वारा एएसआई के मोबाइल की जांच में कई ऐसे मैसेज और डेटा मिले हैं, जिनमें मोबाइल नंबरों की टावर लोकेशन और कॉल डिटेल साझा की गई थी। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह संवेदनशील जानकारी अवैध तरीके से जुटाई गई और पैसे लेकर बेची गई।
सूत्रों के मुताबिक, ऑपरेशन की कमान ए. साईं मनोहर के पास थी। लोकेशन ट्रेस कर एटीएस टीम ने एएसआई रामपाल को सोलापुर (महाराष्ट्र) से हिरासत में लिया। उसके साथ मौजूद प्रधान आरक्षक राहुल बाथम और आरक्षक कन्हैया दांगी से पूछताछ के बाद उन्हें छोड़ दिया गया, जबकि रामपाल के मोबाइल में संदिग्ध डेटा मिलने के चलते उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस ने इस मामले में एक अन्य डिटेक्टिव एजेंसी संचालक योगेश को भी हिरासत में लिया है। आशंका है कि यह एक बड़ा नेटवर्क हो सकता है, जो गोपनीय सूचनाओं को अवैध रूप से इकट्ठा कर बेच रहा था।
एएसआई रामपाल के खिलाफ कार्रवाई के बाद उनके परिजनों में चिंता का माहौल है। परिवार के करीबी लोगों का कहना है कि उन्हें इस तरह की गतिविधियों की जानकारी नहीं थी। अचानक गिरफ्तारी की खबर से परिवार सामाजिक और मानसिक दबाव में है।
शनिवार को एटीएस ने रामपाल के खिलाफ राज्य साइबर सेल में प्रकरण दर्ज कर उसे कोर्ट में पेश किया और रिमांड की मांग की है। उसका मोबाइल और लैपटॉप जब्त कर लिया गया है। हालांकि, राजेश त्रिपाठी के अनुसार, एटीएस और साइबर सेल की ओर से आधिकारिक रूप से गिरफ्तारी की सूचना अभी साझा नहीं की गई है।