सूखे का संकट!सीहोर में बारिश की बेरुखी से किसान परेशान, सोयाबीन-मक्का की फसल खतरे में, खेतों में पड़ी दरारें

सीहोर जिले में मानसून की धीमी रफ्तार अब किसानों के लिए चिंता का कारण बन गई है। शुरुआत में तेज बारिश के कारण कई किसानों को दोबारा बोवनी करनी पड़ी थी, वहीं अब पिछले एक सप्ताह से बारिश नहीं होने के कारण खेतों की नमी खत्म हो रही है। इससे सोयाबीन, मक्का और अन्य खरीफ फसलें प्रभावित होने लगी हैं।
बारिश रुकी तो खेतों में बढ़ा संकट
लगातार बारिश नहीं होने से कई इलाकों में खेतों की मिट्टी फटने लगी है और दरारें दिखाई देने लगी हैं। नमी कम होने से फसलों की बढ़वार रुक रही है। किसानों का कहना है कि यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो फसल को भारी नुकसान हो सकता है।
पहले दोबारा बोवनी, अब सूखे की चिंता
मानसून की शुरुआत में हुई तेज बारिश से कई खेतों की पहली बोवनी खराब हो गई थी। किसानों को दो से तीन बार तक दोबारा बोवनी करनी पड़ी। अब फसलें संभल ही रही थीं कि बारिश रुक गई। इससे खेती की लागत बढ़ गई है और किसान नई परेशानी में हैं।
मौसम वैज्ञानिक ने बताई वजह
आरएके कृषि कॉलेज के मौसम वैज्ञानिक डॉ. सत्येंद्र सिंह तोमर के अनुसार मानसून ट्रफ हिमालय की तलहटी की ओर खिसक गई है। साथ ही बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र भी कमजोर पड़ गया है। इसी कारण जिले में बारिश नहीं हो रही है। मौसम विभाग के अनुसार 17 जुलाई के बाद नया सिस्टम बनने पर मध्यम से तेज बारिश की संभावना है।
फसलों पर बढ़ा खतरा, दवा छिड़काव भी प्रभावित
बारिश नहीं होने से खेतों में नमी कम हो रही है, जिससे सोयाबीन और मक्का की फसल पीली पड़ने लगी है। किसान समय पर कीटनाशक और खरपतवार नियंत्रण के लिए दवा का छिड़काव भी नहीं कर पा रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अगले कुछ दिनों में बारिश नहीं हुई तो नुकसान बढ़ सकता है।
96 प्रतिशत बोवनी पूरी, अब बारिश का इंतजार
जिले में खरीफ फसलों की करीब 96 प्रतिशत बोवनी पूरी हो चुकी है। लगभग 3.92 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फसल बोई जा चुकी है और धान की रोपाई भी जारी है। ऐसे में किसानों की पूरी उम्मीद अब समय पर होने वाली बारिश पर टिकी हुई है।
बारिश के लिए मंदिरों में विशेष पूजा
बारिश नहीं होने से परेशान किसान अब धार्मिक आस्था का सहारा ले रहे हैं। जिले के कई गांवों में इंद्रदेव को प्रसन्न करने के लिए विशेष पूजा, यज्ञ और पारंपरिक अनुष्ठान किए जा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में अच्छी बारिश की कामना के लिए पुराने रीति-रिवाज भी अपनाए जा रहे हैं।
पिछले साल से कम हुई बारिश
भू-अभिलेख शाखा के अनुसार जिले की औसत वार्षिक वर्षा 1148.4 मिमी है। इस साल 1 जून से अब तक 354.9 मिमी बारिश हुई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 423.1 मिमी वर्षा दर्ज की गई थी। आष्टा और इछावर में सबसे अधिक बारिश हुई है, जबकि बुदनी, श्यामपुर और सीहोर क्षेत्र पिछड़ गए हैं।
कृषि वैज्ञानिकों की किसानों को सलाह
कृषि विज्ञान केंद्र सेवनिया के कृषि वैज्ञानिक दीपक कुशवाह ने किसानों को फिलहाल भारी सिंचाई नहीं करने की सलाह दी है। उनका कहना है कि यदि सिंचाई के तुरंत बाद तेज बारिश हुई तो फसल को नुकसान हो सकता है। जरूरत पड़ने पर कुछ दिन इंतजार कर स्प्रिंकलर से हल्की सिंचाई करना बेहतर रहेगा।
कृषि विभाग को अच्छी बारिश की उम्मीद
उप संचालक कृषि ए.के. उपाध्याय के अनुसार जिले में फसलों की स्थिति फिलहाल सामान्य है। यदि अगले दो-तीन दिनों में अच्छी बारिश हो जाती है तो फसलों को नया जीवन मिलेगा और बड़े नुकसान की आशंका काफी कम हो जाएगी। फिलहाल जिले के किसानों की नजरें आसमान पर टिकी हैं।












