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कचरे से क्लासरूम तक:सीहोर का सरकारी स्कूल बना स्वच्छता-शिक्षा का प्रतीक, टॉप 200 स्कूलों में शामिल

सीहोर जिले के महुआखेड़ी तकीपुर स्थित शासकीय माध्यमिक शाला ने संघर्ष और सुधार की एक प्रेरक कहानी लिखी है। कभी कचरे, बदहाली और बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझता यह स्कूल आज भारत सरकार की ‘स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग 2025-26’ में देश के टॉप 200 स्कूलों में शामिल हो गया है।
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सीहोर का सरकारी स्कूल बना स्वच्छता-शिक्षा का प्रतीक, टॉप 200 स्कूलों में शामिल

सीहोर जिले के महुआखेड़ी तकीपुर स्थित शासकीय माध्यमिक शाला ने ऐसी कहानी लिखी है, जो सिर्फ एक स्कूल की नहीं बल्कि पूरे गांव की सोच बदलने की मिसाल बन गई है। कभी जो स्कूल गंदगी, बदहाली और उपेक्षा का प्रतीक था, आज वही स्कूल राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुका है।

भारत सरकार की ‘स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग 2025-26’ की सूची में इस स्कूल ने देश के टॉप 200 स्कूलों में जगह बनाई है। यह उपलब्धि सिर्फ एक सम्मान नहीं, बल्कि एक बदलाव की कहानी है, जो मेहनत, भरोसे और टीमवर्क से लिखी गई है।

टॉप 200 स्कूलों में बनाई जगह

देशभर के हजारों स्कूलों में से केवल 200 विद्यालयों का चयन किया गया। इन्हीं में महुआखेड़ी तकीपुर स्कूल का नाम शामिल होना अपने आप में बड़ी बात है। इस सम्मान के साथ स्कूल को एक लाख रुपये या उससे अधिक की प्रोत्साहन राशि मिलेगी। साथ ही छात्रों को राष्ट्रीय शैक्षणिक भ्रमण का अवसर भी दिया जाएगा। यह सिर्फ इनाम नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य में निवेश जैसा है।

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कभी छत से टपकता था बारिश में पानी

अक्टूबर 2022 से पहले इस स्कूल की हालत बहुत खराब थी। स्थिति इतनी कठिन थी कि स्कूल में पढ़ाई करना भी चुनौती बन गया था। छत से बारिश में पानी टपकता था। दीवारें कमजोर और दरारों से भरी थीं। शौचालय टूटे हुए थे और पानी की कोई सही व्यवस्था नहीं थी। पूरे परिसर में कचरा फैला रहता था, जिससे बदबू और मच्छरों की समस्या बनी रहती थी।

स्कूल में बच्चों के लिए बैठने तक की सही व्यवस्था नहीं थी। कई बार बच्चे असुविधा के कारण स्कूल आने से भी कतराते थे। बिजली की हालत खराब होने से पंखे और अन्य उपकरण काम नहीं करते थे। न कोई स्मार्ट क्लास थी, न लाइब्रेरी और न ही हरियाली का कोई माहौल।

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दो लोगों की सोच ने बदल दी दिशा

इस बदलाव की शुरुआत जिला नोडल अधिकारी देवेन्द्र राठौर और प्रधानाध्यापक सतीश त्यागी की सोच से हुई। दोनों ने मिलकर तय किया कि स्कूल को सिर्फ ठीक नहीं करना है, बल्कि उसे एक नई पहचान देनी है। प्रधानाध्यापक सतीश त्यागी ने इस मिशन को एक नाम दिया- बच्चों की मुस्कान। उनका उद्देश्य केवल भवन सुधारना नहीं था, बल्कि बच्चों के चेहरे पर खुशी लौटाना था।

दीवारों ने भी शुरू किया कहानी कहना

सीमित संसाधनों के बावजूद स्कूल के शिक्षकों और बच्चों ने मिलकर बदलाव की शुरुआत की। बच्चों ने अपनी कक्षाओं की दीवारों को रंग-बिरंगे चित्रों, स्लोगन और प्रेरक संदेशों से सजाया। दीवारों पर लिखा जाने लगा- स्वच्छता ही सुरक्षा है, जल है तो कल है और पढ़ेगा इंडिया तभी बढ़ेगा इंडिया। धीरे-धीरे स्कूल का माहौल बदलने लगा। जो जगह पहले डर और गंदगी से जुड़ी थी, वह अब सीखने और सपनों की जगह बन गई।

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सरपंच और ग्रामीणों की अहम भूमिका

यह बदलाव सिर्फ स्कूल तक सीमित नहीं रहा। धीरे-धीरे पूरा गांव इस मिशन का हिस्सा बन गया। गांव के लोगों ने स्कूल की मरम्मत और सुधार में सहयोग दिया। शौचालयों की मरम्मत की गई, पानी की टंकी लगाई गई और हर शौचालय तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था हुई। नई बिजली फिटिंग लगाई गई और एलईडी लाइट्स से स्कूल रोशन हुआ। इसके साथ ही स्मार्ट क्लास की शुरुआत की गई और स्मार्ट टीवी भी लगाया गया। अब बच्चे सिर्फ किताबों से नहीं, बल्कि डिजिटल माध्यम से भी सीख रहे हैं। स्कूल में एक छोटी लेकिन मजबूत लाइब्रेरी भी तैयार की गई।

इस बदलाव में ग्राम पंचायत की सरपंच रुबीना खान की भूमिका बेहद अहम रही। उन्होंने स्कूल के चारों ओर 13 मीटर लंबी बाउंड्री वॉल बनवाई, जिससे स्कूल सुरक्षित हुआ और एक बेहतर लर्निंग माहौल तैयार हुआ। गांव के गब्बर चाचा ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी पहल पर बैंक ऑफ बड़ौदा ने बच्चों के लिए खेल सामग्री और फिसलपट्टी उपलब्ध कराई।

वहीं कालूराम दादा ने जर्जर भवनों को सुधारने की जिम्मेदारी उठाई और स्कूल को नया जीवन देने में अहम भूमिका निभाई। उनका जुड़ाव पूरे गांव के लिए प्रेरणा बन गया।

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बेटियों की लगातार बढ़ती भागीदारी

स्कूल में हुए बदलाव का सबसे बड़ा असर बच्चों की संख्या पर दिखा। वर्ष 2023-24 में जहां केवल 84 विद्यार्थी थे, वहीं 2024-25 में यह संख्या बढ़कर 105 हो गई। इसमें सबसे खास बात यह है कि 105 छात्रों में 62 बालिकाएं हैं। यह दिखाता है कि जब स्कूल सुरक्षित और बेहतर होता है, तो माता-पिता का भरोसा भी बढ़ता है और बेटियों की शिक्षा को प्राथमिकता मिलती है।

60 मानकों पर परखा गया स्कूल- मिली 5-स्टार रेटिंग

राष्ट्रीय स्तर पर चयन के लिए स्कूल को 60 अलग-अलग मानकों पर परखा गया। इनमें स्वच्छता, सुरक्षा, पानी की व्यवस्था, ऊर्जा उपयोग, बुनियादी ढांचा और पर्यावरण संरक्षण जैसे पहलू शामिल थे। महुआखेड़ी तकीपुर स्कूल ने 90 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल किए और 5-स्टार रेटिंग प्राप्त की। रेन वाटर हार्वेस्टिंग, सुरक्षित पेयजल, अलग शौचालय, आधुनिक हैंडवॉश स्टेशन और ऊर्जा दक्षता जैसे मानकों पर स्कूल ने बेहतरीन प्रदर्शन किया।

Garima Vishwakarma
By Garima Vishwakarma

गरिमा विश्वकर्मा | People’s Institute of Media Studies से B.Sc. Electronic Media की डिग्री | पत्रकार...Read More

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