1 ROB, 2 फ्लाईओवर और 15 अंडरपास...!भोपाल वेस्टर्न बायपास को मिली बड़ी मंजूरी, 35.61 KM लंबा फोरलेन बायपास तय

भोपाल में आने वाले समय में ट्रैफिक व्यवस्था एक नए दौर में पहुंचने वाली है। राज्य स्तरीय साधिकार समिति (SLEC) की बैठक में वेस्टर्न बायपास प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल गई है। यह बैठक मुख्य सचिव अनुराग जैन की अध्यक्षता में हुई। अब इस प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी के लिए कैबिनेट के पास भेजा जाएगा।
यह प्रोजेक्ट भोपाल और आसपास के क्षेत्रों के लिए एक बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड माना जा रहा है, जिससे न सिर्फ सफर आसान होगा बल्कि शहर के अंदर ट्रैफिक का दबाव भी काफी कम हो जाएगा।
क्या है वेस्टर्न बायपास प्रोजेक्ट?
वेस्टर्न बायपास एक फोरलेन सड़क परियोजना है, जिसका उद्देश्य भोपाल शहर के भीतर आने वाले भारी ट्रैफिक को बाहर से ही डायवर्ट करना है। पहले इस बायपास की लंबाई लगभग 41 किलोमीटर प्रस्तावित थी, लेकिन अब इसे घटाकर 35.61 किलोमीटर कर दिया गया है। यह नया मार्ग ज्यादा सीधा और प्रभावी बनाया गया है ताकि यात्रा समय और दूरी दोनों कम हो सकें।
कहां से शुरू होकर कहां खत्म?
इस बायपास का रूट रणनीतिक रूप से तैयार किया गया है ताकि ज्यादा से ज्यादा शहर और हाईवे कनेक्टिविटी कवर हो सके। यह मार्ग भोपाल-नर्मदापुरम रोड पर मंडीदीप के पास से शुरू होगा। आगे यह कोलार क्षेत्र से होकर गुजरेगा फिर रातीबड़ इलाके को पार करेगा। अंत में यह इंदौर रोड पर फंदा कला के पास जाकर जुड़ जाएगा। इस पूरे रूट को इस तरह डिजाइन किया गया है कि शहर के अंदर जाने की जरूरत न पड़े और ट्रैफिक सीधे बाहर से निकल जाए।
यह भी पढ़ें: कचरे से क्लासरूम तक: सीहोर का सरकारी स्कूल बना स्वच्छता-शिक्षा का प्रतीक, टॉप 200 स्कूलों में शामिल
ट्रैफिक पर पड़ेगा बड़ा असर
इस बायपास के बनने के बाद सबसे बड़ा फायदा ट्रैफिक को होगा। जबलपुर और नर्मदापुरम की ओर से आने वाला ट्रैफिक शहर के अंदर प्रवेश नहीं करेगा। वाहन सीधे इंदौर रोड की तरफ निकल जाएंगे इससे शहर के अंदर भीड़ और जाम काफी कम होगा। यात्रियों का लगभग 1 घंटे तक का समय बच सकेगा और करीब 23 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी भी कम होगी।
डेढ़ घंटे का रास्ता अब 45 मिनट में
अधिकारियों के अनुसार, इस बायपास के बनने के बाद यात्रा समय में बड़ा बदलाव आएगा। जहां पहले इस रूट को तय करने में लगभग डेढ़ घंटे लगते थे, वहीं अब यह सफर 45 मिनट से भी कम समय में पूरा किया जा सकेगा। यह बदलाव सिर्फ समय की बचत नहीं है, बल्कि फ्यूल की बचत और ट्रैफिक स्ट्रेस कम करने की दिशा में भी बड़ा कदम है।
लागत और तकनीकी मॉडल
इस पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 2900 करोड़ रुपए है। इसे हाइब्रिड एन्यूटी मोड (HAM) पर बनाया जाएगा, जो एक पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल है। इस मॉडल के तहत प्रोजेक्ट लागत का 40% हिस्सा सरकार द्वारा 5 किस्तों में दिया जाएगा। बाकी 60% राशि सड़क बनने के बाद अगले 15 सालों तक दी जाएगी।
कैसा होगा इंफ्रास्ट्रक्चर
यह बायपास सिर्फ एक सड़क नहीं बल्कि एक आधुनिक ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर होगा। इसमें 1 रेलवे ओवर ब्रिज (ROB), 2 फ्लाईओवर, 15 अंडरपास, 2 बड़े जंक्शन और सर्विस रोड दोनों तरफ (2 लेन) शामिल होंगे। मुख्य सड़क को 10-लेन कॉन्फिगरेशन के हिसाब से प्लान किया गया है, जिसमें मूल रूप से 6-लेन स्ट्रक्चर पर 4-लेन की व्यवस्था होगी।
कैसे तय होगा पूरा सफर?
इस बायपास का रूट तीन प्रमुख हिस्सों में बांटा जा सकता है-
- शुरुआती हिस्सा- औबेदुल्लागंज से आने वाले ट्रैफिक के लिए यह मार्ग मंडीदीप के ठीक पहले से शुरू होगा। यहां से वाहन शहर के भीतर जाने के बजाय सीधे बायपास पर चढ़ जाएंगे।
- मध्य भाग- पहाड़ी और जंगल क्षेत्र- इसके बाद यह मार्ग कोलार की ओर बढ़ेगा। इस दौरान एक गोल जंक्शन से रास्ता आगे निकलेगा। पहाड़ी क्षेत्र को काटते हुए सड़क बनाई जाएगी। फॉरेस्ट और निजी जमीन से होकर यह मार्ग गुजरेगा।
- अंतिम कनेक्शन- आखिरी हिस्से में यह बायपास रातीबड़ रोड को लगभग 4 किलोमीटर आगे क्रॉस करेगा। जैन मंदिर, खजूरी और फंदा के बीच के सेंटर पॉइंट से जुड़ेगा अंत में यह सीधे इंदौर रोड (फंदा कला के पास) से कनेक्ट हो जाएगा।
शहर और इंडस्ट्रियल कनेक्टिविटी में सुधार
इस प्रोजेक्ट का असर सिर्फ ट्रैफिक तक सीमित नहीं रहेगा। मंडीदीप औद्योगिक क्षेत्र और भोपाल शहर के बीच कनेक्टिविटी मजबूत होगी। इंदौर (पीथमपुर) और भोपाल के इंडस्ट्रियल जोन बेहतर तरीके से जुड़ेंगे। लॉजिस्टिक्स और माल परिवहन तेज होगा। भारी वाहन अब शहर के अंदर नहीं घुसेंगे।











