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SEBI ने दी बड़ी राहत!मृतक निवेशकों के शेयर ट्रांसफर नियम आसान, पैन और वसीयत से जुड़ी शर्तों में भी बदलाव

SEBI ने मृतक निवेशकों के उत्तराधिकारियों को बड़ी राहत दी है। अब शेयरों के ट्रांसफर से जुड़े नियमों को आसान कर दिया गया है साथ ही पैन और वसीयत से संबंधित शर्तों में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं।
मृतक निवेशकों के शेयर ट्रांसफर नियम आसान, पैन और वसीयत से जुड़ी शर्तों में भी बदलाव

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने निवेशकों और उनके परिवारों को बड़ी राहत देते हुए मृतक निवेशकों के नाम पर मौजूद शेयर, बॉन्ड और अन्य सिक्योरिटीज को कानूनी वारिसों के नाम ट्रांसफर करने की प्रक्रिया को आसान बनाने का फैसला किया है। शुक्रवार को हुई बोर्ड बैठक में इस संबंध में कई अहम बदलावों को मंजूरी दी गई। सेबी का कहना है कि नए नियमों का उद्देश्य ट्रांसमिशन प्रक्रिया को सरल बनाना, कागजी औपचारिकताओं को कम करना और निवेशकों के परिवारों को राहत देना है।

छोटे दावों के लिए बनाई गई नई कैटेगरी

सेबी ने सिक्योरिटीज के ट्रांसमिशन को आसान बनाने के लिए छोटे दावों यानी स्मॉल वैल्यू क्लेम की नई श्रेणी बनाई है। नए नियमों के तहत फिजिकल फॉर्म में रखी गई सिक्योरिटीज के लिए प्रति शेयर 10,000 रुपए तक और डीमैट फॉर्म में मौजूद सिक्योरिटीज के लिए प्रति शेयर 30,000 रुपए तक की सीमा तय की गई है। इससे छोटे निवेशकों के परिवारों को कम दस्तावेजों के साथ प्रक्रिया पूरी करने में मदद मिलेगी।

स्मॉल वैल्यू क्लेम की सीमा दोगुनी

सेबी ने स्मॉल वैल्यू क्लेम की अधिकतम सीमा को भी बढ़ा दिया है। अब फिजिकल शेयरों के मामलों में यह सीमा 10 लाख रुपए तक और डीमैट शेयरों के मामलों में 30 लाख रुपए तक कर दी गई है। रेगुलेटर का मानना है कि इससे बड़ी संख्या में ऐसे मामलों का तेजी से निपटारा हो सकेगा, जहां निवेशकों के परिवारों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता था।

पैन कार्ड जमा करने की जरूरत नहीं

सेबी ने ट्रांसमिशन प्रक्रिया के दौरान पैन कार्ड जमा करने की अनिवार्यता भी खत्म कर दी है। बोर्ड के अनुसार डीमैट अकाउंट खोलने के समय ही पैन कार्ड देना जरूरी होता है। ऐसे में ट्रांसमिशन के दौरान दोबारा पैन जमा कराने का कोई औचित्य नहीं है। इस बदलाव से प्रक्रिया और आसान होगी।

वसीयत के प्रोबेट की अनिवार्यता भी खत्म

सेबी ने उत्तराधिकार कानूनों में हुए हालिया बदलावों को ध्यान में रखते हुए वसीयत के प्रोबेट यानी न्यायिक प्रमाणन की अनिवार्यता भी समाप्त कर दी है। इस फैसले से उन परिवारों को राहत मिलेगी जिन्हें पहले लंबी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था।

अलग-अलग दस्तावेजों की जगह एक ही NOC पर्याप्त

नए नियमों के तहत अब निवेशकों को अलग-अलग एफिडेविट और नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) जमा नहीं करने होंगे। सेबी ने एक संयुक्त एफिडेविट-कम-NOC को मंजूरी दी है, जिससे दस्तावेजों की संख्या कम होगी और प्रक्रिया पहले के मुकाबले ज्यादा सरल बन जाएगी। इसके अलावा QR कोड वाले डेथ सर्टिफिकेट को भी मान्यता दी गई है। इससे दस्तावेजों की सत्यता की जांच आसान होगी और समय की बचत होगी।

ओपन मार्केट शेयर बायबैक को फिर मिली मंजूरी

सेबी बोर्ड ने स्टॉक एक्सचेंज मैकेनिज्म के जरिए ओपन मार्केट शेयर बायबैक प्रक्रिया को दोबारा शुरू करने की अनुमति भी दे दी है। कुछ साल पहले टैक्सेशन से जुड़े मुद्दों के कारण इस व्यवस्था को बंद कर दिया गया था। अब नियमों की समीक्षा और टैक्स ढांचे में बदलाव के बाद इसे फिर लागू किया जा रहा है। इससे कंपनियों को शेयर बायबैक में अधिक लचीलापन मिलेगा।

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म्यूचुअल फंड हाउसेज को बड़ी सुविधा

सेबी ने म्यूचुअल फंड हाउसेज को इंट्रा-डे बॉरोइंग यानी एक ही दिन के लिए उधार लेने की सुविधा को भी आसान बनाने का फैसला किया है। इसका उद्देश्य लिक्विडिटी से जुड़ी अस्थायी समस्याओं को दूर करना और निवेशकों के हितों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

कर्मचारियों के लिए नया कोड ऑफ कंडक्ट

सेबी बोर्ड ने संस्था के भीतर पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कर्मचारियों और बोर्ड सदस्यों के लिए नए कोड ऑफ कंडक्ट को भी मंजूरी दी है। इसके साथ ही सेबी कर्मचारी सेवा नियमों में भी संशोधन किए गए हैं।

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सेल्फ-लिस्टिंग पर फिलहाल कोई विचार नहीं

सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने स्पष्ट किया कि रेगुलेटर फिलहाल सेल्फ-लिस्टिंग की अनुमति देने पर विचार नहीं कर रहा है। सेल्फ-लिस्टिंग का मतलब किसी स्टॉक एक्सचेंज या उसकी समूह कंपनी को अपने ही एक्सचेंज पर सूचीबद्ध होने की अनुमति देना होता है। वर्तमान में BSE सूचीबद्ध है, लेकिन उसके शेयरों की ट्रेडिंग NSE पर होती है। सेबी का मानना है कि निवेशकों के हितों और बाजार की पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए इस विषय पर अभी कोई बदलाव प्रस्तावित नहीं है।

Sumit  Shrivastava
By Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...Read More

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