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ग्वालियर:सिंधिया राजघराने का 40 हजार करोड़ की संपत्ति विवाद खत्म होने की ओर, 20 जुलाई को कोर्ट लगाएगी समझौते पर मुहर

सिंधिया राजघराने के 40 हजार करोड़ रुपये के संपत्ति विवाद में समझौता हो गया है। ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआओं के बीच हुए 35 पेज के समझौते पर 20 जुलाई को कोर्ट मुहर लगाएगी।
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सिंधिया राजघराने का 40 हजार करोड़ की संपत्ति विवाद खत्म होने की ओर, 20 जुलाई को कोर्ट लगाएगी समझौते पर मुहर
सिंधिया राजघराने विवाद पर फैसला 20 जुलाई को होने की संभावना है।

सिंधिया राजघराने में करीब चार दशक से चले आ रहे संपत्ति विवाद का अब समाधान होता नजर आ रहा है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआओं उषा राजे, राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे के बीच संपत्ति बंटवारे को लेकर समझौता हो गया है। इस समझौते पर अब 20 जुलाई को अतिरिक्त सत्र न्यायालय औपचारिक मुहर लगाएगा। करीब 40 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति से जुड़े इस विवाद को खत्म करने के लिए तैयार किए गए समझौते का दस्तावेज लगभग 35 पेज का है। इसमें राजपरिवार की अलग-अलग संपत्तियों का विस्तृत विवरण और उनके बंटवारे का उल्लेख किया गया है।

20 जुलाई को होगा अंतिम फैसला

बुधवार को अतिरिक्त सत्र न्यायालय में इस मामले की सुनवाई हुई। ज्योतिरादित्य सिंधिया की ओर से अधिवक्ता प्रशांत शर्मा ने बताया कि सभी पक्षकारों ने न्यायालय में अंतरिम सुनवाई के लिए आवेदन प्रस्तुत किया है। हालांकि कुछ पक्षकार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई में शामिल नहीं हो सके, जिसके कारण प्रक्रिया आगे बढ़ा दी गई। अब अदालत 20 जुलाई को समझौते पर अपनी औपचारिक मुहर लगाएगी। समझौते को मंजूरी मिलने के बाद अलग-अलग अदालतों में चल रहे संपत्ति विवाद से जुड़े सभी दावे समाप्त हो जाएंगे।

समझौते में किन संपत्तियों का हुआ बंटवारा?

सामने आ रही जानकारी के अनुसार, समझौते में राजपरिवार की प्रमुख संपत्तियों को लेकर हिस्सेदारी तय की गई है। ज्योतिरादित्य सिंधिया के हिस्से में आ सकती हैं:

  • जय विलास पैलेस
  • शिवपुरी स्थित संपत्तियां
  • दिल्ली की संपत्तियां
  • बुआओं के हिस्से में आ सकती हैं:
  • ग्वालियर की संपत्तियों में हिस्सा
  • वाटिकाओं और अन्य स्थानों से जुड़ी संपत्तियां

हालांकि अंतिम स्थिति कोर्ट की मंजूरी के बाद ही स्पष्ट होगी।

राजमाता के समय से चला आ रहा था विवाद

सिंधिया राजघराने का यह विवाद राजमाता के समय से चला आ रहा था। ज्योतिरादित्य सिंधिया की बुआओं ने पैतृक संपत्ति में अपने अधिकार का दावा किया था। वहीं सिंधिया पक्ष का तर्क था कि राजपरिवार में राजा की गद्दी से जुड़े नियमों के अनुसार संपत्ति पर अधिकार तय होता है। इसी विवाद के चलते मामला न्यायालय तक पहुंचा था।

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2010 में दाखिल हुआ था संपत्ति विवाद का मामला

उषा राजे, वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे ने वर्ष 2010 में संपत्ति बंटवारे को लेकर न्यायालय में वाद दायर किया था। इसके बाद कई वर्षों तक यह मामला अदालतों में चलता रहा।

कोर्ट ने दी थी आपसी समझौते की सलाह

जून के अंतिम सप्ताह में जिला न्यायालय ने सभी पक्षों को आपसी सहमति से विवाद खत्म करने की सलाह दी थी। कोर्ट ने कहा था कि सभी पक्षकार तीन महीने के भीतर समझौता कर उसकी रिपोर्ट पेश करें। यदि समझौता नहीं होता तो पुरानी याचिका को फिर से बहाल किया जा सकता था। इसके बाद राजपरिवार के सभी पक्षकार बातचीत के जरिए समाधान पर सहमत हुए और अदालत में बंटवारे का मसौदा पेश किया गया।

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चार दशक पुराने विवाद के खत्म होने की उम्मीद

सिंधिया राजघराने की संपत्ति से जुड़ा यह देश के सबसे चर्चित पारिवारिक विवादों में शामिल रहा है। अब कोर्ट की मंजूरी के बाद इस लंबे विवाद के समाप्त होने की संभावना है।

Sumit  Shrivastava
By Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...Read More

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