Shivani Gupta
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Manisha Dhanwani
6 Jan 2026
Garima Vishwakarma
5 Jan 2026
खाड़ी क्षेत्र की दो बड़ी ताकतें इस समय एक दूसरे की विरोधी बनी है। सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) आमने-सामने खड़ी नजर आ रही हैं। जहां पहले कभी करीबी माने जाने वाले ये दोनों अरब देश अब यमन के मुद्दे पर एक-दूसरे से टकराते दिखाई दे रहे हैं। यमन में अलग-अलग अलगाववादी गुटों को समर्थन देने को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव लगातार बढ़ता चला गया, जिसने दोस्ती को दुश्मनी में बदल दिया।
दरअसल, यमन गृहयुद्ध के दौरान सऊदी अरब और UAE एक ही गठबंधन का हिस्सा थे, लेकिन समय के साथ दोनों की रणनीतियां अलग-अलग हो गईं। सऊदी अरब जहां यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन करता रहा, वहीं UAE पर दक्षिणी यमन के अलगाववादी गुटों को समर्थन देने के आरोप लगते रहे। इसी मुद्दे ने दोनों देशों के रिश्तों में दरार डाल दी।
यमन में हालात उस वक्त और बिगड़ गए, जब यूएई समर्थित साउदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) ने सऊदी अरब के समर्थन वाले बलों को पीछे हटाते हुए दक्षिणी यमन के दो प्रांतों पर कब्जा कर लिया। इसी घटनाक्रम के बाद सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के बीच तनाव खुलकर सामने आ गया और दोनों इस्लामिक देश आमने-सामने नजर आने लगे।
दो प्रांतों पर STC के नियंत्रण के बाद सऊदी अरब ने यमन में हवाई हमले किए। इन हमलों में कथित तौर पर यूएई से आए हथियारों, सैन्य साजो-सामान और सेना की गाड़ियों को निशाना बनाया गया। सऊदी बलों का कहना है कि ये हमले यमन में अस्थिरता फैलाने वाले तत्वों के खिलाफ किए गए, जबकि इस कार्रवाई को यूएई समर्थित गुटों के खिलाफ सीधी कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है।
सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब अब यह मानने लगा है कि इसी गलत जानकारी के चलते संयुक्त अरब अमीरात ने सऊदी सीमा से सटे यमन के प्रांतों में साउदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) की फोर्सेज को सक्रिय किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस भ्रामक सूचना के कारण यूएई को यह लगा कि सऊदी अरब ने अमेरिका से इस क्षेत्र में किसी तरह के हस्तक्षेप का अनुरोध किया है।
हालात बिगड़ने के बाद सऊदी अरब को खुद यूएई से संपर्क कर यह स्पष्ट करना पड़ा कि उसने तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से ऐसा कोई अनुरोध नहीं किया था। सऊदी पक्ष ने यूएई को बताया कि अमेरिका से जुड़ी यह जानकारी पूरी तरह गलत और भ्रामक थी।