रक्षाबंधन पर बाघों की सुरक्षा का संकल्प: सतपुड़ा टाइगर रिजर्व ने छात्रों और ग्रामीणों को बांधा ‘बाघ रक्षा सूत्र’
भाई-बहन के प्रेम, स्नेह और सुरक्षा के प्रतीक रक्षाबंधन पर्व को सतपुड़ा टाइगर रिजर्व ने वन्यप्राणी संरक्षण से जोड़ते हुए एक अनूठी पहल की है। एसटीआर नर्मदापुरम द्वारा चलाए जा रहे ‘बाघ रक्षा सूत्र अभियान’ के माध्यम से स्कूली विद्यार्थियों, ग्रामीणों और आमजन को बाघ संरक्षण, जंगलों की सुरक्षा और वन्यजीवों के प्रति जिम्मेदारी का संदेश दिया जा रहा है। अभियान के तहत गुरुवार को सोहागपुर क्षेत्र के दो स्कूलों में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं को बाघ रक्षा सूत्र बांधकर बाघों और वन्यप्राणियों की सुरक्षा का संकल्प दिलाया गया। इस दौरान सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के अधिकारियों ने विद्यार्थियों को समझाया कि बाघ केवल एक वन्यप्राणी नहीं है, बल्कि जंगल और पूरे पर्यावरणीय तंत्र की सुरक्षा में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
दो स्कूलों के 725 विद्यार्थियों ने लिया बाघ संरक्षण का संकल्प
‘बाघ रक्षा सूत्र अभियान’ के तहत पीएम श्री हायर सेकेंडरी स्कूल कामती में 450 छात्र-छात्राओं को बाघ रक्षा सूत्र बांधा गया। वहीं पीएम श्री हायर सेकेंडरी स्कूल बागड़ा में 275 विद्यार्थियों को अभियान से जोड़ते हुए बाघों की सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण का संकल्प दिलाया गया। इस अवसर पर एसटीआर सोहागपुर के एसडीओ शिव प्रसाद मैथानी और बागड़ा बफर के रेंजर विलास डोंगरें उपस्थित रहे। अधिकारियों ने विद्यार्थियों से जंगलों और वन्यप्राणियों की रक्षा में अपनी भूमिका निभाने तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक रहने की अपील की।
सारंगपुर में गाइड, जिप्सी चालक और पर्यटकों को भी बांधा रक्षा सूत्र
अभियान को केवल स्कूलों तक सीमित नहीं रखा गया। ग्राम सारंगपुर में 50 गाइड, जिप्सी चालक और पर्यटकों को भी बाघ रक्षा सूत्र बांधकर वन्यप्राणियों की सुरक्षा के प्रति जागरूक किया गया। एसटीआर प्रबंधन का उद्देश्य जंगल से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े लोगों को संरक्षण अभियान का सहभागी बनाना है। पर्यटन गतिविधियों से जुड़े गाइड और जिप्सी चालकों को वन्यजीव संरक्षण का संदेश देकर अभियान को व्यापक स्तर पर पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। इस दौरान एसटीआर प्रबंधन की ओर से उपस्थित लोगों को मिष्ठान का वितरण भी किया गया।
शनिवार तक 11 हजार लोगों को जागरूक करने का लक्ष्य
एसटीआर सोहागपुर के एसडीओ शिव प्रसाद मैथानी ने बताया कि सतपुड़ा टाइगर रिजर्व नर्मदापुरम द्वारा चलाए जा रहे बाघ रक्षा सूत्र अभियान के तहत शनिवार तक करीब 11 हजार ग्रामीणों, स्कूली छात्र-छात्राओं और आमजन को जागरूक करने का लक्ष्य रखा गया है। अभियान के माध्यम से लोगों को बाघों के महत्व, जंगलों की उपयोगिता और वन्यजीवों के संरक्षण की आवश्यकता के बारे में जानकारी दी जा रही है। उन्होंने कहा कि बाघ केवल जंगल में रहने वाला एक वन्यप्राणी नहीं है, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। बाघ सुरक्षित रहेगा तो जंगल सुरक्षित रहेंगे और जंगल सुरक्षित रहेंगे तो पर्यावरण और मानव जीवन का भविष्य भी सुरक्षित रहेगा।
11 ईको विकास समितियां और 50 विस्थापित गांव भी जुड़े
एसटीआर के बाघ रक्षा सूत्र अभियान में स्कूली विद्यार्थियों के साथ 11 ईको विकास समितियों के सदस्य, ग्रामीणजन और 50 विस्थापित गांवों के रहवासी भी शामिल किए जा रहे हैं। इन क्षेत्रों में लोगों को बाघ रक्षा सूत्र बांधकर बाघ संरक्षण, जंगलों के महत्व और वन्यप्राणियों की सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जा रहा है। अभियान के जरिए यह संदेश दिया जा रहा है कि वन संरक्षण केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें समाज की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है।
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रक्षाबंधन के ‘रक्षा सूत्र’ को प्रकृति संरक्षण से जोड़ा
रक्षाबंधन के अवसर पर चलाया जा रहा यह अभियान पर्व के पारंपरिक संदेश को एक व्यापक सामाजिक और पर्यावरणीय उद्देश्य से जोड़ रहा है। भाई-बहन के बीच सुरक्षा के वचन का प्रतीक रक्षा सूत्र यहां जंगल, बाघ और प्रकृति की रक्षा के संकल्प का माध्यम बन गया है। स्कूलों में विद्यार्थियों की बड़ी भागीदारी से अभियान को जनजागरूकता का व्यापक स्वरूप मिल रहा है। एसटीआर प्रबंधन का मानना है कि बच्चों और युवाओं को वन्यजीव संरक्षण से जोड़ने से भविष्य में प्रकृति और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार समाज तैयार करने में मदद मिलेगी। अभियान के दौरान विद्यालयों का स्टाफ, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व का अमला, विद्यार्थी, गाइड, जिप्सी चालक और पर्यटक मौजूद रहे।























