नेशनल डेस्क। बिहार की सियासत में एक अहम मोड़ आ गया है। मुख्यमंत्री पद से नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद भारतीय जनता पार्टी ने सम्राट चौधरी को विधायक दल का नेता चुन लिया है। इसके साथ ही यह लगभग तय हो गया है कि वे राज्य के अगले मुख्यमंत्री बनेंगे। तय कार्यक्रम के अनुसार वे बुधवार सुबह 11 बजे शपथ लेंगे। इस फैसले के बाद राज्य की राजनीति में नई दिशा और नए समीकरणों की चर्चा तेज हो गई है।
सम्राट चौधरी का राजनीतिक सफर खासा दिलचस्प रहा है। बीजेपी में आए उन्हें लगभग आठ साल ही हुए हैं, लेकिन इस दौरान उन्होंने तेजी से खुद को स्थापित किया है। उन्होंने अपनी शुरुआत आरजेडी से की, फिर जेडीयू का रुख किया और अंततः बीजेपी में आकर अपनी पहचान को नई ऊंचाई दी। कम समय में उन्होंने जिस तरह पार्टी में अपनी पकड़ बनाई, वह उन्हें अन्य नेताओं से अलग बनाता है।
सम्राट चौधरी को राजनीति विरासत में मिली है। उनके पिता शकुनी चौधरी बिहार के दिग्गज नेताओं में गिने जाते थे। वे कांग्रेस, समता पार्टी और आरजेडी जैसे दलों में सक्रिय रहे और विधायक से लेकर सांसद तक का सफर तय किया। ओबीसी राजनीति में उनकी मजबूत पकड़ थी। इसी पारिवारिक पृष्ठभूमि ने सम्राट चौधरी को राजनीति में शुरुआती मजबूती दी।
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सम्राट चौधरी, जिनका वास्तविक नाम राकेश कुमार है, ने 1990 के दशक में राजनीति में कदम रखा। वे आरजेडी के साथ जुड़े और 1999 में राबड़ी देवी सरकार में मंत्री बने। उस समय वे सबसे युवा मंत्रियों में शामिल थे। हालांकि, उनकी उम्र को लेकर विवाद खड़ा हुआ, जिसके चलते उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने राजनीति में अपनी सक्रियता बनाए रखी।
आरजेडी से अलग होने के बाद सम्राट चौधरी जेडीयू में शामिल हुए। 2014 में जब जीतन राम मांझी मुख्यमंत्री बने, तब उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया। लेकिन जब नीतीश कुमार ने दोबारा सत्ता संभाली, तो उन्हें मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली। धीरे-धीरे पार्टी में उनकी उपेक्षा बढ़ने लगी, जिससे उनका मोहभंग हुआ और उन्होंने जेडीयू छोड़ने का फैसला किया।
सम्राट चौधरी ने 2018 में बीजेपी का दामन थामा और यहीं से उनके करियर ने नई उड़ान भरी। पार्टी में शामिल होने के बाद उन्हें संगठन और सरकार दोनों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलीं। वे विधान परिषद के सदस्य बने और बाद में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका भी निभाई। उनकी सक्रियता और रणनीतिक क्षमता ने उन्हें बीजेपी के प्रमुख नेताओं में शामिल कर दिया।
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2023 में सम्राट चौधरी को बीजेपी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया, जो उनके बढ़ते कद का प्रमाण था। जब नीतीश कुमार ने एनडीए में वापसी की, तब उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया गया। संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर उनकी पकड़ मजबूत रही। उन्होंने पार्टी को मजबूती देने के साथ-साथ खुद को एक प्रभावी नेता के रूप में स्थापित किया।
2025 के विधानसभा चुनाव में सम्राट चौधरी विपक्ष के निशाने पर रहे, लेकिन इसके बावजूद एनडीए ने वापसी की और उनकी भूमिका और मजबूत हुई। कोइरी समाज में उनकी पकड़ और राजनीतिक संतुलन साधने की क्षमता ने उन्हें मुख्यमंत्री पद तक पहुंचाया। अब उनके सामने बिहार के विकास और सुशासन की बड़ी जिम्मेदारी होगी। राज्य की जनता और राजनीतिक विश्लेषकों की नजर अब उनकी कार्यशैली और फैसलों पर टिकी रहेगी।