जस्टिस अनुरूप सिंघी की एकलपीठ ने सलमान खान और निर्माता कंपनी की याचिका पर सुनवाई करते हुए जिला उपभोक्ता आयोग और राज्य आयोग के आदेशों पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने मामले में सभी पक्षों को सुनते हुए आगे की कार्रवाई फिलहाल रोक दी है।
हाईकोर्ट ने जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा जारी जमानती वारंट और विज्ञापन प्रतिबंध के आदेश को फिलहाल प्रभावहीन कर दिया है। याचिका में इन आदेशों को कानूनी रूप से गलत और अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया गया था। कोर्ट ने प्रारंभिक सुनवाई में इन दलीलों को गंभीर मानते हुए राहत प्रदान की।
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याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने दलील दी कि शिकायतकर्ता खुद उपभोक्ता नहीं है, बल्कि खुद को एक्टिविस्ट बताता है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों की सुनवाई का अधिकार केन्द्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण को है। इस आधार पर जिला आयोग की कार्यवाही को अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया गया।
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याचिका में यह भी कहा गया कि जिस उत्पाद का प्रचार किया जा रहा है, वह पान मसाला या गुटखा नहीं है। बल्कि उसे सिल्वर कोटेड इलायची के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो अलग श्रेणी में आता है। ऐसे में भ्रामक विज्ञापन का आरोप भी गलत तरीके से लगाया गया।
जिला आयोग के आदेश के खिलाफ राज्य आयोग में की गई अपील को भी खारिज कर दिया गया था। याचिकाकर्ताओं ने इस फैसले को भी विधि विरुद्ध बताते हुए हाईकोर्ट में चुनौती दी। कोर्ट ने तीनों आदेशों पर रोक लगाकर मामले में राहत दी और आगे की सुनवाई तय की।