असम :विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को 440 वोल्ट का झटका, बोरदोलोई ने थामा भाजपा का दामन

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, बोरदोलोई के शामिल होने से कुछ महत्वपूर्ण सीटों पर नए सिरे से रणनीति बनाई जा सकती है। खासतौर पर उन क्षेत्रों में, जहां उनका प्रभाव मजबूत माना जाता है, बीजेपी नए चेहरों या समीकरणों के साथ उतर सकती है।
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विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को 440 वोल्ट का झटका, बोरदोलोई ने थामा भाजपा का दामन
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    नई दिल्ली/गुवाहाटी। असम में 9 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक उलटफेर सामने आया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद प्रद्युत बोरलोदोई ने कांग्रेस का हाथ छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए है। बोरदोलोई ने सीएम हिमंता बिस्वा सरमा के दिल्ली स्थित आवास पर बीजेपी की सदस्यता ली।

    इस दौरान प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष तालुकदार भी उनके साथ मौजूद रहे, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि यह सिर्फ एक व्यक्तिगत नहीं बल्कि समूह में हुआ सियासी बदलाव है।

    चुनाव से पहले ही लड़खड़ाई कांग्रेस...

    सूत्रों के अनुसार, बोरदोलोई और तालुकदार ने एक दिन पहले ही मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा से मुलाकात की थी। इस मुलाकात के बाद से ही उनके बीजेपी में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई थीं, जो अब सच साबित हो गई हैं। जहां इस फैसले को चुनाव से ठीक पहले बोरदोलोई जैसे अनुभवी नेता का पार्टी छोड़ना कांग्रेस के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। उनका प्रभाव असम की राजनीति में काफी मजबूत रहा है, ऐसे में उनके जाने से पार्टी की सियासी समीकरण पर नकारात्मक असर पड़ सकता

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    आखिर क्यों छोड़ी कांग्रेस?

    असम में चुनाव से पहले सियासी समीकरण तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। भाजपा ने भले ही अधिकांश सीटों पर उम्मीदवारों के नाम लगभग तय कर लिए हों, लेकिन प्रद्युत बोरलोदोई और उनके बेटे के पार्टी में शामिल होने के बाद कुछ सीटों पर बदलाव की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में बाजपा विधानसभा चुनाव में इस मौके का बेहतर ढंग से भूनाने की कोशिश में उतरेगी

    टिकट बंटवारे में हो सकता है फेरबदल

    पार्टी सूत्रों के मुताबिक, बोरदोलोई के शामिल होने से कुछ महत्वपूर्ण सीटों पर नए सिरे से रणनीति बनाई जा सकती है। खासतौर पर उन क्षेत्रों में, जहां उनका प्रभाव मजबूत माना जाता है, बीजेपी नए चेहरों या समीकरणों के साथ उतर सकती है। दूसरी ओर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बोरदोलोई का भाजपा में आना खासतौर पर अपर असम में पार्टी के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है। वे नौगांव क्षेत्र से चार बार विधायक और दो बार सांसद रह चुके हैं, जिससे उनकी जमीनी पकड़ काफी मजबूत मानी जाती है।

    अब भाजपा की आगे क्या होगी प्लानिंग?

    असम में BJP ने भले ही अधिकांश सीटों पर उम्मीदवारों के नाम लगभग तय कर लिए हों, लेकिन बोरलोदोई और उनके बेटे के पार्टी में शामिल होने के बाद कुछ सीटों पर बदलाव की संभावना जताई जा रही है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, बोरदोलोई के प्रभाव वाले इलाकों में टिकट वितरण को लेकर नई रणनीति बनाई जा सकती है।

    वोटर्स के बीच गहरी छाप

    रणनीतिकारों का मानना है कि बोरदोलोई का बीजेपी में आना खासतौर पर अपर असम में पार्टी की स्थिति को मजबूत कर सकता है। वे नौगांव क्षेत्र से चार बार विधायक और दो बार सांसद रह चुके हैं, जिससे उनकी जमीनी पकड़ काफी मजबूत मानी जाती है।

    Aakash Waghmare
    By Aakash Waghmare

    आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...Read More

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