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बार-बार बम की झूठी धमकियां...अपराध के साथ बढ़ती साइकोलॉजिकल अलार्मिंग की प्रवृत्ति

बार-बार बम की धमकी देना केवल मजाक नहीं है। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं केवल शरारत नहीं बल्कि मानसिक विकृति से जुड़ी हो सकती हैं।
बार-बार बम की झूठी धमकियां...अपराध के साथ बढ़ती साइकोलॉजिकल अलार्मिंग की प्रवृत्ति
भोपाल के एलएन मेडिकल कॉलेज में बम की धमकी के बाद चेकिंग।
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    भोपाल। राजजधानी में लगातार एम्स, आयकर, मेडिकल कॉलेज, हास्पिटल्स सहित कई बड़े संस्थानों को बम से उड़ाने की धमकियां मिल रही हैं। जांच के दौरान हर बार यह धमकियां  फर्जी साबित हुई है। हालांकि, इन घटनाओं ने सुरक्षा एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर अतिरिक्त दबाव के साथ आम नागरिकों में डर और असमंजस का माहौल भी तैयार कर दिया है। हर बार सूचना मिलने पर पुलिस, बम स्क्वॉड और प्रशासनिक अमला सक्रिय हो जाता है, संस्थानों को खाली कराया जाता है और घंटों जांच के बाद मामला मजाक या झूठी सूचना ही निकलता  है।

    एंटी सोशल पर्सनालिटी डिसऑर्डर 

    इस मामले में मनोचिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं केवल शरारत नहीं बल्कि मानसिक विकृति से जुड़ी हो सकती हैं। वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी के अनुसार, ऐसे लोग अक्सर एंटी सोशल पर्सनालिटी डिसऑर्डर, अटेंशन सीकिंग बिहेवियर और नार्सिस्टिक पर्सनालिटी डिसऑर्डर जैसी समस्याओं से ग्रस्त होते हैं। इन लोगों को समाज में डर फैलाने या परेशान करने में मजा या आत्म संतुष्टि का अनुभव होता है। उनका कहना है कि समय रहते ऐसे व्यवहार की पहचान और काउंसलिंग के माध्यम से इन प्रवृत्तियों पर नियंत्रण पाया जा सकता है।

    व्यवाहार में हो बदलाव तो सतर्क रहें 

    मनोचिकित्सक डॉ. त्रिवेदी बताते हैं कि यह लोग अक्सर छुपे रहते हैं, लेकिन इनके परिजन, दोस्त या पड़ोसी थोड़ा सजग हों तो इन्हें पहचाना जा सकता है। ऐसे लोग अपने व्यवहार से सामान्य लोगों से अलग नजर आते हैं। वे बार-बार इस तरह के मामले सामने आने पर खुश नजर आते हैं। इसके अलावा व्यवहार में अचानक बदलाव जैसे बिना वजह गुस्सा दिखाना, दूसरों की भावनाओं की अनदेखी करना और ध्यान आकर्षित करने के लिए असामान्य हरकतें करे उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति में लगातार ऐसे लक्षण दिखें, तो उसे गंभीरता से लेते हुए विशेषज्ञ से संपर्क करना जरूरी होता है।

    सिर्फ मनोविकार ही नहीं, रैकी भी हो सकती है 

    मामले में साइबर एक्सपर्ट सौम्या श्रीवास्तव बताती हैं कि कई बार इस तरह के मामले सिर्फ मनोविकार के कारण नहीं होते। पुराने कई मामलों को देखें तो पता चला है कि शातिर अपराधी अपराध करने से पहले जानबूझ कर इस तरह के फर्जी सूचना जारी करता है, ताकि पुलिस और प्रशासन की तैयारियां परखी जा सके। यह एक तरह से डिजिटल रैकी है, जो बड़ी घटना को अंजाम देने से पहले की जाती है। ऐसे में पुलिस को हर सूचना को गंभीरता से लेकर हर बार बारीकि जांच पड़ताल करनी चाहिए।

    यह है बीमारियां  

    एंटी सोशल पर्सनालिटी डिसऑर्डर : समाज के नियमों और कानून की अनदेखी करना इनकी प्रवृत्ति होती है। दूसरों को नुकसान पहुंचाने पर इन्हें पछतावा महसूस नहीं होता।

    अटेंशन सीकिंग बिहेवियर : हर स्थिति में लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचने की कोशिश करना इसका प्रमुख लक्षण है। इसके लिए व्यक्ति अतिरंजित या खतरनाक कदम उठा सकता है।

    नार्सिस्टिक पर्सनालिटी डिसऑर्डर : ऐसे लोग खुद को दूसरों से श्रेष्ठ मानते हैं और लगातार प्रशंसा चाहते हैं। इन्हें दूसरों की भावनाओं से ज्यादा अपनी छवि की चिंता होती है।

    मनोवैज्ञानिक असंतुलन का संकेत 

    बार-बार फर्जी धमकी देना केवल शरारत नहीं बल्कि गहरे मनोवैज्ञानिक असंतुलन का संकेत हो सकता है। ऐसे मामलों में व्यक्ति को सजा के साथ-साथ काउंसलिंग और मानसिक उपचार की भी जरूरत होती है।

    डॉ. राहुल शर्मा, क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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