RBI ने ब्रिटेन से वापस मंगाया 150 टन से ज्यादा सोना,फिर भी विदेशों में पड़ा है बड़ा गोल्ड रिजर्व

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी RBI लगातार अपना गोल्ड रिजर्व मजबूत करने में जुटा हुआ है। सिर्फ सोना खरीदने पर ही नहीं, बल्कि विदेशों में रखा भारतीय सोना वापस देश लाने पर भी तेजी से काम हो रहा है। हाल के आंकड़ों के अनुसार RBI पिछले कुछ सालों में ब्रिटेन समेत विदेशी तिजोरियों से बड़ी मात्रा में सोना भारत वापस लेकर आया है। अब RBI के पास कुल गोल्ड रिजर्व 880 मीट्रिक टन से जयादा हो चुका है।
RBI की ओर से जारी ताजा छमाही आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 तक भारत के पास 880.52 मीट्रिक टन सोना मौजूद था। इसमें से 680.05 मीट्रिक टन सोना देश के भीतर सुरक्षित रखा गया है। खास बात यह है कि पिछले कुछ सालों में घरेलू स्तर पर रखे सोने की मात्रा तेजी से बढ़ी है।
तीन साल में तेजी से बढ़ा भारत में रखा सोना
अगर पिछले कुछ सालों के आंकड़ों को देखें तो साफ पता चलता है कि RBI धीरे-धीरे विदेशों से सोना वापस भारत ला रहा है। मार्च 2023 में RBI के पास कुल 794.64 मीट्रिक टन सोना था, लेकिन उसमें से सिर्फ 301.10 मीट्रिक टन ही भारत में रखा गया था। इसके बाद मार्च 2024 तक कुल गोल्ड रिजर्व बढ़कर 822.10 मीट्रिक टन पहुंच गया और घरेलू स्तर पर रखा गया सोना 408.31 मीट्रिक टन हो गया। मार्च 2025 में यह आंकड़ा 511.99 मीट्रिक टन तक पहुंच गया। वहीं अब मार्च 2026 तक देश के भीतर रखा गया सोना बढ़कर 680.05 मीट्रिक टन हो चुका है। यानी सिर्फ तीन साल में RBI ने बड़ी मात्रा में सोना भारत में शिफ्ट किया है।
ब्रिटेन से कितना सोना वापस आया?
RBI का काफी सोना पहले बैंक ऑफ इंग्लैंड (BOE) और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) जैसी विदेशी संस्थाओं के पास रखा जाता था। मार्च 2023 में करीब 437.22 मीट्रिक टन सोना विदेशों में जमा था। लेकिन अब यह आंकड़ा तेजी से घटा है। मार्च 2024 में विदेशी तिजोरियों में रखा सोना 387.26 मीट्रिक टन रह गया। मार्च 2025 में यह 348.62 मीट्रिक टन तक पहुंचा और मार्च 2026 तक घटकर सिर्फ 197.67 मीट्रिक टन रह गया। इसका मतलब है कि RBI पिछले तीन सालों में करीब 150.67 मीट्रिक टन सोना विदेशों से भारत वापस ला चुका है।
RBI आखिर सोना वापस क्यों ला रहा है?
जियो-पॉलिटिकल तनाव इसके पीछे एक खास कारण हो सकता है। पहले रूस और यूक्रेन और अब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव जारी है। ऐसी अस्थिरता के बीच, अपने गोल्ड रिजर्व पर कंट्रोल रखना हमेशा फायदेमंद होता है। साल 2022 में, अमेरिका और उसके सहयोगियों ने रूसी केंद्रीय बैंक को उसके विदेशी गोल्ड रिजर्व तक पहुंचने से प्रतिबंधित कर दिया था। भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के अलावा, आमतौर पर रिजर्व बैंक को BOE या BIS के पास रखे सोने के लिए शुल्क भी देना पड़ता है। यह भी याद रखने योग्य है कि 1991 में, जब भारत को गंभीर विदेशी मुद्रा संकट का सामना करना पड़ा, तो उसे इमरजेंसी लोन सेफ करने के लिए कुछ सोना विदेश में ट्रांसफर करने के लिए मजबूर होना पड़ा था। बता दें 1991 की शुरुआत में, भारत के पास लगभग 1.2 अरब डॉलर का भंडार था, जो कुछ हफ्तों के आयात के लिए मुश्किल से ही पर्याप्त था. मार्च 2026 के अंत तक, सोने का भंडार 691 अरब डॉलर से अधिक हो गया था।
दुनिया भर के केंद्रीय बैंक खरीद रहे सोना
सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई केंद्रीय बैंक तेजी से सोना खरीद रहे हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 में केंद्रीय बैंकों ने 863 टन सोना खरीदा। वहीं 2024 में यह आंकड़ा 1,045 टन और 2023 में 1,037 टन रहा था। विशेषज्ञों का कहना है कि डॉलर पर निर्भरता कम करने और महंगाई से बचाव के लिए सोने को सबसे सुरक्षित विकल्प माना जा रहा है।
ये भी पढ़ें: BRICS बैठक में शामिल होने भारत आ सकते हैं ईरान के विदेश मंत्री, पश्चिम एशिया तनाव पर होगी बड़ी चर्चा
एक्सपर्ट ने क्या कहा?
केयरएज रेटिंग्स के सीनियर डायरेक्टर योगेश शाह ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि केंद्रीय बैंकों की लगातार सोना खरीद यह दिखाती है कि दुनिया में डॉलर पर भरोसा धीरे-धीरे कम हो रहा है। उन्होंने कहा कि बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिम और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच सोना लंबे समय के लिए सुरक्षित निवेश माना जा रहा है। योगेश शाह के मुताबिक, केंद्रीय बैंकों की मांग आम बाजार की तरह कीमतों पर निर्भर नहीं होती। यही वजह है कि लगातार खरीदारी से सोने की कीमतों को मजबूत समर्थन मिल रहा है।












