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BRICS बैठक में शामिल होने भारत आ सकते हैं ईरान के विदेश मंत्री, पश्चिम एशिया तनाव पर होगी बड़ी चर्चा 

पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची 14-15 मई को नई दिल्ली में होने वाली BRICS बैठक में शामिल होने भारत आ सकते हैं। माना जा रहा है कि इस बैठक में क्षेत्रीय तनाव, देशों के बीच सहयोग और हालात को शांत करने जैसे मुद्दों पर बड़ी चर्चा हो सकती है।
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पश्चिम एशिया तनाव पर होगी बड़ी चर्चा 

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान और भारत के बीच कूटनीतिक गतिविधियां तेज होती दिख रही हैं। खबर है कि ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची इस महीने भारत दौरे पर आ सकते हैं। बताया जा रहा है कि वह 14 और 15 मई को नई दिल्ली में होने वाली BRICS बैठक में हिस्सा लेने के लिए भारत पहुंच सकते हैं। न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बैठक में पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति और क्षेत्रीय तनाव को लेकर अहम चर्चा होने की संभावना है। अगर यह दौरा तय होता है तो क्षेत्रीय संघर्ष शुरू होने के बाद यह अब्बास अराघची की पहली भारत यात्रा होगी। 

BRICS से उम्मीद लगाए बैठा है ईरान

रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान चाहता है कि भारत की अध्यक्षता में BRICS समूह पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए सक्रिय भूमिका निभाए। ईरान की कोशिश है कि BRICS जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच के जरिए क्षेत्रीय तनाव को कम करने की दिशा में बातचीत आगे बढ़े। सूत्रों का कहना है कि तेहरान को उम्मीद है कि भारत इस मुद्दे पर संतुलित और प्रभावी भूमिका निभा सकता है।

एस. जयशंकर से बातचीत में भी उठा था मुद्दा

मार्च महीने में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अब्बास अराघची के बीच बातचीत हुई थी। उस दौरान भी BRICS की भूमिका को लेकर चर्चा हुई थी। ईरानी सरकार की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, अराघची ने कहा था कि मौजूदा हालात में BRICS जैसे मंच क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता बनाए रखने में जरूरी भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि दुनिया के बड़े देशों को मिलकर ऐसे संघर्षों को रोकने की दिशा में काम करना चाहिए, ताकि हालात और ज्यादा न बिगड़ें।

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नई दिल्ली में होगी अहम बैठक

भारत इस समय BRICS समूह की अध्यक्षता कर रहा है। इसी सिलसिले में मई में नई दिल्ली में अहम बैठक आयोजित की जा रही है। इस बैठक में सदस्य देशों के प्रतिनिधि कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा करेंगे। माना जा रहा है कि पश्चिम एशिया की स्थिति इस बैठक का बड़ा एजेंडा बन सकती है। खास तौर पर ईरान की मौजूदगी से यह बैठक और ज्यादा अहम मानी जा रही है। कूटनीतिक जानकारों का कहना है कि भारत इस मंच के जरिए संतुलित बातचीत और सहयोग का संदेश देना चाहता है।

Sona Rajput
By Sona Rajput

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन किया है। साल 2022 ...Read More

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