इंदौर। दुष्कर्म के आरोप में दर्ज एक मामले में आरोपी को हाईकोर्ट से राहत मिली है। अदालत ने उसकी अग्रिम जमानत रद्द करने की मांग खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि केवल व्हाट्सएप स्टेटस लगाने से पीड़िता या साक्ष्यों को प्रभावित करने का ठोस आधार नहीं बनता।
क्या है पूरा मामला
पीड़िता ने जून 2025 में बाणगंगा थाने में देवास निवासी दीपक विश्नोई के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप था कि आरोपी ने शादी का झांसा देकर वर्ष 2020 से 2024 के बीच उसके साथ दुष्कर्म किया।
बचाव पक्ष ने उठाया विवाद का मुद्दा
आरोपी की ओर से कोर्ट में पेश अधिवक्ताओं ने दलील दी कि दोनों पक्षों के बीच आर्थिक लेन-देन को लेकर विवाद था, जिसके चलते पुरानी घटनाओं को आधार बनाकर मामला दर्ज कराया गया। बचाव पक्ष ने दोनों के संबंधों से जुड़े कुछ फोटो भी अदालत के सामने रखे थे। इन तथ्यों के आधार पर आरोपी को पहले ही अग्रिम जमानत मिल चुकी थी।
स्टेटस को लेकर उठाया सवाल
बाद में पीड़िता ने जमानत निरस्ती के लिए आवेदन देते हुए आरोप लगाया कि आरोपी ने जमानत मिलने के बाद व्हाट्सएप पर आपत्तिजनक शायरी डालकर उसे प्रभावित करने का प्रयास किया।
कोर्ट ने क्या कहा
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि संबंधित स्टेटस में पीड़िता का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है और यह भी साबित नहीं किया जा सका कि इससे वह या केस के साक्ष्य प्रभावित हुए हों। कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी को भी किसी का स्टेटस देखने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।
जमानत बरकरार
इन सभी बिंदुओं को देखते हुए हाईकोर्ट ने जमानत निरस्ती की मांग को खारिज कर दिया और आरोपी को दी गई अग्रिम जमानत को यथावत रखा।