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छतरपुर:केन-बेतवा लिंक परियोजना के खिलाफ उग्र हुआ विरोध, महिलाएं ‘चिता आंदोलन’ में उतरीं

छतरपुर जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। पिछले कई महीनों से चल रहे इस आंदोलन के बीच अब प्रदर्शनकारियों ने ‘चिता आंदोलन’ शुरू कर दिया है।
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केन-बेतवा लिंक परियोजना के खिलाफ उग्र हुआ विरोध, महिलाएं ‘चिता आंदोलन’ में उतरीं
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। पिछले कई महीनों से चल रहे इस आंदोलन के बीच अब प्रदर्शनकारियों ने ‘चिता आंदोलन’ शुरू कर दिया है जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हैं।

    नकली चिताओं पर लेटकर जताया विरोध

    गुरुवार को सैकड़ों की संख्या में आदिवासी किसान और महिलाएं प्रदर्शन स्थल पर नकली चिताओं पर लेट गईं। ज्यादातर महिलाएं इस आंदोलन में शामिल रहीं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह आंदोलन उनके जीवन और अस्तित्व की लड़ाई है और वे आखिरी सांस तक इसका विरोध करते रहेंगे। लोगों की मांग है कि अगर उनकी जमीन और गांव परियोजना के दायरे में आ रहे हैं तो उन्हें उचित मुआवजा और पुनर्वास के लिए नया गांव दिया जाए।

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    ‘या तो न्याय दो या मृत्यु दो’ के नारे के साथ प्रदर्शन

    प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि प्रशासन उनकी बात नहीं सुन रहा है और लगातार दबाव बनाया जा रहा है। महिलाओं ने ‘चिता आंदोलन’ के जरिए प्रतीकात्मक रूप से यह संदेश दिया कि वे या तो न्याय लेकर रहेंगी या फिर अपना जीवन यहीं समाप्त कर देंगी। पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों को हटाने की कोशिश के दौरान हल्की झड़प की स्थिति भी बनी।

    डूब क्षेत्र में आने वाले गांवों के लोग चिंतित

    स्थानीय लोगों का कहना है कि उनके गांव परियोजना के डूब क्षेत्र में आ रहे हैं जिससे उनका घर और खेती दोनों प्रभावित होंगे। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि उनके गांवों में खाने-पीने की आपूर्ति बाधित की गई और उन्हें आंदोलन से रोकने की कोशिश की जा रही है।

    केन-बेतवा लिंक परियोजना का बड़ा दायरा

    गौरतलब है कि इस परियोजना का उद्देश्य केन नदी बेसिन का पानी बेतवा बेसिन के सूखे क्षेत्रों तक पहुंचाना है। इसके तहत छतरपुर जिले में दौधन बांध का निर्माण किया जा रहा है, साथ ही लगभग 200 किलोमीटर लंबा नहर नेटवर्क भी विकसित किया जा रहा है। इस परियोजना से करीब 10 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई, बिजली उत्पादन और लगभग 62 लाख लोगों को पेयजल उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। इसे मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के सूखाग्रस्त क्षेत्रों के लिए एक बड़ी योजना माना जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2024 में खजुराहो में इस परियोजना की आधारशिला रखी थी।

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    प्रशासन ने लागू की धारा 163

    छतरपुर और पन्ना जिलों में प्रशासन ने बीएनएसएस की धारा 163 के तहत कई इलाकों में निषेधाज्ञा लागू कर दी है। इसके तहत प्रदर्शन स्थलों के आसपास आवाजाही पर रोक लगा दी गई है।

    Sumit  Shrivastava
    By Sumit Shrivastava

    सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...Read More

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