इंदौर/धार।
धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला के धार्मिक स्वरूप को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में सुनवाई लगातार गरमाती जा रही है। शुक्रवार को सुनवाई के पांचवें दिन याचिकाकर्ता पक्ष ने मंदिर होने के समर्थन में कई तर्क रखते हुए परिसर में 24 घंटे पूजा की अनुमति और गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध की मांग की।
याचिकाकर्ता कुलदीप तिवारी की ओर से अधिवक्ता मनीष गुप्ता ने कोर्ट में दलील दी कि भोजशाला का निर्माण परमारकाल में हुआ था और यह मूल रूप से एक मंदिर एवं शिक्षण स्थल था। उन्होंने कहा कि उस दौर में राजा भोज द्वारा कई “शिक्षा मंदिर” स्थापित किए गए थे, जिनमें भोजशाला प्रमुख थी।
शिलालेख और मूर्तियों का दिया हवाला
बहस के दौरान वकील ने बताया कि भोजशाला में मिले पत्थरों और अन्य परमारकालीन स्थलों के पत्थरों में समानता है, जो इसके प्राचीन मंदिर होने की ओर इशारा करती है। उन्होंने वाग्देवी (सरस्वती) की मूर्ति के वर्णन और शास्त्रीय ग्रंथों—जैसे ‘समरांगण सूत्रधार’ और ‘सरस्वती कंठाभरण’ ,का हवाला देते हुए कहा कि यहां स्थापित मूर्ति का विवरण ग्रंथों से मेल खाता है। साथ ही उज्जैन के जूना महाकालेश्वर मंदिर और भोजशाला में पाए गए शिलालेखों की समानता को भी मंदिर होने के प्रमाण के रूप में प्रस्तुत किया गया।
ASI सर्वे का भी हवाला
अदालत को बताया गया कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की जांच में भी ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जो भोजशाला के मंदिर स्वरूप की पुष्टि करते हैं। याचिकाकर्ता पक्ष का दावा है कि परिसर में मिले स्तंभों और पत्थरों पर संस्कृत में उकेरी गई लिपियां यह दर्शाती हैं कि मस्जिद का निर्माण बाद में मंदिर के अवशेषों से किया गया।
अगली सुनवाई 15 अप्रैल को
मामले की अगली सुनवाई 15 अप्रैल को तय की गई है, जिसमें याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से आगे भी तर्क रखे जाएंगे।