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Supreme Court : राजीव गांधी के हत्यारे जेल से होंगे रिहा, सुप्रीम कोर्ट ने 6 दोषियों की रिहाई का दिया आदेश

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Supreme Court : राजीव गांधी के हत्यारे जेल से होंगे रिहा, सुप्रीम कोर्ट ने 6 दोषियों की रिहाई का दिया आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी हत्याकांड पर बड़ा फैसला सुनाया है। इस हत्याकांड में उम्रकैद की सजा काट रहे 6 दोषियों की समय से पहले रिहाई की मांग को सुप्रीम कोर्ट ने मान लिया है। शुक्रवार को शीर्ष अदालत ने 6 दोषियों की समय से पहले रिहाई का आदेश सुनाया है।

ये 6 दोषी होंगे रिहा

राजीव गांधी हत्याकांड में नलिनी, रविचंद्रन, मुरुगन, संथन, जयकुमार, और रॉबर्ट पॉयस को रिहा करने के आदेश दिया है। पेरारिवलन पहले ही इस मामले में रिहा हो चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 18 मई को जेल में अच्छे बर्ताव के कारण पेरारिवलन को रिहा करने का आदेश दिया था। जस्टिस एल नागेश्वर की बेंच ने आर्टिकल 142 का इस्तेमाल करते हुए यह आदेश दिया था।

पेरारिवलन को रिहा करने का दिया था आदेश

बता दें, नलिनी व रविचंद्रन ने समय से पहले रिहाई को लेकर शीर्ष अदालत का रुख किया था। न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना की पीठ ने कहा कि मामले के दोषियों में से एक एजी पेरारिवलन के मामले में शीर्ष अदालत का फैसला उनके मामले में भी लागू होता है। दरअसल, शीर्ष अदालत ने 18 मई को पेरारिवलन को रिहा करने का आदेश दिया था। जिसने 30 साल से ज्यादा जेल की सजा पूरी कर ली थी।

चुनावी रैली में हुई थी राजीव गांधी की हत्या

राजीव गांधी की 21 मई, 1991 की रात को तमिलनाडु के श्रीपेरंबुदूर में एक महिला आत्मघाती हमलावर द्वारा हत्या कर दी गई थी, जिसकी पहचान धनु के रूप में एक चुनावी रैली में हुई थी। महिला ने राजीव गांधी को फूलों का हार पहनाने के बाद उनके पैर छूए और झुकते हुए कमर पर बंधे विस्फोटकों में ब्लास्ट कर दिया। धमाका इतना जबरदस्त था कि कई लोगों के चीथड़े उड़ गए। राजीव और हमलावर समेत 16 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी। जबकि, 45 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे।

41 लोगों को बनाया था आरोपी

इस मामले में कुल 41 लोगों को आरोपी बनाया गया था। 12 लोगों की मौत हो चुकी थी और तीन फरार हो गए थे। बाकी 26 पकड़े गए थे। इसमें श्रीलंकाई और भारतीय नागरिक थे। फरार आरोपियों में प्रभाकरण, पोट्टू ओम्मान और अकीला थे। आरोपियों पर टाडा कानून के तहत कार्रवाई की गई। 7 साल तक चली कानूनी कार्यवाही के बाद 28 जनवरी 1998 को टाडा कोर्ट ने हजार पन्नों का फैसला सुनाया। इसमें सभी 26 आरोपियों को मौत की सजा सुनाई गई।

19 दोषी पहले हो चुके रिहा

टाडा कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। टाडा कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकती थी। एक साल बाद सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने इस पूरे फैसले को ही पलट दिया। सुप्रीम कोर्ट ने 26 में से 19 दोषियों को रिहा कर दिया। सिर्फ 7 दोषियों की फांसी की सजा को बरकरार रखा गया था। बाद में इसे बदलकर उम्रकैद किया गया। अन्य राष्ट्रीय खबरों के लिए यहां क्लिक करें…
Mithilesh Yadav
By Mithilesh Yadav

वर्तमान में पीपुल्स समाचार के डिजिटल विंग यानी 'पीपुल्स अपडेट' में बतौर सीनियर सब-एडिटर कार्यरत हूं।...Read More

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