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रायपुर:सीएम विष्णुदेव साय ने आपातकाल के योद्धा का किया विमोचन, बोले-नई पीढ़ी तक पहुंचे आपातकाल की कहानी

राजधानी रायपुर के डीडीयू ऑडिटोरियम में आपातकाल स्मृति दिवस के अवसर पर लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान में समारोह आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कार्यक्रम में शामिल होकर लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान किया और उनके संघर्षों को याद किया। इस अवसर पर लोकतंत्र सेनानियों के जीवन और योगदान पर आधारित स्मारिका आपातकाल के योद्धा का विमोचन भी किया गया।
सीएम विष्णुदेव साय ने आपातकाल के योद्धा का किया विमोचन, बोले-नई पीढ़ी तक पहुंचे आपातकाल की कहानी

रायपुर। समारोह में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का ऐसा अध्याय है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने लोकतंत्र सेनानियों के त्याग और संघर्ष को आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बताते हुए इतिहास को पाठ्यक्रम में शामिल करने की पहल की सराहना की।

लोकतंत्र सेनानियों को किया सम्मानित

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने समारोह में लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान करते हुए उनके योगदान को नमन किया। इस दौरान उन्होंने लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष पर आधारित स्मारिका आपातकाल के योद्धा का विमोचन किया। साथ ही आपातकाल विषय पर आयोजित निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को भी सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन किया।

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सीएम साय ने याद किया आपातकाल का दौर

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि आपातकाल का समय भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का ऐसा कालखंड है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र सेनानियों ने जेल, यातनाओं और कठिन परिस्थितियों के बावजूद लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए अभूतपूर्व योगदान दिया। उनका संघर्ष आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणादायक रहेगा।

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'आपातकाल को कभी भुलाया नहीं जा सकता'

मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे आयोजनों का उद्देश्य केवल अतीत को याद करना नहीं, बल्कि युवाओं को लोकतंत्र की वास्तविक ताकत से परिचित कराना भी है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता और लोकतंत्र अनेक बलिदानों के बाद प्राप्त हुए हैं। इतिहास को पाठ्यक्रम में शामिल करने की पहल को उन्होंने समय की आवश्यकता और सराहनीय कदम बताया।

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परिवार की स्मृतियां साझा कर किया भावुक उल्लेख

सीएम साय ने अपने पारिवारिक अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनके बड़े पिताजी स्वर्गीय नरहरि साय आपातकाल के दौरान 19 महीनों तक जेल में रहे थे। उन्होंने कहा कि उस दौर में लोकतंत्र सेनानियों के परिवारों ने भी भारी कठिनाइयों का सामना किया। स्वयंसेवकों ने भेष बदलकर परिवारों तक अनाज पहुंचाया, ताकि कोई भूखा न रहे। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर सभी लोकतंत्र सेनानियों को याद करते हुए उनके त्याग को देश के इतिहास की अमूल्य धरोहर बताया।

Rohit Sharma
By Rohit Sharma

पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...Read More

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