PU Special :जेलों में हिंसा और आत्महत्या रोकने के लिए ‘प्रोजेक्ट प्रहरी’, सभी सेंट्रल जेलों में खुलेंगे काउंसलिंग सेंटर

विजय एस. गौर, भोपाल। मध्यप्रदेश की जेलों में बंद कैदियों को मानसिक तनाव, अवसाद और मानसिक विकारों से बचाने के साथ ही हिंसक होने और आत्मघाती कदम उठाने से रोकने के लिए अब विशेष पहल शुरू होने जा रही है। इसके तहत प्रदेश की सभी सेंट्रल जेलों में ‘प्रोजेक्ट प्रहरी’ के तहत मनोसामाजिक काउंसलिंग सेंटर और ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू किए जाएंगे। इस योजना को लेकर जेल विभाग और राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (RRU) के बीच गुरुवार को एमओयू साइन किया जाएगा। प्रोजेक्ट के तहत कैदियों की मानसिक स्थिति को समझने, तनाव और अवसाद की समय पर पहचान करने तथा जरूरत के मुताबिक काउंसलिंग और सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी।
क्षमता 32 हजार की, जेलों में बंद हैं 42 हजार से ज्यादा कैदी
मध्यप्रदेश की जेलों में करीब 32 हजार कैदियों को रखने की क्षमता है जबकि वर्तमान में 42 हजार से अधिक कैदी जेलों में बंद हैं। क्षमता से अधिक कैदियों की मौजूदगी और लंबे समय तक जेल में रहने के कारण कई कैदी मानसिक तनाव और अवसाद का सामना करते हैं। कई कैदी जमानत नहीं मिलने या लंबी अवधि की सजा के कारण लंबे समय तक जेल में रहते हैं। ऐसे में उन्हें सुरक्षा, परिवार, भविष्य और कानूनी प्रक्रिया को लेकर चिंता बनी रहती है। मानसिक तनाव बढ़ने पर आत्मघाती कदम उठाने के साथ ही जेलों में हिंसक झड़पों की स्थिति भी बन सकती है।
6 साल में 1500 कैदियों की मौत
विधानसभा में पेश किए गए बीते छह वर्षों के आंकड़ों के मुताबिक मध्यप्रदेश की जेलों में इस अवधि में कुल 1500 कैदियों की मौत हुई।
| मौत का कारण | संख्या | प्रतिशत |
| आत्महत्या | 680 | 45.31% |
| बीमारी | 656 | 43.76% |
| हृदयाघात | 164 | 10.93% |
| कुल | 1500 | 100% |
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इन आंकड़ों में आत्महत्या सबसे बड़ा कारण सामने आया है। कुल मौतों में 680 यानी 45.31 प्रतिशत मौतें आत्महत्या के कारण हुईं। बीमारी से 656 और हृदयाघात से 164 कैदियों की मौत हुई।
अवसाद से बचाने की तैयारी
प्रोजेक्ट प्रहरी के तहत कैदियों में अवसाद और मानसिक विकारों की पहचान कर उन्हें समय पर मदद उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा। इसके लिए जेलों में विशेष मनोसामाजिक काउंसलिंग सेंटर बनाए जाएंगे। काउंसलिंग के जरिए कैदियों के मानसिक तनाव को कम करने, उन्हें हिंसक व्यवहार से रोकने और आत्मघाती विचारों की समय रहते पहचान करने का प्रयास किया जाएगा। प्रोजेक्ट के लिए बजट की व्यवस्था सामाजिक न्याय मंत्रालय की ओर से की जाएगी।
भोपाल सेंट्रल जेल से होगी शुरुआत
मध्यप्रदेश में फिलहाल 11 सेंट्रल जेल हैं। इसके अलावा शिवपुरी और रतलाम जेलों को सेंट्रल जेल का दर्जा दिया गया है। इस तरह कुल 13 जेलों में काउंसलिंग सेंटर बनाए जाएंगे। इन सेंटरों की शुरुआत भोपाल सेंट्रल जेल से होगी। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से प्रदेश की अन्य सेंट्रल जेलों में भी यह व्यवस्था लागू की जाएगी।
मनोचिकित्सक और काउंसलर पहुंचेंगे जेल
प्रोजेक्ट के तहत मनोचिकित्सकों और काउंसलरों की टीम जेलों में पहुंचेगी। ये विशेषज्ञ कैदियों की मानसिक स्थिति का आकलन करेंगे और जरूरत के मुताबिक उनकी काउंसलिंग करेंगे। सिर्फ कैदियों को काउंसलिंग देने तक ही यह प्रोजेक्ट सीमित नहीं रहेगा। जेल स्टाफ और प्रहरियों को भी कैदियों की मानसिक स्थिति पहचानने और उनकी काउंसलिंग करने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे जेल कर्मचारी ऐसे कैदियों की पहचान कर सकेंगे जिनमें तनाव, अवसाद, मानसिक परेशानी या हिंसक व्यवहार के संकेत दिखाई दे रहे हों।
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कैदियों में आत्महत्या के प्रमुख कारण
जेल विभाग के अनुसार कैदियों में आत्मघाती कदम उठाने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें प्रमुख रूप से:
- सुरक्षा और भविष्य को लेकर चिंता से पैदा होने वाला मानसिक तनाव।
- कैदियों की मानसिक स्वास्थ्य संबंधी काउंसलिंग का पर्याप्त इंतजाम नहीं होना।
- जेलों में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की समय पर पहचान और सहायता का अभाव।
इन कारणों को ध्यान में रखते हुए प्रोजेक्ट प्रहरी के तहत मानसिक स्वास्थ्य सहायता को जेल व्यवस्था का हिस्सा बनाने की तैयारी है।
प्रोजेक्ट प्रहरी के तहत काउंसलिंग सेंटर शुरू
एमआर पटेल, डीआईजी, वेलफेयर, जेल के मुताबिक कैदियों को मानसिक तनाव और मानसिक विकारों से बचाने के लिए प्रोजेक्ट प्रहरी के तहत काउंसलिंग सेंटर शुरू किए जा रहे हैं। जेल स्टाफ और प्रहरियों को भी कैदियों की मानसिक स्थिति पहचानकर काउंसलिंग करने का प्रशिक्षण दिया जाएगा।














