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बैतूल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का संदेश:अध्यात्म, सामाजिक समरसता और पर्यावरण संरक्षण से बनेगा विकसित भारत

बैतूल में ब्रह्मकुमारीज महासम्मेलन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अध्यात्म, सामाजिक समरसता और पर्यावरण संरक्षण को विकसित भारत का आधार बताया। आदिवासी समाज की संस्कृति की भी सराहना की।
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अध्यात्म, सामाजिक समरसता और पर्यावरण संरक्षण से बनेगा विकसित भारत

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरुवार को मध्य प्रदेश के बैतूल में आयोजित ब्रह्मकुमारीज संस्थान के महासम्मेलन में विकसित भारत के निर्माण के लिए अध्यात्म, सामाजिक समरसता और पर्यावरण संरक्षण को सबसे महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक शिक्षा व्यक्ति के जीवन में शांति, संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है, जिससे समाज और राष्ट्र दोनों को नई दिशा मिलती है।

ब्रह्मकुमारीज के महासम्मेलन का किया शुभारंभ

राष्ट्रपति बैतूल के लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम में आयोजित ब्रह्मकुमारीज संस्थान के महासम्मेलन आध्यात्मिक जागृति द्वारा आदिवासी समाज का सशक्तिकरण में शामिल हुईं। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के साथ हुई। इसके बाद राष्ट्रपति ने दीप प्रज्ज्वलित कर सम्मेलन का विधिवत शुभारंभ किया। आयोजकों ने उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम के दौरान कलाकारों ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दीं जिन्होंने उपस्थित लोगों का मन मोह लिया।

आदिवासी समाज की संस्कृति और मूल्यों की सराहना

अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने जनजातीय समाज की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय ने अपनी सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं को पीढ़ियों से सहेजकर रखा है, जो पूरे समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज के जीवन में संवेदनशीलता, सहयोग, ईमानदारी और मानवीय मूल्य गहराई से जुड़े हुए हैं। यही विशेषताएं उन्हें समाज में एक अलग पहचान देती हैं।

पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का आह्वान

राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि आदिवासी समुदाय का प्रकृति के साथ गहरा जुड़ाव है। जल, जंगल और जमीन के संरक्षण के प्रति उनकी सोच आज के समय में पूरे समाज के लिए अनुकरणीय है। उन्होंने अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने और पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का रूप देने की अपील की। राष्ट्रपति ने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए प्रकृति का संरक्षण बेहद आवश्यक है।

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राष्ट्र निर्माण में सभी की समान भागीदारी जरूरी

अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी को याद करते हुए उनके प्रसिद्ध कथन भारत जमीन का टुकड़ा नहीं बल्कि जीता-जागता राष्ट्रपुरुष है का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कश्मीर से कन्याकुमारी तक देश का हर क्षेत्र भारत की आत्मा का हिस्सा है और विकसित भारत के निर्माण में सभी समुदायों की समान भागीदारी आवश्यक है।

2047 तक विकसित भारत के संकल्प पर जोर

राष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि यह महासम्मेलन जनजातीय समाज के सशक्तिकरण और आध्यात्मिक जागरूकता को नई दिशा देगा। उन्होंने सभी नागरिकों से वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए मिलकर कार्य करने का आह्वान किया।

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कार्यक्रम में मौजूद रहे कई गणमान्य अतिथि

महासम्मेलन की अध्यक्षता मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने की। कार्यक्रम में केंद्रीय राज्यमंत्री दुर्गादास उईके, राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल तथा ब्रह्मकुमारीज संस्थान के कई वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे। माउंट आबू से आईं लीना बहन और शैलजा बहन सहित अन्य विशिष्ट अतिथियों ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।

Sumit Shrivastava
By Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...Read More

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