ब्रिटेन में 100 साल पुराने भारतीय रेस्टोरेंट पर बढ़ा बंद होने का खतरा!लीज खत्म, जानें क्या है पूरा विवाद?

ब्रिटेन। शहर में मौजूद वीरास्वामी रेस्टोरेंट जो पिछले कई सालों से अपनी लजीज स्वाद के लिए लोगों के दिल में बस चुका है। इस भारतीय रेस्टोरेंट में कई चीजें भारत की मौजूद है, होटल का मालिक क्राउन एस्टेट ब्रिटेन की एक बड़ी सरकारी संपत्ति संस्था है, जो राजा या रानी के नाम पर चलती है। वहीं अब क्राइन एस्टेट वीरास्वामी की बिल्डिंग में कुछ बदलाव और नए निर्माण का काम करवाना चाहते हैं। इसी वजह से उन्होंने रेस्टोरेंट का किराए यानी लीज का समझौता आगे बढ़ाने से मना कर दिया।
कोर्ट पहुंचा वीरास्वामी रेस्टोरेंट
वीरास्वामी नामक रेस्टोरेंट की जून 2025 में लीज खत्म हो गई थी। जिसमें रेस्तरा मालिक का कहना है कि अगर लीज नहीं बढ़ाई गई तो उसे 100 साल पुरानी अपनी जगह छोड़नी पड़ेगी। इस फैसले से चिंता में आए रेस्टोरेंट ने इसे चुनौती देने के लिए कोर्ट में अर्जी लगाई है। रेस्तरां का मेन्यू भारत में जन्मे एडवर्ड पामर ने तैयार किया था। उन्हें हैदराबाद के शाही महल में बनने वाली व्यंजनों की रेसिपी अपनी दादी से मिली थी, उसी से प्रेरित होकर उन्होंने यहां का खाना तैयार किया।
यह भी पढ़ें: ट्रंप बोले- 'It's Signed'! अमेरिका-ईरान डील पर लगी मुहर, ट्रंप और पेजेश्कियान ने MoU पर किए साइन
1926 से हुई थी शुरुआत, 100 साल पूरे
ब्रिटेन में मौजूद इस रेस्टोरेंट की शुरुआत अप्रैल 1926 में हुई थी। जिसमें तब से लेकर अब तक ब्रिटेन के अलावा भी कई देशों के लोग यहां पहुंच चुके हैं। जिससे इसने अपनी एक खास पहचान बनाई थी। यह सिर्फ एक रेस्टोरेंट नहीं बल्कि ब्रिटेन में भारतीय खाने के इतिहास का जरूरी हिस्सा भी माना जाता है।
बात पिछले एक सदी की करे तो यहां अब तक कई मशहूर लोग व्यंजन का स्वाद लेने पहुंच चुके हैं। इनमें ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल, अभिनेत्री विवियन ली, एक्टर मॉर्लन ब्रैंडो, लॉरेंस ओलिवियर, चार्ली चैपलिन और यहां तक कि ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय भी शामिल है। रेस्तरां का मेन्यू भारत में जन्मे एडवर्ड पामर ने तैयार किया था। उन्हें हैदराबाद के शाही महल में बनने वाली व्यंजनों की रेसिपी अपनी दादी से मिली थी, उसी से प्रेरित होकर उन्होंने यहां का खाना तैयार किया।
करी के साथ बीयर पीने की यहीं से हुई शुरुआत
रेस्तरां से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा भी काफी चर्चित है। दावा किया जाता है कि इंग्लैंड में करी के साथ बीयर पीने की परंपरा की शुरुआत यहीं से हुई थी। बताया जाता है कि डेनमार्क के राजा जब भी लंदन आते थे, तो वीरास्वामी में भोजन करना नहीं भूलते थे। उनकी पसंदीदा कार्ल्सबर्ग बीयर का एक पूरा पीपा रेस्तरां में हमेशा रखा जाता था, ताकि उनके आने पर वही बीयर परोसी जा सके। वीरास्वामी ने अपने लंबे इतिहास में कई बड़े दौर देखे हैं। यह रेस्तरां दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जर्मन बमबारी (ब्लिट्ज) से भी बच गया था और समय-समय पर रेस्तरां उद्योग में आए उतार-चढ़ाव का भी गवाह रहा है।
क्या कोर्ट से मिलेगा न्याय
रेस्तरां की मूल कंपनी एमडब्ल्यू ईट (MW Eat) अब अदालत में अपना पक्ष रखने की तैयारी कर रही है। विवाद का केंद्र लंदन की विक्ट्री हाउस इमारत है, जहां यह रेस्तरां संचालित होता है। इमारत के मालिक क्राउन एस्टेट का कहना है कि वह ऊपरी मंजिलों पर स्थित दफ्तरों का पुनर्विकास करना चाहता है। इसके लिए रेस्तरां और दफ्तरों के प्रवेश क्षेत्र के बीच की दीवार हटाकर बड़ा रिसेप्शन एरिया बनाने की योजना है।
क्राउन एस्टेट का दावा है कि इस बदलाव से दफ्तरों का किराया बढ़ाया जा सकेगा। वहीं, रेस्तरां प्रबंधन का कहना है कि मरम्मत और नवीनीकरण का काम उन्हें हटाए बिना भी संभव है।
2.6 करोड़ की लीज नवीनीकरण से क्राउन स्टेट की मनाही
क्राउन एस्टेट ने जून 2025 में वीरास्वामी की सालाना 2.05 लाख पाउंड (करीब 2.6 करोड़ रुपए) की लीज का नवीनीकरण करने से इनकार कर दिया था। यदि अदालत का फैसला रेस्तरां के खिलाफ जाता है, तो जिस स्थान पर आज वीरास्वामी संचालित हो रहा है, उसे दफ्तरों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। ऐसे में लगभग 100 साल पुरानी इस ऐतिहासिक भारतीय खानपान विरासत का भविष्य अदालत के फैसले पर निर्भर करेगा।











