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बुखार में पैरासिटामॉल नहीं पौधे का अर्क करेगा काम, पंडित खुशीलाल आयुर्वेद कॉलेज में चूहों पर हुआ शोध

जल्द ही शुरू किया जाएगा ह्यूमन ट्रायल
बुखार में पैरासिटामॉल नहीं पौधे का अर्क करेगा काम, पंडित खुशीलाल आयुर्वेद कॉलेज में चूहों पर हुआ शोध

भोपाल। अचानक या तेज बुखार आने पर जुबान पर सबसे पहले पैरासिटामॉल दवा का नाम ही आता है। विशेषज्ञ इस दवा के कई गंभीर साइडइफेक्टर भी बताते हैं। इसके बावजूद बुखार में यह विश्व में सबसे ज्यादा खाई जाने वाली दवा है। अब बुखार और बदन दर्द जैसी सामान्य परेशानियां विशेष पौधे से दूर हो जाएंगी। दरअसल राजधानी के पंडित खुशीलाल आयुर्वेदिक महाविद्यालय ने केरल में पाए जाने वाले पौधे गोजिव्हा (एलिफैंटोपस स्कैबर) पर शोध कर उसमें पैरासिटामॉल के समान ही रासायनिक तत्व पाए गए हैं। यह निष्कर्ष करीब 45 दिन तक चूहों पर किए गए शोध में सामने आए हैं। यह शोध केरल के छात्र डॉ. अजमल द्वारा कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. नितिन उज्जलिया के मार्गदर्शन में किया गया।

जल्द शुरू होंगे ह्यूमन क्लीनिकल ट्रायल

डॉ. उज्जलिया ने बताया कि फिलहाल यह एक्सपेरीमेंटल रिसर्च के नतीजे हैं। मानव शरीर पर यह कैसे असर करेंगे? इसके लिए ह्यूमन क्लीनिकल ट्रायल की जरूरत होती है। जिसकी जल्द ही अनुमति मांगी जाएगी। ह्यूमन क्लीनिकल ट्रायल के नतीजों के आधार पर ही तय होगा कि इसे दवा के रूप में मान्यता दें या नहीं। गोजिव्हा की नॉर्थ इंडिया में पाई जाने वाली स्पिसीज ओनोस्मा ब्रैक्टिएटम को पहले ही दवा के रूप में मान्यता मिल चुकी है।

नहीं होता कोई साइड इफेक्ट

इनकी उपयोगिता पैरासिटामॉल के सामान पाई गई है। शोध के दौरान यह देखा गया कि यह पौधा टेम्प्रेचर को कम करने में उतना ही समय लेता है जितना पैरासिटामॉल से लगता है। इसके बाद इससे कोई नुकसान तो नहीं, इसकी जांच की गई। जिसमें पाया गया कि यह किसी भी प्रकार से नुकसान नहीं पहुंचाता है। डॉ. उज्जलिया ने बताया कि गोजिव्हा का अर्थ है गाय की जीभ, यह नाम इसे इसकी बनावट और खुरदुरे पत्तों की वजह से मिला।

पैरासिटामॉल की सही मात्रा

18 साल के व्यक्ति को 325 से 650 एमजी 4 से 6 घंटे की अंतराल पर और हजार एमजी पैरासिटामॉल 6 से 8 घंटे के अंतराल पर लेनी चाहिए। छोटे बच्चे को 10 से 15 एमजी प्रति किलो शरीर के वजन के हिसाब से 6 से 8 घंटे के बीच लेनी चाहिए।

इन पौधों का अन्य इस्तेमाल

  • एलिफेंटोपस स्कैबर: यह घाव भरने वाली जड़ी बूटी के रूप में भी उपयोग किए जाते हैं।
  • ओनोस्मा ब्रैक्टिएटम: पीलिया, घाव, स्टामाटाइटिस, कब्ज, हृदय की मांसपेशियों की कमजोरी और बुखार के इलाज में किया जाता है।
People's Reporter
By People's Reporter

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