Naresh Bhagoria
5 Jan 2026
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4 Jan 2026
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Aakash Waghmare
4 Jan 2026
मनोज चौरसिया, भोपाल। राजधानी में रेलवे का पार्सल विभाग दलालों के सहारे चल रहा है। यहां पर दलालों की अनुमति के बिना किसी भी माल की निकासी मुमकिन नहीं। चुंगी कर चोरी में भी इन दलालों की अहम भूमिका है। पार्सल विभाग में तैनात रेलवे के अधिकारी खुद कोई काम न करके इन्हीं दलालों से मिलने की सलाह देते हैं। यह दलाल ना केवल खुलेआम सामान की लोडिंग अनलोडिंग करते हैं, बल्कि इसके लिए मनचाहा दाम भी वसूलते हैं।
पीपुल्स समाचार ने स्टिंग कर पार्सल विभाग में चल रहे इस फर्जीवाड़े को उजागर किया। पीपुल्स समाचार के रिपोर्टर ने जब रेलवे के एक दलाल से दोपहिया वाहन झांसी भेजने की बात कही तो उसने इसके लिए 4 हजार रुपए की मांग की जबकि रेलवे के नियमानुसार 500 से 600 रुपए लगते हैं। इसके अलावा गाड़ी का पैकिंग 300 से 400 रुपए है। इस हिसाब से कुल 1000 में वाहन जाना चाहिए पर 4 गुना वसूली की जा रही है।
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संवाददाता भोपाल स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 6 पर बने पार्सल रेल सेवा के आॅफिस पहुंचा तो यहां पर बनी पार्किंग पर कुछ लोगों का जमावड़ा लगा था। ऑफिस पहुंचने से पहले ही उन्होंने रोक लिया और पूछा भाई क्या भेजना है। ऑफिस के पास ही दलालों का जमावड़ा लगा रहता है पर रेलवे कोई कार्रवाई नहीं करता है।
दरअसल, रेलवे पार्सल सेवा को चलाने के लिए 40 कर्मचारियों का स्टाफ होना चाहिए जो वाहन पैकिंग लोडिंग की व्यवस्था संभालते हैं। हालात ये हैं कि यहां पर मात्र करीब 14 कर्मचारी ही हैं।
दलाल सिस्टम इसलिए भी प्रभावी है क्योंकि सरकारी सिस्टम से सामान पहुंचाने के बाद गारंटी नहीं होती कि सामान कब पहुंचेगा। वहीं दलाल सामान की पैकिंग से लेकर लोडिंग और उसे सुरक्षित पहुंचाने की गांरटी लेते हैं। सरकारी सिस्टम में कई ऐसे मामले भी आते हैं, जब सामाना किसी दूसरी जगह पहुंच गया।
सबसे बड़ी सुविधा यह है कि सामान की जांच नहीं होती। पार्सल के जरिए बड़ी संख्या में इलेक्ट्रिक आयटम भी भेजे जाते हैं। अभी यह सामान रेलवे द्वारा भेजा जाता है तो कई तरह की जांच और पर्चियां कटती हैं। जबकि दलाल के माध्यम से इन सामान की जांच नहीं होती।
[quote name="-अरुण विश्वकर्मा, करोंद, भोपाल" quote="मैंने अपनी बाइक भोपाल से दिल्ली भेजने के लिए रेलवे से एक हजार रुपए की रसीद कटवाई। इसके साथ ही हजार रुपए पैकिंग के लिए भी दिए। यही नहीं रसीद पर नंबर लिखने के लिए भी 150 रुपए देने पड़े। इसके बावजूद मेरी बाइक आठ दिन तक प्लेटफार्म पर ही खड़ी रही। जब किसी तरह बाइक नहीं पहुंची तो दलाल को दो हजार रुपए दिए। बाइक अगले दिन दिल्ली पहुंच गई।" st="quote" style="1"]
[quote name="-नवल अग्रवाल, पीआरओ, भोपाल रेल मंडल" quote="रेलवे ने माल पैकिंग का ठेका दिया है। बाकी काम रेलवे खुद करता है। दलाली को लेकर अभी तक कोई शिकायत मिली है। अगर कोई शिकायत मिलती है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।" st="quote" style="1"]