पीपुल्स समाचार का खुलासा :दलाल 4 गुना पैसा लेकर 1 दिन में पहुंचा रहे पार्सल, सरकारी सिस्टम से महीनों इंतजार

मनोज चौरसिया, भोपाल। राजधानी में रेलवे का पार्सल विभाग दलालों के सहारे चल रहा है। यहां पर दलालों की अनुमति के बिना किसी भी माल की निकासी मुमकिन नहीं। चुंगी कर चोरी में भी इन दलालों की अहम भूमिका है। पार्सल विभाग में तैनात रेलवे के अधिकारी खुद कोई काम न करके इन्हीं दलालों से मिलने की सलाह देते हैं। यह दलाल ना केवल खुलेआम सामान की लोडिंग अनलोडिंग करते हैं, बल्कि इसके लिए मनचाहा दाम भी वसूलते हैं।
पीपुल्स समाचार ने स्टिंग कर पार्सल विभाग में चल रहे इस फर्जीवाड़े को उजागर किया। पीपुल्स समाचार के रिपोर्टर ने जब रेलवे के एक दलाल से दोपहिया वाहन झांसी भेजने की बात कही तो उसने इसके लिए 4 हजार रुपए की मांग की जबकि रेलवे के नियमानुसार 500 से 600 रुपए लगते हैं। इसके अलावा गाड़ी का पैकिंग 300 से 400 रुपए है। इस हिसाब से कुल 1000 में वाहन जाना चाहिए पर 4 गुना वसूली की जा रही है।
रिपोर्टर और दलाल के बीच हुई बातचीत
- रिपोर्टर : गाड़ी झांसी भेजना है, कितना पैसा लोगे?
- दलाल : चार हजार रुपए का खर्चा आएगा।
- रिपोर्टर : ये तो बहुत ज्यादा है, रेलवे में तो 600 रुपए लगते हैं।
- दलाल : हम गाड़ी की पैकिंग से लेकर लोडिंग और रसीद पूरा पक्का काम करेंगे।
- रिपोर्टर : कोई गड़बड़ी तो नहीं होगी, गारंटी तो है ना ?
- दलाल : इसी बात के तो पैसे ले रहे हैं, पूरी गारंटी ले रहे हैं।
- रिपोर्टर : कितने दिन में पहुंच जाएगी, ऐसा तो नहीं कि कई अटक जाए?
- दलाल : सरकारी सिस्टम से भेजोगे तो कोई गारंटी नहीं, सामान महीनों स्टेशन पर पड़ा रहता है। हम गारंटी लेंगे।
- रिपोर्टर : पैसे कैसे लोगे, रसीद दोगे या नहीं ?
- दलाल : कैश या ऑनलाइन सब चलेगा। रसीद नहीं मिलेगी, भरोसे का काम है।
पार्किंग के पास दलालों का अड्डा
संवाददाता भोपाल स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 6 पर बने पार्सल रेल सेवा के आॅफिस पहुंचा तो यहां पर बनी पार्किंग पर कुछ लोगों का जमावड़ा लगा था। ऑफिस पहुंचने से पहले ही उन्होंने रोक लिया और पूछा भाई क्या भेजना है। ऑफिस के पास ही दलालों का जमावड़ा लगा रहता है पर रेलवे कोई कार्रवाई नहीं करता है।
दलालों की चांदी क्यों?
दरअसल, रेलवे पार्सल सेवा को चलाने के लिए 40 कर्मचारियों का स्टाफ होना चाहिए जो वाहन पैकिंग लोडिंग की व्यवस्था संभालते हैं। हालात ये हैं कि यहां पर मात्र करीब 14 कर्मचारी ही हैं।
सरकारी सिस्टम में गारंटी नहीं
दलाल सिस्टम इसलिए भी प्रभावी है क्योंकि सरकारी सिस्टम से सामान पहुंचाने के बाद गारंटी नहीं होती कि सामान कब पहुंचेगा। वहीं दलाल सामान की पैकिंग से लेकर लोडिंग और उसे सुरक्षित पहुंचाने की गांरटी लेते हैं। सरकारी सिस्टम में कई ऐसे मामले भी आते हैं, जब सामाना किसी दूसरी जगह पहुंच गया।
इलेक्ट्रानिक आइटम की नहीं होती जांच
सबसे बड़ी सुविधा यह है कि सामान की जांच नहीं होती। पार्सल के जरिए बड़ी संख्या में इलेक्ट्रिक आयटम भी भेजे जाते हैं। अभी यह सामान रेलवे द्वारा भेजा जाता है तो कई तरह की जांच और पर्चियां कटती हैं। जबकि दलाल के माध्यम से इन सामान की जांच नहीं होती।
ऐसे परेशान होते हैं लोग
आंकड़े इस प्रकार
- 1200 पार्सल रोज अनलोड होते हैं।
- 600 दो पहिया वाहन हर माह बाहर भेजे जाते हैं।
- 70 शिकायतें हर माह पार्सल देरी से और टूटफूट की आती है।












