भोपाल। राजधानी भोपाल सहित इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जैसे बड़े शहरों में लगातार बिगड़ रहे एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) ने शासन की चिंता बढ़ा दी है। सड़क किनारे कच्चे हिस्से, उखड़ा हुआ रोड सरफेस और वाहनों की आवाजाही से उड़ती धूल वायु प्रदूषण की बड़ी वजह बन रही है। मप्र का हाल भी दिल्ली जैसा न हो इसलिए प्रदेश के चारों शहरों में नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (NCAP) के तहत अलग-अलग स्तर पर एक्शन प्लान तैयार किए गए हैं।
NCAP के तहत कुछ दिन पहले प्रदेश के सभी नगर निगमों की बैठक भोपाल में बुलाई गई थी। इस दौरान सभी से कहा गया था कि धूल को कंट्रोल करने के लिए प्लान बनाएं । इस पर सभी ने प्लान बनाए जिस पर केंद्र सरकार ने राशि जारी की है । भोपाल को इस साल 30 करोड़ रुपए मिले हैं। इसके अलावा जबलपुर में हाल ही में 28 करोड़ रुपए से काम शुरू हुए हैं।
मालूम हो कि 11 नवंबर के बाद भोपाल का AQI 300 पहुंच गया था। अन्य शहरों में यही स्थिति थी। सबसे खराब स्थिति सिंगरौली की रही, जहां ट्रॉमा सेंटर पर AQI 356 दर्ज किया गया, जो प्रदेश में सबसे अधिक था। ग्वालियर में महाराज वाड़ा में 308, डीडी नगर में 309 और सिटी सेंटर में 243 AQI मिला था। इंदौर में अलग-अलग स्थानों पर अलग स्थिति देखने को मिली। छोटी ग्वालटोली में 304 AQI वेरी पुअर रहा, जबकि एयरपोर्ट पर 155, रेसीडेंसी एरिया में 103 और खंडवा रोड के आसपास 155 के आसपास AQI मॉडरेट मिला था।
भोपाल में करीब 1500 किलोमीटर सड़कों का सरफेस खराब होने से धूल की समस्या गंभीर है। नगर निगम ने एनसीएपी फंड के तहत सड़कों के किनारे कच्चे हिस्सों पर पेवर ब्लॉक लगाने, गड्ढे भरने और धूल रोकने की योजना बनाई है। इसके अलावा सेंट्रल और साइड वर्ज पर गार्डनिंग, रात में सड़कों व पेड़ों पर पानी का छिड़काव किया जा रहा है। शहर के फाउंटेन चालू करने का प्रस्ताव भी शामिल है। सोमवार को शहर का एक्यूआई 139 रहा।
वायु प्रदूषण से निपटने के लिए शॉर्ट और लॉन्ग टर्म प्लान पर काम किया जा रहा है। शॉर्ट टर्म प्लान में फॉगर मशीन, डस्ट कलेक्शन, मैकेनिकल स्वीपिंग शामिल है। लॉन्ग टर्म प्लान में वायु प्रदूषण में 87 फीसदी हिस्सेदारी वाले एलिमेंट्स को खत्म करने के लिए सड़Þक का स्ट्रक्चर सुधार व पवर ब्लॉक लगाना शामिल है।
इंदौर शहर में सड़क किनारे पेवर्स ब्लॉक लगाए जा रहे हैं। खजराना चौराहे पर 6 मीटर ऊंचा एक फव्वारा भी लगाया गया है। हाल ही में एक जेट स्प्रे बनाया है। यह सड़कों के फुटपाथ और डिवाइडर के आसपास की धूल को साफ करने का काम करता है। ननि 560 कचरा गाड़ियों के पहिए के पास जेट स्प्रे लगाएगा।
जबलपुर में वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए अब तक 150 करोड़ रुपए से अधिक की राशि मिल चुकी है। इसी साल मिले 28 करोड़ रुपए से कई स्तरों पर काम चल रहा है। मुख्य चौक-चौराहों को धूलरहित बनाने के लिए 4 से 5 करोड़ रुपए की लागत से पेवर ब्लॉक लगाए जा रहे हैं। मालवीय चौराहे पर इसका काम शुरू हो चुका है।
नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम की हालिया रैंकिंग में भोपाल को 200 में से 191 अंक मिले और कोई अवॉर्ड नहीं मिला। वहीं, इंदौर ने पूरे 200 अंक हासिल कर देश में पहला स्थान पाया। जबलपुर इस बार दूसरे स्थान पर रहा था। स्पष्ट है कि जहां जबलपुर और ग्वालियर में जमीनी स्तर पर काम दिख रहा है, वहीं भोपाल में योजनाओं को तेजी से अमल में लाने की चुनौती बनी हुई है। अब देखना होगा कि पेवर ब्लॉक और अन्य उपाय राजधानी की हवा को कितनी राहत दिला पाते हैं।