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Peoples Update Special :छोटे और मध्यम उद्योगों को PQ मीटर लगाने का फरमान, 7 लाख रुपए का 'मीटर बोझ'

मप्र विद्युत नियामक आयोग ने छोटो और मध्यम उद्योगों के लिए पॉवर क्वालिटी (PQ) मीटर लगाने का नियम बनाया है। इसको लेकर औद्योगिक संगठनों ने नाराजगी जताई है। उन्होंने नोटिस वापस लेने की मांग की है।
छोटे और मध्यम उद्योगों को PQ मीटर लगाने का फरमान, 7 लाख रुपए का 'मीटर बोझ'
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    संतोष चौधरी, भोपाल। मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग के नए नियमों के तहत छोटे और मध्यम औद्योगिक क्षेत्रों (एमएसएमआई) में पॉवर क्वालिटी (पीक्यू) मीटर अनिवार्य किए जाने के फैसले ने तूल पकड़ लिया है। उद्यमियों ने कड़ा विरोध करते हुए इसे उद्योगों पर ‘अनावश्यक आर्थिक बोझ’ बताया है। एसोसिएशन ऑफ ऑल इंडस्ट्रीज, मंडीदीप और गोविंदपुरा इंडस्ट्रियल एसोसिएशन ने मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी को पत्र लिखकर इन आदेशों को तत्काल स्थगित करने की मांग की है।

    10 हजार उद्यमियों पर पड़ेगा भार

    दरअसल, मप्र विद्युत नियामक आयोग ने 9 जनवरी 2025 को एक सर्कुलर जारी कर उच्च दाब उपभोक्ता (एचटी कंज्यूमर को) PQ मीटर लगाने के निर्देश दिए थे। फेडरेशन ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री, मप्र के वाइस प्रेसिडेंट सीबी मालपानी का कहना है कि मध्यक्षेत्र कंपनी ने दो माह पहले गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र के 157 एचटी कंज्यूमर को यह मीटर लगाने के लिए नोटिस जारी कर दिए हैं। उन्होंने बताया कि आयोग के इस आदेश से करीब 10 हजार उद्यमियों पर भार पड़ेगा। हमने कंपनी को पत्र भेजकर स्पष्ट किया है कि एक PQ मीटर लगाने की लागत लगभग 7-8 लाख के बीच आएगी। उनके लिए एक साथ इतनी बड़ी राशि खर्च करना कठिन है। 

    पॉवर क्वालिटी मीटर इसलिए जरूरी

    ग्रिड में हार्मोनिक्स और वोल्टेज की अस्थिरता से बिजली की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। इसको सुधारने मीटर अनिवार्य किया गया। इन मीटरों का डेटा डिस्कॉम (बिजली कंपनियों) के सर्वर से जुड़ा होगा, जिससे ग्रिड की गुणवत्ता की निगरानी रीयल-टाइम में की जा सकेगी।

    एचटी कंज्यूमर की ये हैं आपत्तियां

    • उद्यमी यह नहीं समझ पा रहे कि इन मीटरों का वास्तविक लाभ उन्हें मिलेगा या सिर्फ वितरण कंपनी को।
    • नियमों में मीटर लगाने की जिम्मेदारी ‘नामित उपभोक्ता’ की बताई गई है, लेकिन इसकी खरीद और संचालन की लागत कौन वहन करेगा, यह साफ नहीं है।
    • उद्यमियों का आरोप है कि कई महीनों से अनुरोध के बावजूद विभाग ने इस विषय पर कोई बैठक नहीं की। 

    नियम सही तरीके से स्पष्ट करें

    मंडीदीप के उद्योगों को हाल ही में इन मीटरों को अनिवार्य रूप से लगाने के नोटिस मिले हैं। हमारी मांग है कि जब तक विभाग तकनीकी आवश्यकताओं, नियामक मंशा और लागत के लाभों को पारदर्शी तरीके से स्पष्ट नहीं कर देता, इन नोटिसों को वापस लिया जाए।

    विकास मूंदड़ा, प्रेसिडेंट, एसोसिएशन ऑफ ऑल इंडस्ट्रीज, मंडीदीप

    बिना सर्वे किए दे दिए नोटिस

    एक PQ मीटर का खर्च करीब 8 लाख रुपए है। एमएसएमई यह कैसे वहन करेंगे? मीटर खरीदने के लिए बिजली कंपनियों ने सिर्फ दो विदेशी वेंडरों का चयन किया है। कंपनी ने बिना सर्वे किए सभी एचटी कंज्यूमर को नोटिस दे दिए हैं। यह स्पष्ट नहीं है कि जिनके यहां हार्मोनिक्स और वोल्टेज की दिक्कत है, उन्हें ही मीटर लगाने हैं या सभी को। हमने बिजली कंपनी के सीजीएम और नियामक आयोग को पत्र लिखा है।

    योगेश गोयल, सचिव, गोविंदपुरा इंडस्ट्री एसोसिएशन, भोपाल

    जहां वोल्टेज अस्थिर वहां PQ मीटर लगाना जरूरी

    नियामक आयोग के निर्देश हैं कि जिनके यहां हार्मोनल जनरेट या वोल्टेज अस्थिरता होती है, उन्हें PQ मीटर लगाना अनिवार्य है। हमने मध्यक्षेत्र के एचटी कंज्यूमर को यह मीटर लगाने को कहा है। इससे कंज्यूमर के अलावा आसपास के उपभोक्ताओं को गुणवत्ता पूर्ण और निर्बाध बिजली सतत रूप से मिलती रहेगी।

    बीबीएस परिहार, सीजीएम, मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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