नई दिल्ली। लोकसभा में शुक्रवार को भी हंगामे के कारण कार्यवाही बाधित रही। प्रश्नकाल शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने निलंबित सांसदों की वापसी और एलपीजी संकट के मुद्दे को लेकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी।
प्रश्नकाल की शुरुआत होते ही विपक्ष के नेता राहुल गांधी सहित कई विपक्षी सांसदों ने आठ निलंबित सांसदों की बहाली की मांग उठाई। इस दौरान विपक्षी सांसद नारेबाजी करते हुए वेल में आ गए और सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराया।
हंगामे के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि सांसद सदन की मेजों पर चढ़ेंगे और नियमों का उल्लंघन करेंगे तो कार्रवाई होना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि संसद की गरिमा बनाए रखना सभी सदस्यों की जिम्मेदारी है।
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लगातार शोर-शराबे के कारण लोकसभा की कार्यवाही पहले दोपहर 12 बजे तक स्थगित की गई। इसके बाद जब सदन की बैठक दोबारा शुरू हुई तो हंगामा जारी रहा, जिसके चलते दूसरी बार कार्यवाही को दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
गुरुवार को सरकार ने सदन में विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा था कि देश में पेट्रोलियम उत्पादों की कोई कमी नहीं है। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने साफ कहा कि देश में पेट्रोल, डीजल, केरोसीन और एविएशन टर्बाइन फ्यूल की पर्याप्त उपलब्धता है।जिससे देश के किसी भी इलाके में कोई परेशानी नहीं है।
लोकसभा में जारी गतिरोध के बीच कांग्रेस सांसद तारीक अनवर ने सरकार पर विपक्ष की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अगर संसद को सुचारु रूप से चलाना है तो सरकार को विपक्ष की बात सुननी होगी और उसे विश्वास में लेना होगा।
इतना ही नहीं तारिक आगे कहते हैं कि लोकतंत्र में सरकार और विपक्ष दोनों की जिम्मेदारी होती है कि सदन को सही तरीके से चलाया जाए। लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि मौजूदा स्थिति में सरकार विपक्ष को विश्वास में लेने के लिए तैयार नहीं दिख रही है। उनका कहना था कि जब तक सरकार विपक्ष के साथ संवाद नहीं बढ़ाएगी, तब तक संसद में टकराव की स्थिति बनी रह सकती है।
अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को लेकर कांग्रेस नेता शिश थरूर ने भी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष का असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव कई देशों और पूरी दुनिया पर पड़ रहा है।
थरूर ने कहा कि इस युद्ध के कारण ऊर्जा आपूर्ति और गैस की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी। उन्होंने यह भी कहा कि खाड़ी देशों में रहने वाले लगभग 90 लाख भारतीयों की सुरक्षा और भलाई पर भी इस स्थिति का असर पड़ सकता है।