प्रवीण श्रीवास्तव, भोपाल। गोवा से लौटे शहर के एक 24 वर्षीय युवक की अचानक तबीयत बिगड़ने लगी। युवक पिछले कुछ दिनों से तेज बेचैनी, घबराहट और शारीरिक कमजोरी से परेशान हो गया। इसके साथ ही युवक चिड़चिढ़ा होने के साथ ही हिंसक भी हो गया। बार-बार गोवा जाने की जिद करने लगा और जब परिजनों ने मना किया तो उनके साथ भी मारपीट करने की कोशिश की। परेशान माता-पिता ने डॉक्टर से बात की तो उन्होंने मनोचिकित्सक के पास जाने की सलाह दी।
युवक जब मनोचिकित्सक के पास पहुंचा तो, तब उसने खुलासा किया कि गोवा में एक ड्रग का सेवन किया था। वहां उसे जॉम्बी ड्रग का नाम बताया। उसने बताया कि वह इसे इंजेक्शन से लेता था। शहर लौटने के बाद जब उसे यह नशा नहीं मिला, तो उसकी हालत बिगड़ने लगी। करीब दो महीने के इलाज और काउंसिलिंग के बाद युवक की स्थिती पहले से बेहतर है। यह अकेला मामला नहीं बल्कि इस तरह के और भी मामले सामने आ चुके हैं। इन मामलों को देख स्वास्थ्य विशेषज्ञ चिंता में हैं कि यह खतरनाक ड्रग अब शहर में भी दस्तक दे रहा है।
जॉम्बी ड्रग कोई आधिकारिक नाम नहीं, बल्कि एक खतरनाक नशे के लिए इस्तेमाल होने वाला आम शब्द है। इस ड्रग में जाइलेजीन नामक केमिकल को किसी अन्य ड्रग के साथ लिया जाता है। जाइलेजीन का उपयोग आमतौर पर जानवरों को ट्रंकुलाइज करने के लिए किया जाता है। इसके सेवन से व्यक्ति घंटों एक ही जगह स्थिर हो जाता है। यह ड्रग शरीर और दिमाग को इस कदर धीमा कर देता है कि व्यक्ति की प्रतिक्रिया क्षमता लगभग खत्म हो जाती है।
मनोचिकित्सक डॉ. मोनिका वर्मा बताती हैं कि देश में इस तरह के बहुत कम मामले है। विदेशों में इसके इस्तेमाल की खबरे आती हैं। इसे इसे इंजेक्शन, पाउडर या लिक्विड रूप में लिया जा सकता है। कई मामलों में इसे अन्य नशे जैसे फेंटानिल या हेरोइन के साथ मिलाकर लिया जाता है, ताकि इसका असर ज्यादा समय तक और तेज बना रहे।
उन्होंने बताया कि यह ड्रग सीधे केंद्रीय तंत्रिका तंत्र पर असर डालता है। ब्रेन के न्यूरोट्रांसमीटर जैसे नोरएपिनेफ्रिन, सिरोटोटिन और डोपामिन को अनियंत्रित कर देता है। इससे दिमाग की गतिविधियां धीमी हो जाती हैं, व्यक्ति सुस्त और भ्रमित हो जाता है। व्यक्ति अर्ध-बेहोशी या बेहोशी की स्थिति में चला जाता है।लंबे समय तक उपयोग से याददाश्त कमजोर हो जाती है और सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित होती है।
पशु रोग विशेषज्ञ डॉ. आस्तिक वर्मा बताते हैं कि जाइलेजिन मूल रूप से पशुओं को बेहोश करने (ट्रंकुलाइज) के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसका उपयोग शेर, बाघ, घोड़े, गाय जैसे बड़े जानवरों के इलाज या सर्जरी के दौरान किया जाता है। इंसानों के लिए यह दवा सुरक्षित नहीं मानी जाती।
अभी भोपाल में सीधे तौर पर इस तरह के मामले नहीं आए, लेकिन इस मामले में युवक ने गोवा में जो ड्रग लिया था वह जॉम्बी ड्रग हो सकता है। हमारे पास वह इसके साइड इफेक्ट जैसे व्यवहार में बदलाव और एंजायटी के कारण आया था। उसने बताया कि उसने दोस्तों के साथ यह ड्रग लिया था।
डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी, वरिष्ठ मनोचिकित्सक, भोपाल