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केरल की स्कूली किताबों में नारियल घिसते व नाश्ता बनाते नजर आएंगे अब ‘पिताजी’

सरकार ने स्कूली पाठ्यपुस्तकों में लैंगिक तटस्थता अवधारणा पेश की
केरल की स्कूली किताबों में नारियल घिसते व नाश्ता बनाते नजर आएंगे अब ‘पिताजी’

तिरुवनंतपुरम। पितृसत्तात्मक समाज में एक पिता का रसोई में नारियल घिसने और अपनी बेटी के लिए नाश्ता बनाने की बात सुनने में थोड़ा अजीब लग सकती है, लेकिन अगर यह संदेश स्कूल की पाठ्यपुस्तकों में हो तो क्या कहेंगे? केरल में यही हुआ है, जहां राज्य सरकार ने लैंगिक तटस्थ संदेशों वाली नवीन पाठ्यपुस्तकें पेश की हैं। इसका उद्देश्य बच्चों के मन में लैंगिक तटस्थता का भाव जागृत करना है। जैसे ही राज्य में स्कूल दो महीने की गर्मी की छुट्टियों के बाद सोमवार को फिर से खुले, खाना पकाने और रसोई के अन्य कामों में शामिल लैंगिक विभेद से परे परिवार के सदस्यों के सचित्र प्रतिनिधित्व वाली पाठ्यपुस्तकें व्यापक तौर पर लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं।

राज्य के सामान्य शिक्षा मंत्री वी शिवनकुट्टी द्वारा पिछले दिनों उनके फेसबुक पोस्ट में ऐसी पाठ्यपुस्तकों में से एक पेज साझा करने के बाद नवोन्मेषी पाठ्यपुस्तकों ने व्यापक ध्यान आकर्षित किया। मंत्री ने कक्षा तीन की मलयालम माध्यम की पाठ्यपुस्तक का पेज साझा किया, जिसमें एक पिता फर्श पर बैठे नारियल घिस रहे हैं, जबकि मां व्यंजन बनाती दिख रही हैं। अंग्रेजी की किताब में पिता को बेटी के लिए नाश्ता बनाते देखा जा सकता है। शिक्षकों और छात्रों ने पाठ्यपुस्तकों में शामिल लैंगिक समानता अवधारणा का तहे दिल से स्वागत किया।

People's Reporter
By People's Reporter

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