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नीम करोली बाबा का अस्थि कलश 53 साल से भोपाल में रखा

हनुमानजी के भक्त और चमत्कारी संत बाबा नीम करोली के अस्थि कलाश मप्र की राजधानी भोपाल में सुरक्षित रखा है। बाबा के पौत्र डॉ. धनंजय शर्मा ने पीपुल्स समाचार को बताया कि बाबा के अस्थि कलश को भोपाल में बनने वाले आश्रम में रखा जाएगा।
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नीम करोली बाबा का अस्थि कलश 53 साल से भोपाल में रखा
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AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    राजीव सोनी

    भोपाल। हनुमानजी के अनन्य भक्त और चमत्कारी संत नीम करोली बाबा का अस्थि कलश आज भी भोपाल में सुरक्षित रखा है। उनके बड़े पुत्र अनेग सिंह (अब दिवंगत) का परिवार भोपाल में रहता है। वृंदावन में अनंत चतुर्दशी 11 सितंबर 1973 को बाबा ने शरीर छोड़ा था। उनकी अस्थियां देश की 11 पवित्र नदियों में प्रवाहित की गईं। लेकिन अस्थियों का एक कलश उनके बड़े बेटे अपने साथ भोपाल ले आए थे। 53 साल से यह कलश उनका परिवार संभाल कर रखे हुए है। भोपाल में बनने वाले भव्य आश्रम में इसे रखा जाएगा।

    बाबा के पौत्र डॉ. धनंजय शर्मा ने 'पीपुल्स समाचार' से हुई विशेष चर्चा में यह रहस्योद्घाटन किया। डॉ. शर्मा ने बताया कि बाबा को हम सभी उनके भक्त हनुमानजी के अवतार के रूप में पूजते हैं। इतने वर्षों बाद भी इसलिए यह कलश हम लोग सुरक्षित रखे हुए हैं। भोपाल के आस-पास हम लोग नीम करोली बाबा का बड़ा मंदिर बनवाने की योजना है। अभी जमीन की तलाश चल रही है, यह कलश वहीं रखा जाएगा। बाबा की समाधि वृंदावन में है।

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    पौत्र धनंजय शर्मा

    ये भी पढ़ें: नीम करोली बाबा का भोपाल कनेक्शन : शहर में रहता है परिवार, पूर्व राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा के आग्रह पर ठहरे थे 10 दिन

    बाबा ने दी थी हनुमानजी की मूर्ति...

    डॉ. शर्मा बताते हैं बाबा से जुड़ी मेरी ढेरों यादें बाबा के साथ जुड़ी है। बाबा ने उन्हें हनुमानजी की एक मूर्ति भी दी थी जो आज भी उनके पास है। उनकी रोज पूजा करते हैं। भारत के साथ पूरी दुनिया में बाबा के लाखों भक्त मौजूद हैं। लेकिन भोपाल से बाबा का विशेष लगाव रहा, 1969-70 में अरेरा कालोनी में उनके नवनिर्मित मकान में बाबा आए थे। तब वह 10 दिन रुके थे। भोपाल के ग्यारह सौ क्वाटर्स क्षेत्र में वह घूमते थे और नेवरी स्थित मंदिर उन्होंने रात्रि विश्राम के लिए चुना था। उज्जैन में लगने वाले सिंहस्थ महाकुंभ में हर बार आते थे। भोपाल में पूर्व राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा और संत बर्फानी दादा सहित बड़ी संख्या में उनके भक्त लगातार संपर्क में रहे।

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    डॉ. धनंजय शर्मा ने बताया...हर क्षण याद करता हूं, देवरहा बाबा ने यह कहा था बाबा के बारे में

    सवाल : बाबा से जुड़ी यादें जो आपके जेहन में हों, कोई खास मेमोरी है क्या?
    जवाब : अपने घर में बाबा की तस्वीरें-मूर्तियां और पूजा का कमरा दिखाते हुए-हम उन्हें हर क्षण याद रखते हैं। हम उन्हें अपने आस पास महसूस करते हैं। बचपन में उनकी गोदी में खेला हूं, कंधे पर चढ़ा। उन्होंने जब प्राण छोड़े तब देश के प्रसिद्ध संत 'देवराहा बाबा ने कहा था- ऐसे संत शरीर त्यागने के बाद भी मानवता की सेवा में बने रहते हैं। उनमें असीम शक्तियां थीं।'
    सवाल : बाबा नीम करोली का अस्थि कलश अभी तक सुरक्षित रखने की कोई विशेष वजह?
    जबाव : देखिए, हमारे लिए वह हनुमानजी के अवतार हैं। इसलिए अस्थि कलश से जुड़ी धारणा मायने नहीं रखती। 53 साल से वह कलश हमारे साथ है।
    सवाल : इस कलश को लेकर भविष्य की क्या प्लानिंग है?
    जवाब : भोपाल के आस-पास 5-7 एकड़ जमीन देख रहा हूं। वहां बाबा का मंदिर और भव्य आश्रम बनाने का संकल्प है। वहीं यह कलश रखा जाएगा।
    सवाल : बाबा के परिवार में कितने सदस्य थे, अब कौन कहां रहते है?
    जवाब : बाबा के पुत्र अर्थात मेरे पिता दो भाई थे, दोनों दिवंगत हो चुके हैं। चार साल पहले 97 वर्ष की उम्र में पिता का निधन हुआ। उनकी एक बहन हैं जो आगरा में रहती हैं।
    सवाल : बाबा का अस्थि कलश आपके अलावा देश में कहीं और भी है क्या?
    जवाब : बिल्कुल नहीं, यह तो हमारा पर्सनल असेट है और कहीं हो ही नहीं सकता।

    Garima Vishwakarma
    By Garima Vishwakarma

    गरिमा विश्वकर्मा | People’s Institute of Media Studies से B.Sc. Electronic Media की डिग्री | पत्रकार...Read More

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