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मणिपुर में नेशनल हाइवे 5 दिन से बंद!राज्यभर में ईंधन का सूखा, खाने का राशन भी खत्म, क्यों बनी ऐसी स्थिति

इलाके में मोबाइल नेटवर्क बेहद कमजोर होने के कारण कई लोग अपने परिवारों से संपर्क तक नहीं कर पा रहे हैं। सबसे बड़ी परेशानी खाने-पीने की है। फंसे लोगों के पास राशन लगभग खत्म हो चुका है और स्थानीय बाजारों में सामान ऊंचे दामों पर मिल रहा है।
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राज्यभर में ईंधन का सूखा, खाने का राशन भी खत्म, क्यों बनी ऐसी स्थिति

मणिपुर में हालात एक बार फिर तनावपूर्ण हो गए हैं। राज्य की लाइफलाइन माने जाने वाले नेशनल हाईवे-2 पर पिछले पांच दिनों से आवाजाही पूरी तरह ठप पड़ी है। कुकी संगठनों ने प्रधानमंत्री को सौंपे गए मांग पत्र पर कार्रवाई न होने और अगवा किए गए लोगों को छुड़ाने में सरकार की विफलता के विरोध में बंद बुलाया है।

इस बंद का असर अब आम लोगों की जिंदगी पर साफ दिखाई देने लगा है। सेनापति जिले के खोंग्नेम से टी. खुल्लेन तक एक हजार से ज्यादा ट्रक, बसें और दूसरे वाहन फंसे हुए हैं। सोमवार को कुकी इन्पी संगठन ने बंद की अवधि 48 घंटे और बढ़ा दी।

हाईवे पर फंसे ट्रक ड्राइवर्स, खाने-पीने का संकट

बंद की वजह से ट्रक ड्राइवर, खलासी और यात्री कई दिनों से सड़कों पर फंसे हैं। लोग अपने वाहनों के पास ही खुले आसमान के नीचे रात गुजारने को मजबूर हैं। इलाके में मोबाइल नेटवर्क बेहद कमजोर होने के कारण कई लोग अपने परिवारों से संपर्क तक नहीं कर पा रहे हैं। सबसे बड़ी परेशानी खाने-पीने की है। फंसे लोगों के पास राशन लगभग खत्म हो चुका है और स्थानीय बाजारों में सामान ऊंचे दामों पर मिल रहा है। प्रशासन की ओर से राहत सामग्री पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंच पाई है, जिससे कई लोगों के सामने भूखे रहने की नौबत आ गई है।

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पेट्रोल पंपों पर ईंधन संकट

हाईवे बंद होने का असर अब राज्य की सप्लाई चेन पर भी दिखने लगा है। सैकड़ों पेट्रोल और एलपीजी टैंकर रास्ते में फंसे हुए हैं, जिसके कारण कई पेट्रोल पंपों पर ईंधन खत्म हो गया है।

हालांकि मालोम तेल डिपो में स्टॉक मौजूद है, लेकिन टैंकरों की कमी और ट्रांसपोर्टरों के विरोध के चलते सप्लाई आगे नहीं बढ़ पा रही। इससे आम लोगों के साथ जरूरी सेवाओं पर भी असर पड़ने लगा है।

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क्या है पूरा मामला?

राज्य में नागा और कुकी समुदायों के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। हाल ही में हथियारबंद समूहों द्वारा दोनों समुदायों के 38 लोगों के अपहरण के बाद स्थिति और खराब हो गई। अब तक 31 लोगों को रिहा किया जा चुका है, जिनमें 14 नगा और 16 कुकी शामिल हैं। हालांकि कुछ लोग अभी भी बंधक बताए जा रहे हैं। कुकी इनपी मणिपुर का दावा है कि उनके समुदाय के 14 सदस्य अब भी नगा गुटों की कैद में हैं।

चर्च संगठन शांति बहाली में जुटे

स्थिति को संभालने के लिए चर्च संगठनों ने पहल शुरू की है। काउंसिल फॉर बैपटिस्ट चर्चेस इन नॉर्थ ईस्ट इंडिया और मणिपुर बैपटिस्ट कन्वेंशन के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री एन बिरेन सिंह से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि चर्च की टीमें कांगपोकपी और सेनापति जिलों का दौरा कर दोनों समुदायों के बीच शांति बहाल करने की कोशिश करेंगी।

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बंधकों की तलाश में सर्च ऑपरेशन जारी

सुरक्षा बलों ने कांगपोकपी जिले के पहाड़ी इलाकों में बड़े स्तर पर तलाशी अभियान शुरू किया है। जिन लोगों को हथियारबंद समूहों ने बंधक बनाया है, उन्हें छुड़ाने के लिए लगातार ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं। फिलहाल मणिपुर में हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं और हाईवे बंद रहने से संकट लगातार गहराता जा रहा है।

Aakash Waghmare
By Aakash Waghmare

आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...Read More

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