भोजशाला में बदला नजारा!HC के आदेश के बाद वाग्देवी मंदिर में पूजा शुरू, दर्शन के लिए लगी कतारें

धार। मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। यह मामला धार्मिक और ऐतिहासिक दावों से जुड़ा हुआ था, जिसमें हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्ष अपने-अपने अधिकार का दावा कर रहे थे।
अब इस मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर यह स्थान मूल रूप से मां सरस्वती (वाग्देवी) को समर्पित एक प्राचीन मंदिर है। फैसले के बाद इलाके में माहौल पूरी तरह बदल गया है और प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी है।
पूजा-अर्चना फिर से शुरू
फैसले के अगले दिन यानी आज से भोजशाला परिसर में पूजा-अर्चना शुरू कर दी गई। सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ वहां पहुंचने लगी। लोग मां सरस्वती के दर्शन और पूजा के लिए कतारों में नजर आए। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा बल तैनात किए, भीड़ नियंत्रण की व्यवस्था की और परिसर के आसपास निगरानी बढ़ा दी। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और शांति बनाए रखना प्राथमिकता है।
हाईकोर्ट का बड़ा फैसला क्या कहता है?
हाईकोर्ट ने अपने विस्तृत 242 पन्नों के फैसले में कई अहम बातें कही हैं- भोजशाला परिसर को धार्मिक रूप से मां सरस्वती का मंदिर माना गया है। यह स्थान प्राचीन समय में संस्कृत शिक्षा और ज्ञान केंद्र रहा है। परमार वंश के राजा भोज से इसका ऐतिहासिक संबंध बताया गया है। पुरातात्विक और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस स्थान पर हिंदू परंपरा पूरी तरह कभी खत्म नहीं हुई थी, यानी किसी न किसी रूप में पूजा की परंपरा जारी रही।
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ASI का पुराना आदेश रद्द
इस मामले में एक बड़ा बदलाव यह भी हुआ कि कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के 7 अप्रैल 2003 वाले आदेश को रद्द कर दिया। उस आदेश के तहत मुस्लिम समुदाय को हर शुक्रवार नमाज पढ़ने की अनुमति दी गई थी। लेकिन अब हाईकोर्ट ने इस व्यवस्था को समाप्त कर दिया है।
मुस्लिम पक्ष को क्या विकल्प दिया गया?
कोर्ट ने साफ कहा कि अब उस परिसर में नमाज की अनुमति नहीं होगी। परिसर का धार्मिक स्वरूप मंदिर के रूप में माना जाएगा। फैसले में कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को एक वैकल्पिक सुझाव भी दिया है। कोर्ट ने कहा कि यदि मुस्लिम समुदाय चाहें तो वे मस्जिद निर्माण के लिए राज्य सरकार से अलग जमीन की मांग कर सकते हैं। इसके लिए वे कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत आवेदन कर सकते हैं।
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फैसले के बाद क्या हुआ धार में?
जैसे ही कोर्ट का फैसला सामने आया, धार शहर का माहौल बदल गया। हिंदू पक्ष में खुशी और जश्न फैसले के बाद हिंदू समुदाय में खुशी की लहर दौड़ गई। भोज उत्सव समिति के उपाध्यक्ष सुमित चौधरी ने कहा कि यह फैसला उनके लिए ऐतिहासिक है और दशकों पुराना संघर्ष अब खत्म हुआ है।
मुस्लिम पक्ष की प्रतिक्रिया
इस फैसले से मुस्लिम पक्ष संतुष्ट नहीं है। उन्होंने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की बात कही है। धार शहर काजी वकार सादिक ने कहा कि यह फैसला उनके लिए अप्रत्याशित है और उन्हें उम्मीद थी कि निर्णय उनके पक्ष में आएगा।











