विद्युत लोकपाल नियुक्ति के नए नियमों पर विवाद:अब वकील नहीं कर सकेंगे आवेदन, एडवोकेट्स बोले- असंवैधानिक फैसला

संतोष चौधरी, भोपाल। मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग विद्युत लोकपाल की नियुक्ति के लिए योग्यता मापदंडों में बड़ा बदलाव करने जा रहा है। प्रस्तावित संशोधन लागू होने के बाद अब वकील, विधिक विशेषज्ञ और निजी क्षेत्र के विशेषज्ञ विद्युत लोकपाल के पद के लिए आवेदन नहीं कर सकेंगे। आयोग के इस फैसले को लेकर कानूनी गलियारों में विरोध तेज हो गया है। अधिवक्ताओं और विधिक विशेषज्ञों ने इसे स्वतंत्र और निष्पक्ष लोकपाल व्यवस्था के खिलाफ बताते हुए असंवैधानिक करार दिया है।
द्वितीय संशोधन का ड्राफ्ट जारी
मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने उपभोक्ताओं की शिकायतों के निवारण के लिए फोरम और विद्युत लोकपाल की स्थापना विनियम, 2021 में द्वितीय संशोधन का ड्राफ्ट जारी किया है। आयोग ने इस पर दावे-आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए हैं। इस संबंध में 16 जून को जनसुनवाई आयोजित की जाएगी जिसके बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
लोकपाल के चयन का दायरा होगा सीमित
प्रस्तावित संशोधन के बाद विद्युत लोकपाल पद के लिए पात्रता का दायरा काफी सीमित हो जाएगा। नए नियमों के मुताबिक अब केवल जिला न्यायाधीश, विद्युत क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारी, प्रशासनिक या प्रबंधकीय स्तर के अधिकारी, राज्य या केंद्र सरकार के ऊर्जा विभाग से जुड़े अधिकारी और उपभोक्ता फोरम के वरिष्ठ अधिकारी ही इस पद के लिए पात्र होंगे। यानी अधिवक्ता विधिक विशेषज्ञ और निजी क्षेत्र से जुड़े अनुभवी लोग इस पद के लिए आवेदन नहीं कर पाएंगे। जानकारों का कहना है कि संशोधन का सबसे विवादित पहलू यही है कि इसके लागू होने के बाद कोई भी वकील या कानूनविद विद्युत लोकपाल नहीं बन सकेगा।
पहले क्या थे नियम?
वर्तमान नियमों के तहत विद्युत लोकपाल का चयन ऐसे योग्य व्यक्तियों में से किया जाता है जिन्हें विधिक मामलों, इंजीनियरिंग, उद्योग, वित्त, प्रशासन, प्रबंधन सेवाओं और उपभोक्ता मामलों का व्यापक अनुभव और गहरी समझ हो। गौरतलब है कि विद्युत लोकपाल प्रदेश में बिजली कंपनियों के अंतर्गत संचालित तीनों उपभोक्ता फोरम के फैसलों पर अपीलीय प्राधिकरण के रूप में काम करता है। ऐसे में इस पद पर विधिक विशेषज्ञों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती रही है।
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एडवोकेट्स ने उठाए सवाल
टीकमगढ़ के एडवोकेट निर्मल लोहिया ने आयोग के प्रस्तावित संशोधन पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह कदम स्वतंत्र और निष्पक्ष लोकपाल के चयन में बड़ी बाधा पैदा करेगा। उन्होंने कहा आयोग का यह कदम पूरी तरह असंवैधानिक और एकतरफा है। यह न्याय व्यवस्था की मूल भावना के खिलाफ है। हम जनसुनवाई में अपनी आपत्ति दर्ज कराएंगे।
वहीं जबलपुर के एडवोकेट राजेंद्र अग्रवाल ने कहा कि लोकपाल जैसे अपीलीय पद से विधिक पृष्ठभूमि के लोगों को बाहर करना उपभोक्ताओं के हितों से समझौता करने जैसा है। उन्होंने कहा असल में वकीलों को इसलिए बाहर किया जा रहा है क्योंकि उनकी राय निष्पक्ष होती है और वे किसी दबाव में काम नहीं करते। ऐसे में सरकार मनमाने फैसले नहीं करा सकती।
जनसुनवाई पर टिकी नजरें
अब इस पूरे मामले में सभी की नजरें 16 जून को होने वाली जनसुनवाई पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि कानूनी समुदाय की ओर से आयोग के सामने कड़ा विरोध दर्ज कराया जाएगा। वहीं उपभोक्ता अधिकारों से जुड़े संगठनों की भी इस मसले पर सक्रियता बढ़ सकती है।












