Naresh Bhagoria
27 Jan 2026
Garima Vishwakarma
27 Jan 2026
भोपाल। अगर आपके बच्चे घंटों झुकी गर्दन के साथ मोबाइल या लैपटॉप में डूबे रहते हैं, तो सावधान हो जाएं। यह आदत धीरे-धीरे रीढ़ की हड्डी को टेढ़ा कर रही है। पांच साल पहले तक इक्का दुक्का मामले सामने आते थे, लेकिन अब यह बीमारी बढ़ती जा रही है। पहले यह समस्या बुजुर्गों में ऑस्टियोपोरोसिस के कारण दिखती थी, लेकिन अब 14 साल के नीचे के बच्चों में भी दिख रही है।
इसमें रीढ़ ही हड्डी का ऊपरी भाग झुक जाता है, जिसे हाइपरकाइफोसिस या कुबड़ापन कहते हैं। समस्या इतनी बढ़ रही है कि विधानसभा सत्र के दौरान इनके ज्यादा उपयोग पर रोक लगाने और सरकार से नियम बनाने की मांग की गई। जबलपुर के भाजपा विधायक डॉ. पीयुष पांडे ने सरकार को चेताया कि, अगर इस पर अभी नियम नहीं बनाया तो 10 साल में यह बीमारी महामारी का रूप ले लेगी।
फिजियोथैरेपिस्ट (स्पाइन एक्सपर्ट) डॉ. सुनील पांडे का कहना है कि, लंबे समय तक गर्दन झुकाकर स्क्रीन देखने से रीढ़ की ऊपरी हड्डियों पर लगातार दबाव पड़ता है। पहले जहां ऐसी समस्याएं बुजुर्गों में आम थीं, वहीं अब युवा के साथ किशोर भी इसकी चपेट में आने लगे हैं। पहले इक्का दुक्का माला ही मिलता था, लेकिन अब हर महीने आठ से दस मामले ऐसे आते हैं। इसमें से एक या दो मामले सीवियर होते हैं।
भाजपा विधायक डॉ. पीयुष पांडे बोले- 14 साल के कम उम्र के बच्चे मोबाइल और इंटरनेट की लत के कारण ब्रेन इफेक्ट हो रहा है। इसका असर आंखों पर भी होता है। 10 से 12 साल के बच्चों को चश्मा लग रहा है। रीढ़ की हड्डी प्रभावित हो रही है। मैंने सरकार से आग्रह किया है कि, इस पर सरकार को कठोर नियम बनाते हुए मोबाइल के ज्यादा उपयोग पर बैन लगाना चाहिए।
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डॉ. पांडे ने बताया कि, अगर आज की पीई पीढ़ी ने पॉश्चर पर ध्यान नहीं दिया तो आने वाले समय में समाज में सीधी रीढ़ वाला व्यक्ति दुर्लभ हो जाएगा।
फिजियोथैरेपिस्ट डॉ. तपस्या तोमर ने बताया कि, फिजियोथैरेपी समय रहते शुरू की जाए तो सुधार संभव है। पॉश्चर करेक्शन एक्सरसाइज को और बैंक स्ट्रेंथनिंग इलेक्ट्रोथैरेपी (लेजर, टेकार, एठर, डीकम्प्रेशन आदि) बच्चों और किशोरों में गंभीर मामलों में स्पाइनल फ्यूजन सर्जरी की जाती है। ऑनलाइन क्लास, गेमिंग, ओटीटी और सोशल मीडिया के लगातार उपयोग ने बच्चों और युवाओं की रीढ़ पर सीधा असर डाला है। लंबे समय तक गर्दन झुकाकर स्क्रीन देखना रीढ़ को आगे की ओर धकेल देता है। खराब पॉश्चर से मांसपेशियां कमजोर होती हैं और रीढ़ का प्राकृतिक आकार बिगड़ जाता है।
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