मिडिल ईस्ट में लंबे समय से चल रहे तनाव के बीच अब स्थायी शांति की उम्मीद जगी है। अमेरिका और ईरान दो हफ्ते के युद्धविराम (सीजफायर) पर सहमत हो गए हैं। दोनों देशों ने इसकी आधिकारिक घोषणा भी कर दी है।
यह फैसला उस समय हुआ जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को दी गई सख्त डेडलाइन खत्म होने में लगभग एक घंटा ही बाकी था। इस समझौते के तहत ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर भी सहमति जताई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार सामान्य होने की उम्मीद है।
करीब एक महीने से अधिक समय तक अमेरिका और इज़राइल की ओर से ईरान पर तेज हमले किए गए। इन हमलों के बाद ईरान ने संकेत दिया कि वह तनाव कम करने और समाधान निकालने के लिए अमेरिका के साथ बातचीत के लिए तैयार है। दोनों देशों के बीच यह बातचीत पाकिस्तान में शुक्रवार से शुरू होने की संभावना है, जिसका उद्देश्य इस संघर्ष को खत्म करने का रास्ता तलाशना है।
इस सीजफायर समझौते में पाकिस्तान ने अहम भूमिका निभाई है। पाकिस्तान ने ही अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम का प्रस्ताव रखा था। इसी प्रस्ताव के आधार पर दोनों देशों के बीच अस्थायी शांति का रास्ता निकला।
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अमेरिकी अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, तीन ईरानी अधिकारियों ने बताया कि चीन के हस्तक्षेप के बाद ही ईरान इस प्रस्ताव पर राजी हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक चीन, जो ईरान का महत्वपूर्ण सहयोगी है, उसने तेहरान को तनाव कम करने और लचीलापन दिखाने की सलाह दी।
लगातार हमलों से ईरान के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंच रहा था और आर्थिक संकट गहराने का खतरा बढ़ रहा था। इसी वजह से ईरान ने आखिरकार पाकिस्तान के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया।
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बताया जा रहा है कि इस युद्धविराम को ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने मंजूरी दी है। उनकी स्वीकृति के बाद ही ईरान ने आधिकारिक तौर पर इस समझौते को स्वीकार किया।
अब अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में बातचीत होने वाली है। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने कहा है कि वह 10 अप्रैल से अमेरिका के साथ वार्ता शुरू करेगा।
हालांकि, परिषद ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह बातचीत युद्ध के पूरी तरह खत्म होने का संकेत नहीं है। यह केवल तनाव कम करने और स्थायी समाधान की दिशा में पहला कदम माना जा रहा है।