अमेरिका, इज़रायल और ईरान के बीच हुए युद्धविराम (सीजफायर) पर भारत की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है। भारत के विदेश मंत्रालय MEA ने इस समझौते का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि इससे पश्चिम एशिया में स्थायी शांति का रास्ता खुलेगा।
मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि भारत युद्धविराम का स्वागत करता है और उम्मीद करता है कि इससे क्षेत्र में तनाव कम होगा और स्थिरता कायम होगी।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत पहले भी लगातार यह कहता रहा है कि इस तरह के संघर्ष को खत्म करने के लिए तनाव कम करना, बातचीत और कूटनीति बेहद जरूरी है।
भारत ने अपने बयान में यह भी कहा कि इस संघर्ष के कारण लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ी है। इसके साथ ही वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार नेटवर्क भी प्रभावित हुए हैं। भारत ने उम्मीद जताई है कि अब होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते समुद्री आवाजाही सामान्य होगी और वैश्विक व्यापार बिना रुकावट के जारी रह सकेगा।
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सीजफायर के बाद करीब एक महीने से अधिक समय से मिडिल ईस्ट में चल रही जंग फिलहाल थम गई है। इस बीच ईरान ने इस पूरे घटनाक्रम को ऐतिहासिक जीत बताया है। तेहरान का दावा है कि जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने हमलों को आगे बढ़ाने की धमकी से पीछे हटते हुए दो हफ्ते के सीजफायर पर सहमति जताई, तब यह ईरान की कूटनीतिक सफलता साबित हुई।
ईरान ने अपनी ओर से एक 10 सूत्रीय प्रस्ताव भी पेश किया है। तेहरान का कहना है कि अमेरिका ने इस प्रस्ताव को सैद्धांतिक रूप से स्वीकार कर लिया है।
सीजफायर के ऐलान के बाद ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया पर कहा कि अगर ईरान पर हमले बंद हो जाते हैं, तो तेहरान भी अपने रक्षा अभियान को रोक देगा। उन्होंने संकेत दिया कि ईरान फिलहाल तनाव कम करने के लिए तैयार है, लेकिन अगर उस पर फिर से हमला होता है तो वह जवाब देने के लिए भी तैयार रहेगा।