इंदौर — एमबीए छात्रा हत्याकांड में पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद पुलिस मुख्य आरोपी पीयूष के खिलाफ मजबूत साक्ष्य जुटाकर मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाने की तैयारी कर रही है, ताकि आरोपी को जल्द से जल्द कड़ी सजा दिलाई जा सके। पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने हत्या की बर्बरता को उजागर किया है, हालांकि दुष्कर्म हुआ या नहीं, इसका अंतिम खुलासा अब डीएनए जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा।
रिपोर्ट में सामने आया है कि युवती के शरीर पर गंभीर चोटों के निशान पाए गए, जिनमें हार्ट और फेफड़ों के आसपास घातक वार शामिल हैं। डॉक्टरों के मुताबिक शरीर पर ऐसे संकेत मिले हैं कि आरोपी ने कम से कम चार घातक वार किए, जो जानलेवा साबित हुए। इसके अलावा छात्रा के हाथ और पैर बांधे जाने के स्पष्ट निशान भी शरीर पर मिले हैं, जिसकी पुष्टि मेडिकल जांच में हो चुकी है। गला दबाने के निशान भी पाए गए हैं, जिससे हत्या से पहले संघर्ष और प्रताड़ना की आशंका मजबूत हो गई है।
जांच अधिकारियों के अनुसार आरोपी पीयूष ने अपने कथित कबूलनामे में दावा किया था कि उसने युवती के हाथ-पैर बांधने के बाद उसके साथ दुष्कर्म किया था। हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हो सकी है। अधिकारियों का कहना है कि शव काफी समय तक खुले में पड़े रहने के कारण पूरी तरह सड़ चुका था, जिससे कई अहम मेडिकल संकेत स्पष्ट नहीं हो पाए। इसी वजह से डॉक्टरों ने शरीर के विभिन्न हिस्सों से नमूने लेकर उन्हें सुरक्षित (प्रिजर्व) कर लिया है, ताकि वैज्ञानिक जांच के माध्यम से सच्चाई सामने लाई जा सके।
मेडिकल अधिकारियों ने बताया कि अब मामले में डीएनए परीक्षण और फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) की रिपोर्ट बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। डीएनए जांच के जरिए यह स्पष्ट किया जाएगा कि दुष्कर्म हुआ था या नहीं। एफएसएल रिपोर्ट आने में लगभग एक माह या उससे अधिक समय लग सकता है, जिसके बाद ही जांच एजेंसियां अंतिम निष्कर्ष पर पहुंच सकेंगी।
शव सड़ जाने से कई तथ्य स्पष्ट नहीं, चाकू से वार की संख्या पर संशय
अधिकारियों के अनुसार आरोपी ने पूछताछ में युवती पर चाकू से कई वार करने की बात स्वीकार की थी। घटनास्थल से बरामद चाकू भी मुड़ा हुआ मिला था, जिससे अंदेशा है कि आरोपी ने बार-बार वार किए। प्रारंभिक जांच में 18 से अधिक वार किए जाने की आशंका जताई गई थी, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में वारों की सटीक संख्या स्पष्ट नहीं हो सकी। डॉक्टरों का कहना है कि शव के अत्यधिक सड़ जाने के कारण कई चोटों की प्रकृति और संख्या का वैज्ञानिक रूप से निर्धारण करना संभव नहीं हो पाया। फिलहाल पुलिस डीएनए और एफएसएल रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। जांच अधिकारियों का कहना है कि वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर चार्जशीट को और मजबूत बनाया जाएगा, ताकि अदालत में आरोपी को कठोरतम सजा दिलाई जा सके।