उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। बिहार के एक मौलाना द्वारा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मां पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने के बाद प्रदेश भर में विरोध शुरू हो गया है। बीजेपी और कई हिंदू संगठनों ने इस बयान को लेकर कड़ा विरोध जताया है।
इस मामले में बलरामपुर जिले से शिकायत की शुरुआत हुई। यहां बीजेपी के जिलाध्यक्ष ने पुलिस से कार्रवाई की मांग की। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मौलाना अब्दुल्ला सलीम के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। इसके बाद मामला धीरे-धीरे पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया।
मौलाना के बयान को लेकर उत्तर प्रदेश के कई शहरों में विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं। वाराणसी, लखनऊ समेत कई जगहों पर लोगों ने सड़कों पर उतरकर नाराजगी जताई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि किसी भी राजनीतिक नेता के परिवार के बारे में इस तरह की टिप्पणी करना गलत है और इससे समाज में तनाव बढ़ता है। इसी वजह से लोगों ने मौलाना के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
इस विवाद के बढ़ने के साथ ही प्रदेश के कई जिलों में पुलिस को शिकायतें दी गईं। जानकारी के अनुसार अब तक करीब 83 थानों में मौलाना अब्दुल्ला सलीम के खिलाफ तहरीर दी जा चुकी है।
पुलिस अलग-अलग जिलों में मिली शिकायतों की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की कानूनी प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे घटनाक्रम के बाद यह मामला राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर काफी चर्चा में आ गया है।
वाराणसी में भी इस मुद्दे को लेकर काफी विरोध देखने को मिला। यहां हिंदू युवा वाहिनी के कार्यकर्ताओं ने मौलाना के खिलाफ प्रदर्शन किया।
कार्यकर्ताओं ने गोरखनाथ मठ स्थित कार्यालय से मैदागिन चौराहे तक जुलूस निकाला। इस दौरान लोगों ने नारेबाजी की और मौलाना के बयान की निंदा की। बाद में प्रदर्शनकारियों ने मौलाना का पुतला फूंका।
कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुतले पर चप्पल और लाठियों से भी प्रहार किया और उसके बाद उसे आग के हवाले कर दिया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से जल्द कार्रवाई करने की मांग भी की।
राजधानी लखनऊ में भी इस मुद्दे को लेकर लोगों में नाराजगी देखी गई। अटल चौराहे पर युवाओं ने प्रदर्शन किया और मौलाना की गिरफ्तारी की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान लोगों ने कहा कि समाज में शांति बनाए रखने के लिए इस तरह के बयानों पर सख्ती से रोक लगनी चाहिए। उनका कहना था कि किसी भी नेता या उनके परिवार के बारे में अपमानजनक टिप्पणी करना सही नहीं है।
इस पूरे विवाद के बाद उत्तर प्रदेश का राजनीतिक माहौल भी गर्म हो गया है। बीजेपी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने इस बयान को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। वहीं कई सामाजिक संगठनों ने भी बयान की निंदा की है।
फिलहाल पुलिस और प्रशासन पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं। कई जिलों में सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी गई है ताकि किसी तरह की अप्रिय घटना न हो। अधिकारियों का कहना है कि कानून के अनुसार जांच की जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इस बीच प्रदेश में यह मामला चर्चा का बड़ा विषय बन चुका है।