
इंफाल। मणिपुर में चुराचांदपुर, इंफाल पूर्व, बिष्णुपुर, थौबल, कांगपोकपी, जिरीबाम और इंफाल पश्चिम जिलों में पिछले 24 घंटों के दौरान जनता ने स्वेच्छा से कुल 87 विभिन्न प्रकार के हथियार, गोला-बारूद और अन्य विविध वस्तुएं पुलिस के समक्ष समर्पण किए हैं।
पुलिस ने बुधवार को यह जानकारी दी। पुलिस के सामने समर्पण किए गए हथियारों में खाली मैगजीन के साथ छह 7.62 मिमी सेल्फ-लोडिंग राइफलें (एसएलआर), बिना पंजीकरण संख्या के इंसास 5.56 एलएमजी, एम-79 40 मिमी लाठी यूबीजीएल बंदूक (पाकिस्तान में निर्मित) शामिल हैं।
लोगों ने हथियार सरेंडर किए ये हथियार
- सबसे अधिक हथियार इंफाल पश्चिम जिले में सौंपे गए। इनमें 12 कार्बाइन मशीन गन और मैगजीन, .303 की दो राइफल के साथ मैगजीन, दो एसएलआर राइफल और उसकी मैगजीन, 12 बोर ‘सिंगल बैरल’ की चार गन और एक आईईडी शामिल है।
- जिरीबाम जिले में सौंपे गए हथियारों में 12 बोर की पांच ‘डबल बैरल’ बंदूक, नौ मिमी कार्बाइन के साथ मैगजीन और एक ग्रेनेड शामिल है।
- कांगपोकपी जिले में दो मैगजीन के साथ एके-47 राइफल, .303 राइफल, एक ‘स्मिथ एंड वेसन’ रिवॉल्वर, मैगजीन के साथ .22 पिस्तौल, एक ‘सिंगल बैरल’ राइफल और ग्रेनेड समेत हथियार सौंपे गए।
- मंगलवार को बिष्णुपुर, थौबल, इंफाल पूर्वी और चुराचांदपुर जिलों में भी हथियार पुलिस को सौंपे गए।
राज्यपाल ने किया था आग्रह
राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने लोगों से लूटे गए और अवैध रूप से रखे गए हथियारों को सात दिन के भीतर स्वेच्छा से पुलिस के सुपुर्द करने का 20 फरवरी को आग्रह किया था। उन्होंने आश्वासन दिया था कि इस अवधि के दौरान हथियार छोड़ने वालों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। मणिपुर के मुख्य सचिव पी के सिंह ने रविवार को कहा था कि अगर कोई हथियार त्यागना चाहता है तो लूटे गए और अवैध रूप से रखे गए हथियारों को स्वेच्छा से पुलिस के सुपुर्द करने के लिए दिया गया सात दिन का समय पर्याप्त है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह अवधि समाप्त होने के बाद सुरक्षा बल कार्रवाई करेंगे।
मणिपुर में 13 फरवरी को लगा राष्ट्रपति शासन
मई 2023 से इंफाल घाटी में मेइती और आसपास की पहाड़ियों पर बसे कुकी-जो समूहों के बीच जातीय हिंसा में 250 से अधिक लोग मारे गए हैं और हजारों लोग बेघर हो गए हैं। मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के अपने पद से इस्तीफा देने के कुछ दिनों बाद पूर्वोत्तर राज्य में राजनीतिक अनिश्चितता पैदा हो गई थी। इसके बाद केंद्र ने 13 फरवरी को मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगा दिया था। गृह मंत्रालय द्वारा जारी एक अधिसूचना के अनुसार, मणिपुर विधानसभा को निलंबित कर दिया गया है। विधानसभा का कार्यकाल 2027 तक है।