Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

महाकाल सवारी में 46 साल पुरानी परंपरा में बदलाव! बाबा महाकाल की सवारी में अब श्यामू नहीं सुमा होगी शामिल

उज्जैन में बाबा महाकाल की श्रावण सवारी इस बार बदले हुए अंदाज में नजर आएगी। वर्षों से सवारी का हिस्सा रहा हाथी श्यामू बीमारी के कारण इसमें शामिल नहीं होगा। उसकी जगह मादा हाथी सुमा को तैयार किया गया है। पशु चिकित्सकों की जांच और वन विभाग की मंजूरी के बाद सुमा को सवारी में शामिल करने की तैयारी पूरी हो गई है।
महाकाल सवारी में 46 साल पुरानी परंपरा में बदलाव! बाबा महाकाल की सवारी में अब श्यामू नहीं सुमा होगी शामिल
महाकाल सवारी

उज्जैन। सावन के दूसरे सोमवार को उज्जैन में बाबा महाकाल की दूसरी सवारी निकाली जाएगी। शाम चार बजे मंदिर से शुरू होने वाली इस सवारी में इस बार एक खास बदलाव देखने को मिलेगा। लंबे समय से बाबा महाकाल की सवारी का हिस्सा रहा श्यामू हाथी इस बार नजर नहीं आएगा। स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के कारण पशु चिकित्सकों ने उसे सवारी के लिए उपयुक्त नहीं माना है। अब उसकी जगह मादा हाथी सुमा भगवान मनमहेश के साथ सवारी में शामिल होगी। मंदिर समिति और वन विभाग ने सुमा की जांच और सवारी मार्ग पर ट्रायल के बाद जरूरी तैयारियां पूरी कर ली हैं।

सावन की दूसरी सवारी में बदलाव

बाबा महाकाल की दूसरी सवारी सोमवार शाम चार बजे मंदिर से निकलेगी। हर साल की तरह इस बार भी भगवान महाकाल नगर भ्रमण पर निकलेंगे और भक्तों को अलग अलग स्वरूपों में दर्शन देंगे। हालांकि, सवारी में शामिल हाथी को लेकर इस बार बदलाव हुआ है। श्यामू की जगह अब सुमा को मनमहेश स्वरूप के साथ शामिल किया जाएगा।

बीमारी के कारण श्यामू को मिली छुट्टी

श्यामू को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के चलते इस बार सवारी से दूर रखा गया है। पशु चिकित्सकों ने उसकी जांच करने के बाद उसे सवारी के लिए अस्वस्थ बताया। सवारी के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहते हैं और लगातार शोर भी होता है। ऐसे में हाथी का पूरी तरह स्वस्थ और शांत रहना जरूरी माना जाता है। इसी वजह से मंदिर प्रशासन ने सावधानी बरतते हुए श्यामू को शामिल नहीं करने का फैसला किया।

ये भी पढ़ें: Mangala Gauri Vrat 2026: सावन का चौथा मंगला गौरी व्रत कब है? जानें शुभ मुहूर्त और महत्व

सुमा का हुआ खास ट्रायल

सुमा को सवारी में शामिल करने से पहले उसकी क्षमता की जांच की गई। वन विभाग और पशु चिकित्सा टीम ने उसे सवारी के पूरे मार्ग पर चलाकर देखा। इस दौरान भीड़, तेज आवाज और ढोल-नगाड़ों के बीच उसके व्यवहार को परखा गया। मकसद यह सुनिश्चित करना था कि सवारी के दौरान सुमा बिना किसी परेशानी के महावत के नियंत्रण में रह सके।

46 साल से जुड़ा है हाथियों का परिवार

बाबा महाकाल की सवारी और हाथियों के इस परिवार का रिश्ता करीब 46 साल पुराना है। वर्ष 1980 से 2016 तक श्यामू की मां रामू सवारी में शामिल होती रही। रामू के निधन के बाद श्यामू ने यह जिम्मेदारी संभाली। इस तरह कई दशकों तक एक ही परिवार के हाथियों ने महाकाल की सवारी में अपनी सेवा दी। इस बार श्यामू के बाहर होने से इस परंपरा में बदलाव आया है।

चांदी की पालकी में निकलेंगे बाबा

महाकाल की सवारी की अपनी खास धार्मिक परंपरा है। श्रावण-भाद्रपद के दौरान अलग-अलग सवारियों में भगवान महाकाल के विभिन्न स्वरूपों के दर्शन होते हैं। दूसरी सवारी में चंद्रमौलेश्वर स्वरूप चांदी की पालकी में नगर भ्रमण करते हैं, जबकि मनमहेश स्वरूप हाथी पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देते हैं। इसी क्रम में इस बार मनमहेश के साथ सुमा दिखाई देगी।

श्यामू को लेकर पहले भी उठा था सवाल

श्यामू के पैर में परेशानी को लेकर पहले भी चर्चा हुई थी। उसके स्वास्थ्य की जांच के लिए पशु चिकित्सकों ने जरूरी परीक्षण किए थे। श्यामू के मालिक की ओर से यह भी कहा गया था कि उसके पैर में पुरानी समस्या है। मंदिर समिति ने स्वास्थ्य रिपोर्ट मांगी थी और साफ किया था कि पूरी तरह स्वस्थ पाए जाने पर ही उसे सवारी में शामिल किया जाएगा। जांच के बाद उसे इस बार आराम देने का फैसला हुआ।

सवारी को लेकर प्रशासन पूरी तरह तैयार

महाकाल की सवारी में लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना रहती है। ऐसे में हाथी की सुरक्षा के साथ श्रद्धालुओं की सुरक्षा भी प्रशासन की प्राथमिकता है। सुमा को सवारी में शामिल करने से पहले किए गए ट्रायल का उद्देश्य इसी व्यवस्था को मजबूत करना था। अब सोमवार की सवारी में श्रद्धालु पहली बार श्यामू की जगह सुमा को भगवान मनमहेश के साथ देखेंगे।

ये भी पढ़ें: Sawan Somwar 2026: दूसरे सोमवार पर शिव पूजा का डबल मौका, जानें महादेव को प्रसन्न करने की पूजा विधि

सावन में लगातार निकलती हैं महाकाल की सवारियां

सावन के दौरान बाबा महाकाल की सवारी को लेकर उज्जैन में खास उत्साह रहता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार बाबा महाकाल नगर भ्रमण पर निकलकर अपनी प्रजा का हाल जानने आते हैं। हर सोमवार मंदिर से निकलने वाली सवारी में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। अंतिम शाही सवारी तक यह धार्मिक आयोजन उज्जैन की पहचान और आस्था का बड़ा केंद्र बना रहता है।

Aditi Rawat
By Aditi Rawat

अदिति रावत | MCU, भोपाल से M.Sc.(न्यू मीडिया टेक्नॉलजी)| एंकर, न्यूज़ एक्ज़िक्यूटिव की जिम्मेदारियों...Read More

Latest Posts