Vijay S. Gaur
15 Jan 2026
Naresh Bhagoria
15 Jan 2026
Shivani Gupta
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Shivani Gupta
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जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी भी मामले में कोर्ट से राय मांगने का अधिकार भारत के संविधान ने सिर्फ राज्यपाल या राष्ट्रपति को दिया है। विधि और विधायी कार्य विभाग कोर्ट से यह नहीं पूछ सकता कि ‘नोटरी के खिलाफ क्या कार्रवाई की जानी चाहिए।’जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस रामकुमार चौबे की डिवीजन बेंच ने विभाग के अंडर सेक्रेटरी आरके सिंह को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि इस दुस्साहस के लिए वो लिखित में माफी मांगे। विभाग ने अनूपपुर जिले के एक मामले में नोटरी के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए राय मांगी थी, जिस पर कोर्ट ने सख्त ऐतराज किया।
गौरतलब है कि अनूपपुर जिले में हत्या के आरोप में निर्मल कुमार झा को 28 फरवरी 2023 को उम्रकैद की सजा हुई थी। इस फैसले के खिलाफ निर्मल कुमार झा ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी। 27 अक्टूबर 2025 को सुनवाई के बाद डिवीजन बेंच ने कहा था कि अनूपपुर की जिला सत्र न्यायालय में ट्रायल के दौरान सरकारी वकील (एपीपी) जीपी अग्रवाल ने अपनी ईमानदारी से समझौता किया है। बेंच ने सरकारी वकील जीपी अग्रवाल के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इस मामले में 8 दिसंबर 2025 को हुई सुनवाई पर कोर्ट में यह खुलासा हुआ था कि विधि विभाग कोर्ट से पूछना चाह रहा कि नोटरी के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाए? इस गुस्ताखी को गंभीरता से लेते हुए बेंच ने विधि विभाग के संबंधित अधिकारी को हाजिर होकर जवाब पेश करने कहा था।
इस मामले में हुई सुनवाई के दौरान बुधवार को विधि और विधायी कार्य विभाग के अंडर सेक्रेटरी आरके सिंह, शासकीय अधिवक्ता मानस मणि वर्मा के साथ हाजिर हुए। अंडर सेक्रेटरी के रवैये पर नाराजगी जताते हुए बेंच ने उन्हें लिखित में माफी मांगने के निर्देश दिए।