Peoples Update Special :मध्यप्रदेश आनंद संस्थान ने शुरू की 'नॉन वायलेंट कम्युनिकेशन' ट्रेनिंग, वालंटियर्स को दिया जा रहा प्रशिक्षण

राजीव सोनी, भोपाल। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आए 65 वालंटियर्स इस विशेष प्रशिक्षण शिविर में शामिल हुए। विशेषज्ञों ने अंतर्राष्ट्रीय मनोवैज्ञानिक डॉ. मार्शल रोसेनबर्ग और मध्यस्थ दर्शन के प्रणेता बाबा नागराज द्वारा विकसित संवाद शैली की जानकारी दी। शिविर में आत्मीय संवाद के टूल्स, व्यवहारिक अभ्यास और करुणापूर्ण संचार के तरीके भी सिखाए गए। प्रशिक्षण के बाद आनंदक अपने-अपने जिलों में इस संवाद शैली का प्रसार करेंगे।
पहली बार आनंदकों को दी जा रही एनवीसी की ट्रेनिंग
मध्यप्रदेश में आनंद संस्थान ने पहली बार अपने वालंटियर्स (आनंदक) को नॉन वायलेंट कम्युनिकेशन के तौर-तरीके सिखाने की ट्रेनिंग शुरू की है। इसके तहत आईआईटी कानपुर के विशेषज्ञ डॉ. श्याम कुमार और नागपुर की ट्रेनर और कस्टम्स सेंट्रल एक्साइज में पदस्थ असिस्टेंट कमिश्नर सावित्री अनंत सहित अन्य विशेषज्ञ शिविर के माध्यम से मीठे बोल बोलने के टिप्स दे रहे हैं। प्रशिक्षण में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि अपनी बातचीत से कोई आहत न हो, कटु वचन न बोलें और तनाव रहित सहजता से संवाद कैसे किया जाए।
डॉ. मार्शल रोसेनबर्ग और बाबा नागराज की संवाद शैली पर जोर
प्रशिक्षण शिविर में अंतर्राष्ट्रीय मनोवैज्ञानिक डॉ. मार्शल रोसेनबर्ग और मध्यस्थ दर्शन के प्रणेता बाबा नागराज द्वारा विकसित विशेष संवाद शैली भी सिखाई गई। विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को विपरीत मनोदशा में भी करुणापूर्ण संवाद करने के तरीके बताए। इसके साथ ही कम्युनिकेशन के विभिन्न टूल्स और संवाद प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों की जानकारी देते हुए प्रतिभागियों से व्यवहारिक अभ्यास भी कराया गया।
आत्मीय संवाद के चार प्रमुख टूल्स समझाए
शिविर में बताया गया कि अहिंसक संचार का मूल उद्देश्य यह समझना है कि हर गुस्से, निराशा अथवा झगड़े के पीछे कोई न कोई अधूरी मानवीय जरूरत छिपी होती है। संवाद में सुख-दुख और भावनाओं को समझने पर विशेष जोर दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान चार प्रमुख टूल्स-अवलोकन (ऑब्जर्वेशन), भावनाएं (फीलिंग्स), जरूरत (नीड्स) और अनुरोध (रिक्वेस्ट)-को विस्तार से समझाया गया। साथ ही बिना पूर्वाग्रह, आलोचना, तंज और दबाव के अपनी बात सहजता से रखने का अभ्यास भी कराया गया।
अब जिलों में भी सिखाएंगे आत्मीय संवाद की कला
संस्थान के आनंदक डॉ. श्याम कुमार ने बताया कि नॉन वायलेंट कम्युनिकेशन के माध्यम से परिवार में अलगाव, कार्यस्थल पर तनाव और समाज में विवाद जैसी स्थितियों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देशों में इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं। प्रशिक्षण शिविर में शामिल आनंदक अब अपने-अपने जिलों में जाकर अन्य लोगों को भी अहिंसक और आत्मीय संवाद शैली सिखाएंगे और इसे अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाएंगे।
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विशेषज्ञों ने बताया बेहतर जीवन का प्रभावी माध्यम
राज्य आनंद संस्थान के डायरेक्टर सत्यप्रकाश आर्य ने कहा कि आनंद और समझ के साथ जीवन जीने के तरीकों में नॉन वायलेंट कम्युनिकेशन एक महत्वपूर्ण घटक है। उन्होंने कहा कि कटु वचनों से किसी को आहत करने के बजाय मीठे बोल और संवेदनशील संवाद पर जोर दिया जाता है। वहीं, असिस्टेंट कमिश्नर सावित्री अनंत ने बताया कि वह पिछले दो दशक से जीवन विद्या और मध्यस्थ दर्शन के माध्यम से एनवीसी के अध्यापन से जुड़ी हैं। उन्होंने कहा कि एक सप्ताह तक चले इस शिविर में प्रतिभागियों के साथ सार्थक चर्चा और व्यवहारिक अभ्यास कराया गया, जिससे संवाद को अधिक मानवीय और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हुई।












